Ritabrata को झटका देगी TMC? Chandrima-Sayani की ताजपोशी! 8 MLA-6 MP के साथ Mamata ने क्या-क्या प्लान बनाए?
Bengal Political Crisis: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) अपने 28 सालों के इतिहास का सबसे गंभीर संकट झेल रही है। हालिया विधानसभा चुनाव में भाजपा के भारी हार के बाद पार्टी अब अंदरूनी विद्रोह की चपेट में आ गई है। विधानसभा स्पीकर द्वारा बागी नेता ऋतब्रता बनर्जी को विपक्ष का नेता (Leader of Opposition) नियुक्त किए जाने के फैसले के खिलाफ TMC हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रही है।
वरिष्ठ TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने इसे 'अवैध' करार देते हुए कहा, 'हम सोमवार (8 जून) को कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर करेंगे। हम सड़कों पर लड़ेंगे और अदालतों में लड़ेंगे।' इस बीच ममता बनर्जी के कालीघाट आवास पर शुक्रवार (5 जून) को बुलाई गई अहम बैठक में बेहद कम उपस्थिति ने पार्टी की कमजोर स्थिति को और उजागर कर दिया। कुल 80 विधायकों में से सिर्फ 8 और 28 लोकसभा सांसदों में से मात्र 6 ही पहुंचे। इसमें चंद्रिमा भट्टाचार्य को पश्चिम बंगाल TMC की नई प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया। वहीं, सायनी घोष को पार्टी की यूथ विंग की कमान सौंपी गई। आइए जानते हैं विस्तार से मीटिंग में क्या-क्या हुआ? कैसे TMC में संकट बना?

TMC में 58 विधायकों की बगावत
मई 2026 के विधानसभा चुनाव में TMC मात्र 80 सीटों पर सिमट गई, जबकि भाजपा ने 207+ सीटें जीतकर सूबे में अपनी पहली सरकार बनाई। चुनावी हार के बाद TMC में असंतोष उबल पड़ा।
3 जून को 58 TMC विधायकों (दो-तिहाई से अधिक) ने स्पीकर रथिंद्र बोस के सामने पत्र सौंपा और ऋतब्रता बनर्जी (जिन्हें पहले पार्टी से निष्कासित किया गया था) को विधायक दल का नेता चुन लिया। स्पीकर ने इस दावे को स्वीकार कर उन्हें विपक्ष का नेता बना दिया और आधिकारिक कक्ष भी सौंप दिया। यह कदम महाराष्ट्र के शिंदे-ठाकरे वाली बगावत की याद दिलाता है।

ऋतब्रता ने दावा किया कि उनकी संख्या और बढ़ेगी। उन्होंने कहा, 'हमारी संख्या बढ़ती ही जाएगी। विधानसभा सत्र के दौरान और विधायक हमारे साथ आएंगे।'
Mamata Banerjee Residence Meeting: ममता बनर्जी के घर बैठक, मात्र 8 MLA और 6 सांसद
विद्रोह के बाद ममता बनर्जी ने शुक्रवार (5 जून) को कालीघाट स्थित अपने आवास पर पार्टी बैठक बुलाई। लेकिन उपस्थिति बेहद निराशाजनक रही:
उपस्थित विधायक (8):
- बीना मंडल
- आशिमा पात्रा
- मदन मित्रा
- कुणाल घोष
- फिरहाद हकीम
- शोभनदेब चट्टोपाध्याय
- बिमान बनर्जी
- अशोक कुमार देब
उपस्थित सांसद (6):
- डोला सेन
- माला रॉय
- कल्याण बनर्जी
- अभिषेक बनर्जी
- डेरेक ओ'ब्रायन
- सुदीप बंद्योपाध्याय
कुल 28 लोकसभा सांसदों में से सिर्फ 6 और राज्यसभा के 13 में से मात्र 2 (डोला सेन और डेरेक) ही पहुंचे। यह आंकड़ा TMC की मौजूदा कमजोरी को साफ दर्शाता है।
Mamata Banerjee Meeting Decisions: बैठक में क्या फैसले हुए?
कल्याण बनर्जी ने बैठक के बाद फैसलों की घोषणा की:
- ऋतब्रता को LoP बनाए जाने के फैसले के खिलाफ सोमवार को हाईकोर्ट में याचिका।
- अभिषेक बनर्जी की मदद के लिए डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन को राष्ट्रीय महासचिव (संयुक्त) बनाया गया।
- चंद्रिमा भट्टाचार्य को पश्चिम बंगाल TMC की नई प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया (सुब्रत बख्शी अस्वस्थ होने के कारण)।
- सजदा अहमद, ममता ठाकुर, नयना बंद्योपाध्याय, स्वाति खांडेकर को उपाध्यक्ष बनाया गया।
- अन्य पद: सायनी घोष (Sayani Ghosh युवा TMC), माला रॉय (महिला कांग्रेस), प्रियंका अधिकारी (छात्र विंग)।
- प्रवक्ता: डेरेक ओ'ब्रायन और कल्याण बनर्जी (राष्ट्रीय), कुणाल घोष (राज्य)।
फिरहाद हकीम ने कोलकाता महापौर पद से इस्तीफा दे दिया।
TMC पर क्या बीत रही है?
TMC का यह संकट सिर्फ LoP पद का नहीं, बल्कि पार्टी की आत्मा और ममता बनर्जी की सर्वोच्चता पर सवाल है। विद्रोह मुख्य रूप से अभिषेक बनर्जी की बढ़ती भूमिका और कथित तानाशाही के खिलाफ बताया जा रहा है, हालांकि ऋतब्रता गुट ममता को 'सर्वोच्च नेता' मानने का दावा कर रहा है।
आगे क्या?
TMC ने स्पष्ट किया कि वह कानूनी और सड़क दोनों मोर्चों पर लड़ाई लड़ेगी। कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर होने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी। ऋतब्रता गुट अपनी संख्या बढ़ाने और TMC की "असली" पहचान का दावा करने में लगा है।
यह संकट TMC के लिए 'Make or Break' मोमेंट है। अगर ममता गुट विद्रोह को काबू नहीं कर पाया तो पार्टी टूटने की कगार पर पहुंच सकती है। वहीं, अगर ऋतब्रता गुट मजबूत हुआ तो बंगाल की राजनीति में नया समीकरण उभरेगा।













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