Ali Khamenei Funeral: खामेनेई के साथ कौन चार लोग होंगे दफन? क्या है चारों से रिश्ता? एक है मासूम
Ali Khamenei Funeral: ईरान की राजधानी तेहरान के ग्रैंड मुसल्ला में जब पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की राजकीय अंतिम यात्रा शुरू हुई, तो वहां का माहौल बेहद भावुक था। लाखों लोग अपने नेता को अंतिम विदाई देने पहुंचे थे। लेकिन इस पूरे समारोह में एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया। अली खामेनेई के ताबूत के साथ चार और ताबूत रखे गए थे। इनमें एक बहुत छोटा ताबूत भी था, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। आइए जानते हैं कि ये चार लोग कौन थे और इन्हें खामेनेई के साथ राजकीय सम्मान क्यों दिया गया।
एक साथ रखे गए पांच ताबूत, रुला दिया सबको
ग्रैंड मुसल्ला में रखे गए पांच ताबूतों में सबसे बड़ा ताबूत अयातुल्ला अली खामेनेई का था। उनके बगल में परिवार के चार अन्य सदस्यों के ताबूत रखे गए थे। इनमें सबसे ज्यादा लोगों का ध्यान एक छोटे ताबूत ने खींचा, जिसमें सिर्फ 14 महीने की मासूम बच्ची का शव था। इस मंजर ने न सिर्फ ईरान बल्कि पूरी दुनिया को भावुक कर दिया और सोशल मीडिया से लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक इसकी चर्चा होने लगी।

28 फरवरी 2026 के हमले में गई थी पूरे परिवार की जान
ईरानी प्रशासन के मुताबिक, 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के साझा हवाई हमले में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हुई थी। इस हमले में उनके परिवार के कई सदस्य भी मारे गए थे। सुरक्षा हालात और युद्ध जैसी स्थिति के कारण शवों को कई महीनों तक सुरक्षित रखा गया। बाद में युद्धविराम और सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होने के बाद सभी का एक साथ पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया गया।
खामेनेई के साथ किन चार लोगों को दी गई अंतिम विदाई?
अली खामेनेई के साथ उनकी सबसे बड़ी बेटी बुशरा अल-खामेनेई का ताबूत रखा गया था। बुशरा सार्वजनिक जीवन से दूर रहती थीं, लेकिन परिवार और ईरान की आंतरिक नीतियों में उनकी राय को काफी अहम माना जाता था। उनके बगल में उनके पति मिसबाह अल-होदा बाघेरी का ताबूत रखा गया। बाघेरी ईरान के एक प्रभावशाली धार्मिक परिवार से जुड़े थे और उन्हें देश के धार्मिक नेतृत्व का अहम हिस्सा माना जाता था। उनकी भी मौत उसी हवाई हमले में हुई थी।
तीसरा ताबूत जहरा हद्दाद अदेल का था, जो मोजतबा खामेनेई की पत्नी थीं। वह ईरान के पूर्व संसद अध्यक्ष गुलाम-अली हद्दाद-अदेल की बेटी थीं। उनका परिवार ईरान की राजनीति, शिक्षा और सांस्कृतिक संस्थानों में लंबे समय से प्रभावशाली माना जाता रहा है। वे अली खामेनेई की रिश्ते में बहू लगती थीं।
14 महीने की पोती का ताबूत बना सबसे भावुक पल
सबसे छोटा ताबूत जहरा मोहम्मदी गोलपायगनी का था, जो अली खामेनेई की 14 महीने की पोती थीं। इस मासूम बच्ची की मौत ने युद्ध की सबसे दर्दनाक सच्चाई दुनिया के सामने रख दी। लोगों का कहना था कि युद्ध में सबसे ज्यादा नुकसान अक्सर उन लोगों को होता है जिनका किसी संघर्ष से कोई लेना-देना नहीं होता। यही वजह रही कि इस बच्ची की तस्वीरें दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गईं।
सुरक्षा कारणों से महीनों बाद हुआ अंतिम संस्कार
हमले के बाद ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच तनाव काफी बढ़ गया था। ऐसे माहौल में लाखों लोगों की मौजूदगी वाला राजकीय अंतिम संस्कार कराना सुरक्षा के लिहाज से संभव नहीं था। इसलिए शवों को सुरक्षित स्थान पर रखा गया। कई महीनों तक चली कूटनीतिक बातचीत और युद्धविराम समझौते के बाद सरकार ने अंतिम संस्कार की तारीख घोषित की।
सरकार ने पूरे कार्यक्रम के लिए डिटेल शेड्यूल भी जारी किया। 2 और 3 जुलाई को तेहरान के ग्रैंड मुसल्ला में राजकीय शोक सभा और विदेशी नेताओं की श्रद्धांजलि हुई। 4 और 5 जुलाई को आम लोगों को अंतिम दर्शन का मौका दिया गया। जबकि 9 जुलाई को मशहद में पूरे राजकीय सम्मान के साथ सभी को सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरे ईरान पर टिकी हुई हैं।
इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।














Click it and Unblock the Notifications