Bach Baras 2025: बछबारस का व्रत आज, जानिए कथा और महत्व
Bach Baras 2025: बछबारस का व्रत भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी को किया जाता है। इसे गोवत्स द्वादशी भी कहा जाता है। यह व्रत महिलाएं अपनी संतान की दीर्घायु और उनके स्वस्थ जीवन के लिए करती हैं। ये पावन दिन आज आया है।
पुत्र की प्राप्ति के लिए भी यह व्रत किया जाता है। आज महिलाएं व्रत रखकर गाय-बछड़े की पूजा करती है। इस दिन दूध और दूध से बने पदार्थों का सेवन व्रती महिलाएं नहीं करती हैं।

कैसे की जाती है पूजा (Bach Baras 2025)
बछबारस के दिन किसी गोशाला में जाकर गाय-बछड़े को स्नान करवाकर उनका आकर्षक श्रृंगार किया जाता है। हल्दी, कुमकुम, रौली, चंदन, पुष्प आदि से उनका पूजन किया जाता है। उन्हें फल, चावल, गुड़, मूंग, हरी घस आदि खाने के लिए दिए जाते हैं। पूजन के बाद व्रत की कथा सुनें या पढ़ें।
सायंकाल में एक बार फिर गाय-बछड़े का पूजन करें
दिनभर निराहार रहते हुए सायंकाल में एक बार फिर गाय-बछड़े का पूजन करें और भोजन ग्रहण करें। भोजन में दूध और दूध से बनी वस्तुओं का सेवन बिलकुल नहीं करना चाहिए।
बछबारस की कथा (Bach Baras 2025)
एक गांव में एक ग्वालिन रहती थी। उसका नित्य का कार्य था गाय का दूध दुहकर बाजार में बेचने जाती थी। उसी से उसका घर चलता था। एक बार ग्वालिन बाजार में दूध-दही बेचने जा रही थी। मार्ग में उसे एक साधु मिले। साधु ने कहा- आज तो बछबारस है, आज के दिन दूध-दही का सेवन करना और बेचना वर्जित है। ग्वालिन ने साधु की बात अनसुनी कर दी और दूध बेचने चली गई। रात को जब वह घर लौटी तो देखा कि उसका बच्चा मृत पड़ा है। वह विलाप करने लगी। तभी साधु वहां आए और बोले- मेरे कहने के बाद भी तुमने बछबारस के दिन गोमाता का दूध बेचा और उसका अनादर किया, इसी कारण तुम्हें यह दुख मिला है।
साधु ने कहा-'बछबारस का व्रत करो'
ग्वालिन ने पश्चाताप किया और साधु से इसका उपाय पूछा। साधु ने कहा कि तुम तुरंत बछबारस व्रत करने का संकल्प लो और अगले वर्ष जब भाद्रपद कृष्ण द्वादशी के दिन यह व्रत आए तो विधि विधान से करो। इससे तुम्हारा पुत्र जीवित हो जाएगा। यदि तुम अगले वर्ष व्रत करना भूल गई तो फिर से ऐसा ही दंड भोगना पड़ेगा। साधु के कहने पर ग्वालिन से तुरंत व्रत का संकल्प लिया और उसका पुत्र जीवित हो उठा। अगले वर्ष उसे पूर्ण श्रद्धा से व्रत किया और अपने पुत्र के साथ सुख पूर्वक रहने लगी।












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