Chhath Puja 2022 samagri: क्या है छठ पूजा की सामग्री? कौन हैं 'छठ मईया'? क्यों मनाते हैं ये पर्व?
लोक आस्था के महापर्व 'छठ' की शुरुआत आज से हो गई है।
छठ पूजा की सामग्री और महत्व : लोक आस्था के महापर्व 'छठ' की शुरुआत आज से हो गई है, वैसे तो ये त्योहार मुख्य रूप से बिहार और पूर्वांचल का है लेकिन अब चूंकि इस प्रांत के लोग देश के लगभग हर राज्य में हैं इसलिए ये पर्व अब सभी जगह मनाया जाने लगा है लेकिन सच मानिए तो 'छठ' बिहार की संस्कृति का प्रतीक है, जो कि त्याग, साधना, प्रेम और धैर्य का पाठ पढ़ाता है। ऋग्वेद में भी इस पूजा का वर्णन मिलता है। वैसे तो ये इस पूजा में 'छठी मईया' और 'सूर्य देव' की पूजा का जिक्र किया जाता है लेकिन सच पूछिए तो ये पर्व सूर्य, प्रकृति, जल, वायु और 'छठ माता' को समर्पित है। 'छठ मां' भगवान सू्र्य की बहन और मां पार्वती का अवतार हैं, जिन्हें मिथिला में 'रनबे माय' कहा जाता है।

छठ पूजा चार दिन की होती है
- 28 अक्टूबर - नहाय खाय
- 29 अक्टूबर- खरना
- 30 अक्टूबर - संध्या अर्घ्य (पहला)
- 31 अक्टूबर -उषा अर्घ्य (दूसराा)
छठ पूजा का सबसे कठिन दिन तीसरा यानी कि षष्ठी तिथि का होता है, जब व्रती 36 घंटे का निर्जला व्रत करते हैं और इस दिन ही सूर्य को पहला अर्घ्य दिया जाता है। इसके अगले दिन सूर्य को उषा अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है। इस पूजा में साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखा जाता है। लोग सिर पर सूप या टोकरी रखते हैं और उसमे सभी पूजा की सामग्री रखकर घाटों और तालाबों के पास जाते हैं और आधे पानी में खड़े होकर सू्र्यदेव को अर्ध्य देते हैं, जिस वक्त सूरज को अर्घ्य दिया जाता है, वो नजारा अपने आप में काफी अद्भुत होता है।

पूजा सामग्री
बांस की टोकरी या सूप, दूध, ठेकुआ, जल, पत्ते लगे गन्ने, पानी वाला नारियल, चावल, सिंदूर, दीपक, धूप, अदरक का हरा पौधा, हल्दी, मूली, नींबू, शरीफा, केला, नाशपाती, शकरकंदी, सुथनी, अगरबत्ती, धूप बत्ती, कपूर, मिठाई, गुड़, चावल का आटा, गेहूंपान, सुपारी, शहद, कुमकुम, चंदन।

कठिन व्रत है 'छठ'
'छठ' पूजा बहुत ज्यादा कठिन है। चार दिनों तक नियमबद्ध तरीके से काम करना, नहाना, खुद खाना बनाना और बिना जल के व्रत रहना और उसके बाद लंबे वक्त तक पानी में खड़े रहकर सूर्य भगवान को अर्ध्य देना, आसान नहीं होता है लेकिन कहते हैं कि भक्ति की शक्ति के आगे सारी चीजें धरी रह जाती हैं और शायद इसलिए ये व्रत करने वाले लोगों के चेहरे पर थकान और परेशानी नहीं बल्कि खुशी और जोश नजर आता है। ये व्रत धन, मान-सम्मान, सुख-समृद्धि, उत्तम संतान की प्राप्ति के लिए रखा जाता है।
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