Kanpur में Fake Marksheet का 'एजुकेशन माफिया' बेनकाब! 60 करोड़ के नेटवर्क को तोड़ा, 2 आरोपी अरेस्ट
Kanpur Fake Marksheet Racket Busted: शिक्षा के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े की एक बड़ी मिसाल सामने आई है। शुक्रवार (3 जुलाई) को कानपुर पुलिस ने एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया, जो कथित तौर पर देश के दो दर्जन से ज्यादा राज्यों में फर्जी डिग्री, मार्कशीट और माइग्रेशन सर्टिफिकेट बनाकर बेच रहा था।
स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) और फीलखाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया। उनके पास से 59 फर्जी दस्तावेज, 4.53 लाख रुपये नकद और कई डिजिटल सबूत बरामद हुए। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने इस ऑपरेशन को 'शिक्षा क्षेत्र में बड़े फ्रॉड' की श्रेणी में बताया।

क्या है पूरा मामला? कैसे चला रैकेट
पुलिस को खुफिया जानकारी मिली थी कि एक संगठित नेटवर्क फर्जी यूनिवर्सिटी दस्तावेज तैयार करके बेच रहा है। इस नेटवर्क के मुख्य मास्टरमाइंड उन्नाव के अखिलेश शुक्ला और उसके भाई निखिलेश शुक्ला बताए जा रहे हैं। दोनों अभी फरार हैं।
गिरफ्तार आरोपी:
- अमित कुमार सक्सेना (35)
- गोपाल गुप्ता (38)
पूछताछ में दोनों ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि वे लगभग 10 साल से इस धंधे में सक्रिय थे। गिरोह का देशभर में करीब 500 एजेंटों का नेटवर्क था और 500 से ज्यादा क्लाइंट थे, जिन्हें फर्जी मार्कशीट, प्रोविजनल सर्टिफिकेट, डिग्री और माइग्रेशन सर्टिफिकेट मुहैया कराए जाते थे।
बरामदगी और सबूत
- 59 फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज (विभिन्न यूनिवर्सिटीज के)
- 4 एंड्रॉयड फोन
- 4.53 लाख रुपये नकद
- बैंक खातों में 60 करोड़ रुपये के लेन-देन के संकेत
पुलिस अब इन बैंक खातों, ट्रांजेक्शन और पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है।
मास्टरमाइंड का पिछला रिकॉर्ड
अखिलेश शुक्ला पर पहले भी केस दर्ज था। दिसंबर में लखनऊ की गोमती नगर पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था, लेकिन अप्रैल में जमानत मिलने के बाद वह कथित तौर पर फिर से इस रैकेट को चला रहा था। पुलिस का मानना है कि भाई निखिलेश भी इस पूरे ऑपरेशन में सक्रिय भूमिका निभा रहा था।
गिरोह कैसे काम करता था?
डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (ईस्ट) सत्यजीत गुप्ता के अनुसार, यह गिरोह नई खुली यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों का फायदा उठाता था। वे फर्जी या हेरफेर किए गए रिकॉर्ड तैयार करते थे। उम्मीदवारों को नौकरी, प्रमोशन या विदेश जाने के लिए ये दस्तावेज दिए जाते थे।
कौन होते थे टारगेट?
- सरकारी नौकरी चाहने वाले
- प्राइवेट जॉब में प्रमोशन चाहने वाले
- विदेश जाने वाले स्टूडेंट्स
- पहले फेल हो चुके उम्मीदवार
शिक्षा क्षेत्र में फर्जीवाड़े का बड़ा खतरा
यह रैकेट सिर्फ कानपुर या उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था। इसका नेटवर्क पूरे देश में फैला हुआ था। फर्जी डिग्री वाले लोग सरकारी नौकरियों, टीचिंग, इंजीनियरिंग और मेडिकल फील्ड में भी घुस सकते हैं, जो पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है।
- सरकार और यूनिवर्सिटीज के लिए चुनौती
- फर्जी दस्तावेजों की आसानी से उपलब्धता
- ऑनलाइन पोर्टल्स का दुरुपयोग
- एजेंट नेटवर्क का विस्तार
पुलिस अब अन्य राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय करके पूरे नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश कर रही है। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने कहा कि SIT की टीम लगातार काम कर रही है। FIR दर्ज कर ली गई है और फरार आरोपियों की तलाश जारी है।
(इनपुट-PTI)













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