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Anant Chaturdashi 2025: क्या है अनंत चतुर्दशी की कथा और मुहूर्त? कैसे मिलेगा पूजा का शुभ-लाभ?

Anant Chaturdashi 2025: आज भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी यानी कि अनंत चतुर्दशी है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और लोग 'अनंत सूत्र' धारण कर भगवान से सुख-समृद्धि और जीवन में शांति की प्रार्थना करते हैं। यह तिथि गणेश उत्सव के समापन यानी गणेश विसर्जन से भी जुड़ी है इसलिए आज का महत्व भी अनंत है।

अनंत चतुर्दशी मुहूर्त ( Anant Chaturdashi 2025 Muhurat)

  • 6 सितंबर सुबह 09:01 बजे से 10:35 तक
  • 6 सितंबर सुबह 10:35 बजे से 12:09 तक
Anant Chaturdashi 2025

इस दिन भगवान विष्णु और गणेश जी की पूजा करके व्रत करने से घर में सुख-समृद्धि, वैवाहिक जीवन में मधुरता और सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति प्राप्त होती है लेकिन इस दिन कुछ बातों का ख्याल रखना बहुत जरूरी है, वरना आपको पूजा का उतना फल नहीं मिलेगा, जितना का मिलना चाहिए।

Anant Chaturdashi 2025 पर क्या करें?

  • प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र पहनें।
  • भगवान विष्णु और गणेश जी की पूजा करें ।
  • इस दिन अनंत सूत्र (कुंकुम, हल्दी और 14 गांठों वाला धागा) दाहिने हाथ (पुरुष) और बाएं हाथ (महिला) में बांधें।
  • अनंत चतुर्दशी की कथा अवश्य सुनें या पढ़ें।
  • जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और धन का दान करें।

Anant Chaturdashi 2025 पर क्या ना करें?

  • क्रोध, ईर्ष्या और कटु वचन बोलने से बचें।
  • मांसाहार और मदिरा का सेवन न करें।
  • अनंत सूत्र को उतारकर कहीं फेंके या अपवित्र स्थान पर न रखें।

Anant Chaturdashi 2025 की कथा

प्राचीन समय में एक ब्राह्मण थे जिनका नाम था सुमन्त।उनकी एक कन्या थी जिसका नाम था सुशीला। समय बीतने पर सुशीला का विवाह एक ऋषि पुत्र से हुआ। विवाह के बाद जब वे दोनों ससुराल जा रहे थे तो रास्ते में नदी किनारे कुछ स्त्रियां अनंत चतुर्दशी का व्रत करती हुई दिखीं। सुशीला ने उन स्त्रियों से इस व्रत का महत्व पूछा। उन्होंने बताया कि यह अनंत चतुर्दशी का व्रत है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा कर अनंत सूत्र धारण करने से जीवन में सुख-समृद्धि और सभी संकटों से मुक्ति मिलती है। सुशीला ने उसी दिन यह व्रत धारण कर लिया। कुछ ही समय बाद उसके जीवन में सुख-शांति और वैभव बढ़ने लगे। परंतु उसके पति को यह सब अंधविश्वास लगा। उन्होंने क्रोध में आकर अनंत सूत्र निकालकर आग में डाल दिया।

घर का वैभव धीरे-धीरे नष्ट हो गया

इसका परिणाम यह हुआ कि उनके घर का वैभव धीरे-धीरे नष्ट हो गया। पति-पत्नी दोनों दुखी होकर इधर-उधर भटकने लगे, तभी एक दिन ऋषि पुत्र ने पश्चाताप करते हुए कठोर तपस्या आरंभ की। तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु प्रकट हुए और बोले कि हे वत्स! तुमने अनंत सूत्र का अपमान किया था, इसलिए यह कष्ट भोगना पड़ा। अब यदि तुम श्रद्धापूर्वक अनंत चतुर्दशी का व्रत करोगे तो तुम्हारे सभी कष्ट दूर हो जाएंगे। ऋषि पुत्र ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर पुनः अनंत चतुर्दशी का व्रत किया। इसके प्रभाव से उनके सारे दुख-दरिद्रता दूर हो गई और घर में सुख-समृद्धि लौट आई।

Disclaimer: इस आलेख का मतलब किसी भी तरह का अंधविश्वास पैदा करना नहीं है। यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार की राय जरूर लें।

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