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आप भी जानिए कैसे पूजा को संपूर्ण बनाता है पान

हिंदू शास्त्रीय पूजा विधान में प्रकृति के समावेश का बड़ा ही सुंदर उदाहरण है पान। गहरा हरा, चटकीला पान का पत्ता हिंदू पूजा में चढ़ाई जाने वाली आठ प्रमुख सामग्रियों के विधान यानी मंगलाष्टक में विशेष स्थान रखता है। हमारे यहां पूजा का प्रारंभ ही पान, सुपारी और बताशे के द्वारा स्थापना के साथ होता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि पान केवल पूजन सामग्री का एक हिस्सा मात्र नहीं है। पूजा में पान चढ़ाए जाने के कुछ विशेष सांकेतिक अर्थ और उद्देश्य हैं। पान स्वयं भी अपनी उत्पत्ति से धर्म का ही एक भाग है। आइये आज पान की ही चर्चा करते हैं।

पान के बारे में कुछ रोचक बात

पान के बारे में कुछ रोचक बात

पान को संस्कृत में तांबूल और अंग्रेजी में बीटल लीफ कहा जाता है। पान धरती पर कब आया, इस बारे में बड़ी ही रोचक बात स्कंद पुराण में पढ़ने को मिलती है। इसके अनुसार जब देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया, तब समस्त दैवीय वस्तुओं के साथ पान भी निकला था। सबसे पहले भगवान शिव और मां पार्वती ने इसका सेवन किया। तभी से इसे दैवीय वस्तुओं में स्थान प्राप्त है।

देवताओं के लिए सर्वश्रेष्ठ आसन

देवताओं के लिए सर्वश्रेष्ठ आसन

पान को देवताओं के लिए सर्वश्रेष्ठ आसन माना जाता है। हमारे यहां पूजा के प्रारंभ में जब भगवान की स्थापना की जाती है, तो सबसे पहले स्थान को जल से पवित्र कर, अक्षत यानि चावल के ढेर पर पान का पत्ता रख, उस पर सुपारी रखी जाती है। कलश स्थापना में भी कई स्थानों पर कलश के मुख पर पान के पांच पत्ते और उस पर खड़ा नारियल रखकर पूजा शुरू की जाती है। माना जाता है कि पान में पानी को शुद्ध करने वाले तत्व होते हैं। हिंदू धर्म में यह विश्वास किया जाता है कि पान में सभी देवताओं का वास होता है। पान और देवताओं के संबंध में पुराणों में क्या बताया गया है,

आइये देखते हैं-

आइये देखते हैं-

1. पान के पत्ते के ऊपरी हिस्से में शुक्र और इंद्र विराजमान रहते हैं।
2. पान के बीच के हिस्से में मां सरस्वती का वास होता है।
3. पान के निचले सिरे पर मां लक्ष्मी विराजती हैं।
4. जहां पान का पत्ता डंडी से जुड़ा होता है, वह स्थान ज्येष्ठा लक्ष्मी का होता है।
5. पान के पत्ते में भगवान विष्णु स्वयं समाहित हैं।
6. पान की बाहरी किनारी पर भगवान शिव और कामदेव निवास करते हैं।
7. पान के पत्ते के पीछे की ओर मां पार्वती और मंगलादेवी का स्थान माना जाता है।
8. पान के पत्ते का दायां हिस्सा भूमिदेवी का निवास माना जाता है।
9. संपूर्ण पान को भगवान सूर्यनारायण का प्रतीक माना जाता है।

वैज्ञानिक महत्व भी है पान का

वैज्ञानिक महत्व भी है पान का

पान का केवल धार्मिक महत्व नहीं है, बल्कि पूजा में इसे शामिल करने के पीछे कुछ वैज्ञानिक तथ्य भी हैं। पान को ताजगी और समृद्धि का स्रोत माना जाता है। सबसे पहली बात तो यह कि पान में पाचक रसों का भंडार होता है। पूजा के समापन पर सामान्य तौर पर तला हुआ गरिष्ठ भोजन परोसा जाता है। ऐसे भोजन को पचाने में पान सहायक होता है, साथ ही सुगंध से सुवासित यह पान बढि़या माउथ फ्रेशनर का भी काम करता है। यही वजह है कि भोजन के बाद पंडित जी को पान के साथ दक्षिणा देने का विधान शास्त्रों में है। पोषण की दृष्टि से देखें तो पान में विटामिन ए और सी का भंडार होता है। इसके साथ ही पान में भरपूर मात्रा में कैल्शियम भी पाया जाता है। माना जाता है कि पान का सेवन हड्डियों को मजबूत बनाता है और व्यक्ति को ऑस्टियोपोरोसिस से बचाता है। पान में कीटाणुओं को समाप्त करने के गुण होते हैं। यह मुख को शुद्ध, आवाज को दमदार और जीभ और दांतों को सुरक्षा देता है।

पान स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है-

पान स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है-

तो देखा आपने, पान ना सिर्फ धर्म बल्कि स्वास्थ्य के हिसाब से भी कितना महत्वपूर्ण है। प्रकृति ने हर वस्तु मनुष्य के लिए उपयोगी ही बनाई है। जरूरत वस्तु का महत्व जानने और उसे अपनाने की है। तो इस जानकारी के बाद पान को अपने धार्मिक और दैनिक जीवन में शामिल कीजिए और पूजा को संपूर्ण और जीवन को स्वस्थ बनाइए।

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