संगीत में नए प्रयोग जरूरीः विश्व मोहन भट्ट

भट्ट ने कहा, "वास्तव में यह वाद्य यंत्र के बहाने पूर्व और पश्चिम का संयोजन है। संगीत में नए प्रयोग जरूरी हैं। यदि आप लगातार यह सोचते हैं कि आपने 500 वर्षो तक संगीत के लिए काम किया है तो संगीत का विकास नहीं होगा। तकनीक और सोच दोनों उसी तरह से विकसित होते हैं जिस तरह से आज हमारे पास 12 मेगापिक्सल का कैमरा है।"
भट्ट इन दिनों एक संगीत समारोह में हिस्सा लेने के लिए लंदन में हैं। यहां वह बेटे सलिल के साथ प्रस्तुति देंगे। सलिल ने पिता के नक्शे कदम पर 'सात्विक वीणा' बनाई है। भट्ट अपने गुरु सितारवादक रवि शंकर की तरह भारतीय शास्त्रीय संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहे हैं।
अपने एलबम 'ए मीटिंग बाई द रिवर' के लिए 1994 में 'ग्रैमी' से नवाजे जा चुके भट्ट ने कई उत्सवों में अपनी प्रस्तुति दी है। लंदन के समूह 'नोटएशिया' द्वारा आयोजित समारोह से पहले भट्ट ने आईएएनएस से कहा कि उनका उदे्दश्य नए प्रयोगों के साथ भारतीय संगीत की शुद्धता बरकरार रखना है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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