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Chaitra Navratri and Ram Navami 2022: पढ़ें नवरात्रि और रामनवमी का कनेक्शन, महत्व, रामस्तुति और आरती

नई दिल्ली, 01 अप्रैल। चैत्र नवरात्रि में इस बार देवी दुर्गा का आगमन अश्व पर होगा और प्रस्थान भैंसे पर होगा। नवरात्रि 2 अप्रैल से प्रारंभ हो रही है और इस दिन शनिवार है तो वहीं नवरात्रि का समापन 10 अप्रैल रविवार को होगा। इन पावन दिनों में मां दुर्गा के नौ अवतारों को शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंद माता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।

पढ़ें नवरात्रि और रामनवमी का कनेक्शन, महत्व और आरती

कोई लोग चैत्र नवरात्रि को भगवान विष्णु के सातवें अवतार और अयोध्या के राजा दशरथ और रानी कौशल्या के पुत्र प्रभु श्री राम के जन्म से जोड़ते हैं। ऐसा माना जाता है प्रभ श्री राम का जन्म चैत्र माह के नवमी के दिन हुआ था, जिसे लोग रामनवमी के रूप में पूजते हैं। इस दिन भगवान राम के जन्म और उनके जीवन से जुड़े स्थानों को सजाया जाता है और प्रभु श्री राम की पूजा की जाती है। इस बार राम नवमी तिथि- 10 अप्रैल को है।

राम नवमी सबसे बड़े हिंदू त्योहारों में से एक है और इसे कई तरीकों से मनाया जाता है। कुछ भक्त स्नान करते हैं और राम की लघु मूर्तियों को तैयार करते हैं, मूर्ति के सामने एक दीपक जलाते हैं और फिर इन मूर्तियों को उनके जन्म को चिह्नित करने के लिए पालने में रखते हैं, और खीर का भोग लगाते हैं।

पढ़ें नवरात्रि और रामनवमी का कनेक्शन, महत्व और आरती

राम जी के मंत्र और स्तुति:

  • श्री रामचन्द्र कृपालु भज मन हरण भवभय दारुणम्,
  • नवकंज लोचन, कंज मुख,
  • कर कंज, पद कंजारुणम्.
  • कंदर्प अगणित अमित छबि,
  • नव नील नीरज सुन्दरम्।
  • पटपीत मानहुं तड़ित रूचि-शुची,
  • नौमि जनक सुतावरम्॥

मंत्र:

ॐ नमो भगवते रामचंद्राय:

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पढ़ें नवरात्रि और रामनवमी का कनेक्शन, महत्व और आरती

श्री राम की आरती:

  • आरती कीजै राजा रामचन्‍द्र जी के
  • हरिहर भक्ति का रघु संतन सुख दीजै हो।
  • आरती कीजै राजा रामचन्‍द्र जी के
  • हरिहर भक्ति का रघु संतन सुख दीजै हो।
  • पहली आरती पुष्‍प की माला
  • पहली आरती पुष्‍प की माला
  • पुष्‍प की माला हरिहर पुष्‍प की माला
  • कालिय नाग नाथ लाये कृष्‍ण गोपाला हो।
  • आरती कीजै राजा रामचन्‍द्र जी के
  • हरिहर भक्ति का रघु संतन सुख दीजै हो।
  • दूसरी आरती देवकी नन्‍दन
  • दूसरी आरती देवकी नन्‍दन
  • देवकी नन्‍दन हरिहर देवकी नन्‍दन
  • भक्‍त उबारे असुर निकन्‍दन हो
  • आरती कीजै राजा रामचन्‍द्र जी के
  • हरिहर भक्ति का रघु संतन सुख दीजै हो।
  • तीसरी आरती त्रिभुवन मोहे
  • तीसरी आरती त्रिभुवन मोहे
  • त्रिभुवन मोहे हरिहर त्रिभुवन मोहे हो
  • गरुण सिंहासन राजा रामचन्‍द्र शोभै हो
  • आरती कीजै राजा रामचन्‍द्र जी के
  • हरिहर भक्ति का रघु संतन सुख दीजै हो।
  • चौथी आरती चहुँ युग पूजा
  • चौथी आरती चहुँ युग पूजा
  • चहुँ युग पूजा हरिहर चहुँ युग पूजा
  • चहुँ ओरा राम नाम अउरु न दूजा हो
  • आरती कीजै राजा रामचन्‍द्र जी के
  • हरिहर भक्ति का रघु संतन सुख दीजै हो।
  • पंचम आरती रामजी के भावै
  • पंचम आरती रामजी के भावै
  • रामजी के भावै हरिहर रामजी के भावै
  • रामनाम गावै परमपद पावौ हो
  • आरती कीजै राजा रामचन्‍द्र जी के
  • हरिहर भक्ति का रघु संतन सुख दीजै हो।
  • षष्‍ठम आरती लक्ष्‍मण भ्राता
  • षष्‍ठम आरती लक्ष्‍मण भ्राता
  • लक्ष्‍मण भ्राता हरिहर लक्ष्‍मण भ्राता
  • आरती उतारे कौशिल्‍या माता हो
  • आरती कीजै राजा रामचन्‍द्र जी के
  • हरिहर भक्ति का रघु संतन सुख दीजै हो।
  • सप्‍तम आरती ऐसो तैसो
  • सप्‍तम आरती ऐसो तैसो
  • ऐसो तैसो हरिहर ऐसो तैसो
  • ध्रुव प्रहलाद विभीषण जैसो हो
  • आरती कीजै राजा रामचन्‍द्र जी के
  • हरिहर भक्ति का रघु संतन सुख दीजै हो।
  • अष्‍टम आरती लंका सिधारे
  • अष्‍टम आरती लंका सिधारे
  • लंका सिधारे हरिहर लंका सिधारे
  • रावन मारे विभीषण तारे हो
  • आरती कीजै राजा रामचन्‍द्र जी के
  • हरिहर भक्ति का रघु संतन सुख दीजै हो।
  • नवम आरती वामन देवा
  • नवम आरती वामन देवा
  • वामन देवा हरिहर वामन देवा
  • बलि के द्वारे करें हरि सेवा हो
  • आरती कीजै राजा रामचन्‍द्र जी के
  • हरिहर भक्ति का रघु संतन सुख दीजै हो।
  • कंचन थाल कपूर की बाती
  • कंचन थाल कपूर की बाती
  • कपूर की बाती हरिहर कपूर की बाती
  • जगमग ज्‍योति जले सारी राती हो
  • आरती कीजै राजा रामचन्‍द्र जी के
  • हरिहर भक्ति का रघु संतन सुख दीजै हो।
  • तुलसी के पात्र कण्‍ठ मन हीरा
  • तुलसी के पात्र कण्‍ठ मन हीरा
  • कण्‍ठ मन हीरा हरिहर कण्‍ठ मन हीरा
  • हुलसि हुलसि गये दास कबीरा हो
  • आरती कीजै राजा रामचन्‍द्र जी के
  • हरिहर भक्ति का रघु संतन सुख दीजै हो।
  • जो राजा रामजी के आरती गावै
  • जो राजा रामजी के आरती गावै
  • आरती गावै हरिहर आरती गावै
  • बैठ बैकुण्‍ठ परम पद पावै हो
  • आरती कीजै राजा रामचन्‍द्र जी के
  • हरिहर भक्ति का रघु संतन सुख दीजै हो।

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