Russia Petrol Crisis: सबको तेल बेचने वाला रूस भारत से क्यों खरीद रहा पेट्रोल? क्या भारत में भी होगी कमी?

Russia Petrol Crisis: रूस दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस उत्पादक देशों में गिना जाता है। लेकिन अब हालात ऐसे बन गए हैं कि उसे भारत से पेट्रोल मंगाने की नौबत आ गई है। इसकी सबसे बड़ी वजह यूक्रेन द्वारा पिछले कुछ महीनों से रूसी तेल रिफाइनरियों, डिपो और टर्मिनलों पर किए जा रहे लगातार ड्रोन हमले हैं। इन हमलों ने रूस की घरेलू ईंधन आपूर्ति को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। नतीजा यह है कि देश के कई हिस्सों में पेट्रोल की भारी कमी हो गई है, पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग रही हैं और ईंधन की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई हैं। कुछ इलाकों में तो सरकार को पेट्रोल की राशनिंग तक करनी पड़ी है। समझेंगे पूरे मामले को डिटेल में।

भारत से रूस पहुंचा 60 हजार मीट्रिक टन पेट्रोल

इस संकट के बीच उद्योग जगत के सूत्रों के मुताबिक भारत से करीब 60,000 मीट्रिक टन पेट्रोल रूस भेजा गया है। बताया जा रहा है कि यह खेप दो बड़े तेल टैंकरों के जरिए भेजी गई, जिनमें प्रत्येक में 30,000 से 40,000 टन तक ईंधन लोड था। यह पेट्रोल गुजरात स्थित नायारा एनर्जी (Nayara Energy) की रिफाइनरी में तैयार किया गया था। हालांकि नायारा एनर्जी ने इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।

Russia Petrol Crisis

पेट्रोल इम्पोर्ट पर रूस ने क्या दी सफाई

रूस के राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने भी पुष्टि की है कि सरकार घरेलू बाजार को स्थिर रखने और घबराहट में हो रही खरीदारी रोकने के लिए दूसरे देशों से ईंधन आयात की संभावनाओं पर काम कर रही है। रूस की संसद ने हाल ही में टैक्स कानून में बदलाव को मंजूरी दी है ताकि आयातित पेट्रोल की लागत कम हो सके। नई व्यवस्था के तहत ईंधन सब्सिडी को भारतीय डिलीवरी लागत और अंतरराष्ट्रीय कीमतों से जोड़ दिया गया है।

गर्मियों के दौरान रूस में रोजाना करीब 1,10,000 टन पेट्रोल की मांग रहती है। इसी मांग को पूरा करने के लिए मास्को अब हर महीने लगभग 4 लाख टन पेट्रोल आयात करने की तैयारी कर रहा है। रूस का सहयोगी बेलारूस भी जून महीने में अपनी रेल ईंधन आपूर्ति तीन गुना बढ़ा चुका है।

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यूक्रेन के 50 से ज्यादा ड्रोन हमलों ने कैसे बिगाड़ा खेल

एसोसिएटेड प्रेस और अन्य रिपोर्टों के मुताबिक, मार्च से अब तक यूक्रेन ने रूस के तेल ढांचे पर 50 से ज्यादा ड्रोन हमले किए हैं। इनमें तेल रिफाइनरियां, डिपो, स्टोरेज और टर्मिनल शामिल हैं। काला सागर के किनारे स्थित रणनीतिक टुआप्स रिफाइनरी पर अकेले चार बार हमला किया गया। मतलब साफ है कि यूक्रेन को ईरान युद्ध से समझ आ गया था हमला कहां करना है ताकि रूस को तगड़ी चोट पहुंचे।

इन हमलों का सीधा असर रूस की रिफाइनिंग क्षमता पर पड़ा है। रूस का रोजाना होने वाले पेट्रोल उत्पादन लगभग 17 प्रतिशत घटकर 8.5 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया है। यूक्रेन का कहना है कि इन हमलों का मकसद रूस की सेना तक पहुंचने वाली ईंधन सप्लाई चेन को कमजोर करना है। जून में यूक्रेन ने मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग के बाहरी इलाकों में स्थित महत्वपूर्ण तेल टर्मिनलों को भी निशाना बनाया था। हालांकि इन हमलों का असर रूस में ही देखने को मिलेगा, भारत पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। क्योंकि अब होर्मुज भी खुल गया है और भारत अब वेनेजुएला से भी तेल खरीद रहा है।

पुतिन ने लोगों से क्या कहा?

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने स्वीकार किया है कि कुछ इलाकों में लोगों और कारोबारियों को ईंधन की कमी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि उन्होंने दावा किया कि देश के तेल भंडार में केवल 4 प्रतिशत की कमी आई है और हालात काबू में हैं। रूस के उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने भी कहा कि सरकार तेल कंपनियों के साथ मिलकर खुदरा कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश कर रही है। उनके मुताबिक पेट्रोल पंपों पर अस्थायी कमी की वजह हमलों के कारण सप्लाई चेन में आई रुकावट है।

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क्या है नायारा एनर्जी का रूस कनेक्शन?

गुजरात के वाडिनार में स्थित नायारा एनर्जी भारत की दूसरी सबसे बड़ी निजी रिफाइनरी कंपनी है। इसकी प्रतिदिन करीब 4 लाख बैरल कच्चे तेल को रिफाइन करने की क्षमता है। साल 2015 में इस रिफाइनरी को एस्सार ग्रुप से खरीदा गया था। कंपनी में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी रूस की सरकारी तेल कंपनी रोसनेफ्ट (Rosneft) की है, जबकि लगभग 49 प्रतिशत हिस्सेदारी यूनाइटेड कैपिटल पार्टनर्स के पास है। यानी कंपनी में रूसी निवेश का प्रभाव काफी मजबूत है। प्रतिबंधों के बावजूद नायारा को रियायती दरों पर रूसी कच्चा तेल मिलता रहा है, जिससे उसकी रिफाइनिंग क्षमता मजबूत बनी हुई है। इसीलिए नायरा से रूस को तेल भेजा जा रहा है।

फिलहाल तेल बेचने वाला रूस अगर तेल खरीद रहा है तो इस संकट को मामूली तो नहीं कहा जा सकता। देखना होगा कि संकट कितने दिन चलता है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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