जानिए उज्जैन के सिंहस्थ कुंभ या सिंहस्थ 2016 के बारे में खास बातें
बैंगलोर। पूरा देश इस उज्जैन सिंहस्थ मेले की तैयारी में जुटा है। हर 12 साल बाद महाकाल की नगरी उज्जैन में होने वाले इस मेले के प्रति लोगों के दिलों में खासी श्रद्धा है।
क्या है हरिद्वार और प्रयाग में होने वाले अर्धकुंभ का रहस्य?

क्या है इतिहास
उज्जैन का सिंहस्थ मानक स्नान पर्व के रूप में मनाया जाता है। 12 सालों के बाद जब बृहस्पति सिंह राशि में प्रवेश करता है तब इस पर्व का आयोजन होता है। इस दौरान लोग शिप्रा नदी में स्नान करते हैं।
जानिए उज्जैन के सिंहस्थ कुंभ के बारे में खास बातें
क्या है कथा?
मान्यता है कि देवों और दानवों सहयोग से सम्पन्न समुद्र मंथन से अन्य वस्तुओं के अलावा अमृत से भरा हुआ एक कुंभ (घडा) भी निकला था। जिसके कारण देवताओं और दानवों में युद्द छिड़ गया। इसी दौरान इंद्र के कहने पर उनका पुत्र जयन्त जब अमृत कुंभ लेकर भागने लगा जिसके पीछे दानव पड़ गये।
अमृत-कुंभ के लिए स्वर्ग में 12 दिन तक संघर्ष चलता रहा
अमृत के लिए स्वर्ग में 12 दिन तक संघर्ष चलता रहा और उस कुंभ से चार स्थानों पर अमृत की कुछ बूंदें गिर गईं। यह स्थान पृथ्वी पर हरिद्वार, प्रयाग, उज्जैन और नासिक थे। इसलिए उज्जैन में यह मानक पर्व का आयोजन होता है पूरे 12 साल बाद।
सिहस्थ के नाम से मशहूर
सिंहस्थ उज्जैन में मेष राशि में सूर्य और सिंह राशि में गुरू के आने पर यहां महाकुंभ मेले का आयोजन होता है जिसे सिहस्थ के नाम से देशभर में पुकारा जाता है। आस्था के इस पर्व के बारे में लोग कहते हैं कि शिप्रा की डुबकी से सारे पापों का नाश हो जाता है।












Click it and Unblock the Notifications