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Chhath Puja 2020: जानिए... चार दिनी छठ पर्व में किस दिन क्या होगा

Chhath Puja 2020: सूर्य देव की आराधना से संतान के सुखी जीवन और परिवार की सुख.समृद्धि की कामना से मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को छठ पूजा की जाती है। इस वर्ष छठ पूजा 20 नवंबर शुक्रवार को है। छठ पूजा चार दिनों तक चलने वाला पर्व है, जिसमें हर दिन की अलग-अलग परंपरा और नियम हैं। छठ पूजा का प्रारंभ दो दिन पूर्व चतुर्थ तिथि को नहाय खाय से होता है, फिर पंचमी को खरना होता है। उसके बाद षष्ठी तिथि को छठ पूजा होती है, जिसमें सूर्य देव को शाम का अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद अगले दिन सप्तमी को सूर्योदय के समय में उगते हुए सूर्य को अ‌र्घ्य देकर पारण करके व्रत को पूरा किया जाता है। आइए जानते हैं छठ पूजा में किस दिन क्या किया जाएगा।

जानिए... चार दिनी छठ पर्व में किस दिन क्या होगा

पहला दिन : नहाय-खाय : 18 नवंबर बुधवार

छठ पूजा का प्रारंभ क शुक्ल तिथि से होता है। यह छठ पूजा का पहला दिन होता है, इस दिन नहाय खाय होता है। घर की साफ.सफाई की जाती है। व्रत रखने वाली महिलाएं.पुरुष स्नान करने के बाद नए वस्त्र धारण करते हैं। शाम को शाकाहारी भोजन किया जाता है। इस दिन घर में चने की दाल, चावल आैर लौकी की सब्जी बनती है। व्रत करने वाले लोग इस दिन एक ही समय भोजन करते हैं। इस दिन सूर्योदय प्रात: 06.42 बजे आैर सूर्यास्त सायं 05.38 बजे होगा।

दूसरा दिन : खरना : 19 नवंबर गुरुवार

छठ पूजा का दूसरा दिन खरना होता है। मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को होता है। इस दिन गुड़ डालकर खीर बनाई जाती है आैर प्रसाद के रूप में इसे ही ग्रहण किया जाता है। इस दिन शाम को एक समय भोजन किया जाता है। भोजन में नमक का प्रयोग नहीं किया जाता है। इस दिन घर में पान के पत्ते आैर सुपारी रखकर सूर्यदेव की स्थापना की जाती है। शाम के समय रोटी आैर खीर का प्रसाद लिया जाता है। इसके बाद से निर्जल व्रत प्रारंभ हो जाता है। इस दिन सूर्योदय प्रात: 06.47 बजे होगा आैर सूर्यास्त सायं 05.38 पर होगा। छठ पूजा के लिए षष्ठी तिथि का प्रारंभ 19 नवबंर को रात 09.59 बजे से हो रहा है, जो 20 नवंबर को रात 09.29 बजे तक रहेगी।

तीसरा दिन : मुख्य छठ पूजा, संध्या अर्घ्य, 20 नवंबर शुक्रवार

छठ पूजा का मुख्य दिन मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि होती है। इस दिन ही छठ पूजा होती है। इस दिन छठ पर्व का प्रसाद बनाया जाता है। अधिकांश स्थानों पर चावल के लड्डू बनाए जाते हैं। सूप या बांस की टोकरी में नई फसल, सब्जियां, अदरक, नीबू आदि सजाए जाते हैं। शाम के समय नदी, तालाब में पानी में खड़े रहकर सूर्य को अ‌र्घ्य दिया जाता है। इस दिन सूर्यादय प्रात: 06.48 बजे पर होगा आैर सूर्यास्त सायं 05.37 बजे होना है।

चौथा दिन : सूर्योदय अर्घ्य, पर्व का समापन

छठ पर्व का समापन मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर होता है। इस दिन सूर्योदय के समय सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया जाता है। पूजा के बाद प्रसाद बांटकर छठ पूजा संपन्न की जाती है। इस दिन सूर्योदय प्रात: 06.49 बजे तथा सूर्यास्त सायं 05.37 बजे होगा।

पर्व से जुड़ी खास बातें

  • कोरोना के कारण इस बार ज्यादातर लोग घर में ही जलकुंड बनाकर पूजा करेंगे।
  • यह व्रत स्त्री-पुरुष समान रूप से करते हैं।
  • इस व्रत को करने का कोई बंधन नहीं है। सभी सुहागिन स्त्रियों के साथ विधवा स्त्रियां भी करती हैं।
  • जो लोग यह व्रत करते हैं, वे कभी भी इसे तोड़ते नहीं है। अत्यंत विकट या विशेष परिस्थितियों में ही इसे नहीं किया जाता है।
  • जैसे यदि परिवार में वृद्ध, नि:शक्त लोग हैं तो वे न करें।
  • यदि छठ के दिन ही परिवार में किसी की मृत्यु हो जाए तो भी इस दिन सूप में पूजा की सामग्री रखकर किसी और परिवार को दे दी जाती है, ताकि वे यह व्रत उस परिवार के नाम से कर सकें।
  • इस व्रत में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। घर आैर आसपास के पूरे परिवेश को स्वच्छ किया जाता है।
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