Ashadha Amavasya 2025 : आज है आषाढ़ी अमावस्या, जानिए क्या है पूजा विधि और महत्व?
Ashadha Amavasya 2025: आषाढ़ मास की अमावस्या को बड़ी अमावस्या में गिना जाता है। इस अमावस्या के अगले ही दिन आषाढ़ी गुप्त नवरात्रि प्रारंभ हो जाती है। आज ये पावन दिन आया है, आषाढ़ी अमावस्या के दिन वृद्धि योग और नाग करण भी आ रहे हैं जो संकेत है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, पूजन आदि करने से कुंडली के समस्त दोषों का निवारण होता है।

क्या करें
आषाढ़ी अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान अवश्य करना चाहिए। पवित्र नदी उपलब्ध न हो तो पवित्र नदियों गंगा, यमुना, नर्मदा, गोदावरी आदि का जल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद नित्य पूजन संपन्न करें। यदि पवित्र नदियों के तट पर स्नान कर रहे हैं तो अंजुली भरकर सूर्य को जल चढ़ाएं। किसी पुरोहित के माध्यम से जाने-अनजाने पितरों के निमित्त पिंडदान, तर्पण, श्राद्धकर्म आदि करें। इससे पितृ दोष समाप्त होंगे।
अमावस्या पर करें नारायण बली
नारायण बली एक विशेष वैदिक कर्मकांड है जो पूर्वजों की आत्मा की शांति और अकाल मृत्यु या पितृदोष के निवारण के लिए किया जाता है। यह कर्मकांड मुख्य रूप से उन लोगों की आत्मा की मुक्ति के लिए किया जाता है जिनकी मृत्यु अकाल, दुर्घटना, आत्महत्या, हत्या, डूबना, अग्नि से जलना, बिजली गिरना आदि असामान्य कारणों से हुई हो।
नारायण बली क्यों की जाती है
- अकाल मृत्यु से पीड़ित आत्मा की मुक्ति के लिए : जब किसी की मृत्यु समय से पहले होती है या वह अपनी अंतिम इच्छा पूरी नहीं कर पाता, तो उसकी आत्मा अक्सर प्रेत योनि में भटकती रहती है। नारायण बली उन्हें मोक्ष देने का उपाय है।
- पितृदोष के निवारण के लिए : यदि कुंडली में पितृदोष है, जैसे सप्तम या नवम भाव में सूर्य-राहु की युति हो, तो परिवार में बाधाएं आती हैं - विवाह में देरी, संतान न होना, धनहानि आदि। नारायण बली से इन दोषों की शांति होती है।
- श्राद्ध या तर्पण न होने पर : यदि मृत व्यक्ति का विधिपूर्वक श्राद्ध या तर्पण नहीं हुआ, तो उसकी आत्मा असंतुष्ट रहती है। नारायण बली द्वारा यह संतुष्टि दी जाती है।
- गृह क्लेश, बार-बार मृत्यु या बिमारी होने पर : यदि घर में बार-बार किसी की मृत्यु हो रही है। दुर्घटनाएं हो रही हों या अज्ञात कारणों से दुख मिल रहे हों, तो नारायण बली आवश्यक माना जाता है।












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