Chanakya Niti: तुरंत त्याग दें ऐसा स्थान जहां सम्मान न हो

Chanakya Niti in Hindi: जिस स्थान पर आजीविका के साधन उपलब्ध नहीं होते उस स्थान को त्यागना ही उचित होता है।

Chanakya Nit

  • यस्मिन देशे न सम्मानो न वृत्तिर्न च बान्धवा: ।
  • न च विद्यागमोप्यस्ति वासस्तत्र न कारयेत् ।।

अर्थात्- जिस देश में आपका सम्मान न हो, जहां आजीविका का कोई साधन न हो, जिस देश-शहर में अपना कोई बंधु-बांधव न रहता हो, जहां विद्या अध्ययन संभव न हो सके ऐसे स्थान मनुष्य के रहने योग्य नहीं होते हैं।

आचार्य चाणक्य ने अपने उपरोक्त श्लोक में उन स्थानों का वर्णन किया है जो एक सामाजिक मनुष्य के रहने लायक नहीं होते हैं। आचार्य कहते हैं जिस देश में आपका सम्मान न हो। यहां देश से अर्थ केवल देश नहीं, वरन शहर, गांव, मोहल्ला भी हो सकता है। व्यापक अर्थ में देखा जाए तो वह स्थान तुरंत त्याग देना चाहिए जहां आपको सम्मान प्राप्त न हों। जहां हर व्यक्ति आपका विरोधी हो और किसी न किसी कारण से अपमानित करता हो। ऐसे स्थान को भी तुरंत त्याग देना चाहिए जहां कोई अपना नहीं रहता हो। मनुष्य के नाते-रिश्ते, मित्र, बंधु-बांधव हों तो संकट के समय सहायता मिल जाती है। जिस स्थान पर आपको कोई जानने-समझने वाला न हो वहां रहने से आप संकटों में घिर सकते हैं।

आजीविका अर्थात धन का अर्जन जीवनयापन का एकमात्र साधन होता है। धन है तो सबकुछ है। इसलिए मनुष्य को रहने के लिए ऐसे स्थान का चयन करना चाहिए जहां धन कमाने के साधन उपलब्ध हों।

आचार्य चाणक्य शिक्षा पर अत्यधिक जोर देते हैं। शिक्षा को आचार्य ने आभूषण कहा है, शिक्षा ही मनुष्य को संस्कारवान, गुणवान, ज्ञानवान बनाती है इसलिए जिस स्थान पर शिक्षा प्राप्त करने के संसाधन गुरुकुल, स्कूल, कालेज अथवा पुस्तकालय न हों वहां रहने का औचित्य नहीं। इसलिए ऐसे स्थानों को छोड़ देना ही उचित होता है। अत: उपरोक्त श्लोक के अनुसार मनुष्य को अपने रहने के लिए उचित स्थान का चयन करना चाहिए।

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