उर्दू के दीवानों के दिल जवां कर रुख़सत हुआ जश्न-ए-रेख्ता
नई दिल्ली। हजारों हजार लोगों की मौजूदगी में जश्न-ए-रेख्ता 2016 ने विदा कह दिया। भारत में उर्दू की रवायत, नजाकत और इसके अहसास को जीवंत रखने के लिए इस कार्यक्रम को हर वर्ष आयोजित किया जाता है। तीन दिनों के इस महोत्सव में देश-विदश के उर्दू प्रेमियों ने शिरकत की। इस इंटरनेशनल प्रोग्राम का आखिरी दिन युवाओं को समर्पित था।

'मैंने तुम्हे देखा नहीं जी भर के और तुम जाने की बात करते हो... ' रफाकत अली खान का यह गीत रेख्ता के लिए मुफीद बैठती हैं। अपने तीसरे और अंतिम दिन रविवार को जश्न-ए-रेख्त़ा एकदम शबाब पर जाकर खत्म हो गया।

अंतिम दिन खास रहा दारा शिकोह पर नाटक, तिग्मांशु धूलिया, जावेद अख्तर, इम्तियाज अली सरीखे दिग्गजों के साथ फिल्मों में 'उर्दू: कल और आज पर चर्चा'। वक्त उर्दू का था तो मौजूदगी गुलजार साहब की भी थी। उन्होंने युवा लेखकों को उर्दू की अहमियत समझाते हुए कहा, 'फकीरी में नवाबी का मजा देती है उर्दू!' सिनेमा में उर्दू की चर्चा पर इम्तियाज अली ने कहा, 'इरशाद कामिल मुझे इसलिए अच्छे लगते हैं क्योंकि गानों में खूबसूरत उर्दू इस्तेमाल करते हैं।'

'परिंदों को सरहदें नहीं रोक सकती' सरीखी दमदार पंक्तियों से सजे दारा शिकोह के नाटक में दो भाइयों के बीच की 'महाभारत' दिखाई गई। मुगलिया सल्तनत का बादशाह बनने के लिए औरंगजेब और उसके भाइयों के बीच का किस्सा नाटक में बेहतरीन तरीके से सामने लेकर आया गया। दारा शिकोह नाटक का मुख्य पात्र थे।

जश्न ए रेख्त़ा में मुलाकात हुई अजीम खान से। ये जनाब एक अरसे से अमीर खुसरो पर शोध कर रहे हैं। इतना ही नहीं, इन्होंने अमीर खुसरो पर अबतक 11 हजार से भी ज्यादा पन्ने लिख डाले हैं। इनकी मानें, तो जल्द ही इनकी लिखी 8 किताबें सामने होंगी।

जर्नलिज्म की पढ़ाई करने वाले बृजेश फेस्टिवल में तीनों दिन उपस्थित रहे। उन्हें सबसे अच्छा गुलजार को सुनना लगा। उर्दू के एक अन्य दीवाने जनाब विकास त्रिवेदी नौकरी करते हैं लेकिन जॉब से छुट्टी लेकर विशेष तौर पर रेख्त़ा के लिए हाजिर थे। एक अदब की रोशनी में डूबा रेख्त़ा तमाम यादों के साथ खत्म हो गया। अब इंतजार है अगले साल का... जब एक नया उत्सव एक नए जश्न से मुलाकात होगी।












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