Akshaya Tritiya 2021: इस अक्षय तृतीया अपने आसपास लगाएं ऑक्सीजन देने वाले पौधे
नई दिल्ली, 11 मई। इन दिनों दुनिया के अधिकांश देशों में कोरोना महामारी का संकट छाया हुआ है। यह दिनोंदिन गहराता जा रहा है और भारत में तो फिलहाल ये भयावह रूप में नजर आ रहा है। भारत में तो चारों ओर ऑक्सीजन के लिए मारामारी मची हुई है। देश के तमाम ऑक्सीजन बनाने वाले प्लांट पूरी क्षमता से चल रहे हैं लेकिन मनुष्य का ध्यान प्राकृतिक प्लांट अर्थात् पेड़-पौधों की तरफ बिलकुल नहीं है। यदि मनुष्य प्रकृति को सहेजे और पेड़-पौधे लगाए तो उसे कभी कृत्रिम ऑक्सीजन की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी।

इसीलिए हिंदू धर्म में प्रकृति को देवता मानते हुए पेड़-पौधों को पूजने की परंपरा है। यही कारण है कि नौ ग्रहों और 27 नक्षत्र को एक-एक वृक्ष से जोड़ा गया है। शास्त्रों में यह भी बताया गया है कि इन पेड़-पौधों को किसी विशेष ग्रह-नक्षत्रों के योग-संयोग से बनने वाले दिनों में लगाने का अलग महत्व होता है। ऐसा ही एक स्वयंसिद्ध दिन है अक्षय तृतीया का। इस दिन जो भी पुण्य कार्य किया जाता है उसका अनंत गुना पुण्य फल प्राप्त होता है। इस दिन पेड़ पौधे लगाने का भी विशेष महत्व होता है। इससे न केवल मनुष्य के ग्रहों की शांति होती है बल्कि वह प्रकृति की सेवा का भागीदार भी बनता है।
आइए जानते हैं इस अक्षय तृतीया पर 14 मई 2021 को कुछ ऐसे पेड़-पौधे लगाएं जो कोरोना महामारी के दौर में पर्यावरण को ऑक्सीजन से भरपूर करेंगे।
पीपल : हिंदू धर्म में पीपल का पेड़ अत्यंत पूजनीय होता है। अनेक व्रत-पर्वों में महिलाएं इस वृक्ष की पूजा करके इसके आसपास कच्चा सूत लपेटकर सुख-सौभाग्य की कामना करती हैं। इस अक्षय तृतीया पर पीपल का पेड़ लगाएं। पीपल एकमात्र ऐसा पेड़ है जो 24 घंटे ऑक्सीजन देता है और अपने आसपास के पर्यावरण की सारी कार्बनडाइ आक्साइड सोखकर पर्यावरण को शुद्ध बनाता है। यह पेड़ लगाने के बाद नित्य सुबह इसमें जल अर्पित करें। शाम के समय इस वृक्ष के नीचे दीपक प्रज्वलित करें।
वट वृक्ष : यह वृक्ष भी अत्यंत पूजनीय है। इसे वट, बरगद या बड़ का पेड़ कहा जाता है। इसकी जटाओं को साक्षात भगवान शिव की जटाएं मानकर पूजा जाता है। इस वृक्ष के नीचे बैठकर अपार शांति की प्राप्ति होती है। अक्षय तृतीया के दिन वट वृक्ष लगाने से मनुष्य का वंश कभी समाप्त नहीं होता।
नीम वृक्ष : नीम के वृक्ष का महत्व आयुर्वेद में सर्वाधिक है। इसे औषधीय पौधों का राजा भी कहा जाता है। नीम का पेड़ जिस जगह होता है उसके आसपास के बड़े दायरे से यह सूक्ष्म परजीवी, संक्रमण फैलाने वाले कीटों आदि को दूर रखता है। इसलिए इस वृक्ष को पूजनीय और सर्वदा ग्राह्य कहा गया है। नीम का वृक्ष अक्षय तृतीया पर लगाने से आयु और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
शमी का पौधा: अक्षय तृतीया के दिन शमी के पौधे का रोपण करना अत्यंत शुभ माना गया है। शमी के पौधे से शनि ग्रह से जुड़े समस्त दोष दूर हो जाते हैं। यदि जन्म कुंडली में पितृदोष या कालसर्प दोष बना हुआ है तो शमी का पौधा लगाने से ये दोष तुरंत दूर हो जाते हैं। जिन लोगों को शनि की साढ़ेसाती या शनि की ढैया चल रही हो वे भी शमी का पौधा अवश्य लगाएं।
तुलसी का पौधा: तुलसी का पौधा अधिकांश हिंदू घरों में होता ही है। यदि नहीं है तो अक्षय तृतीया का दिन तुलसी लगाने के लिए सबसे उत्तम दिन है। इस दिन तुलसी का पौधा लगाने से भगवान विष्णु तथा मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। तुलसी के पौधे से अक्षय संपदा की प्राप्ति होती है। साथ ही नवग्रहों की पीड़ा दूर होती है। तुलसी का पौधा लगाने के बाद नियमित जल से इसका सिंचन करें और शाम के समय इसके समीप दीपक जरूर लगाएं।
बेल पत्र का पौधा: बेल पत्र भगवान शिव का प्रिय वृक्ष है। अक्षय तृतीया के दिन इसके पौधे का रोपण करके नियमित इसका सिंचन करने से शिव प्रसन्न् होते हैं। जिस घर में बेल पत्र के पौधे की सेवा की जाती है वहां कभी किसी को बीमारियां नहीं होती। मृत्यु का भय टल जाता है। जहरीले जीव-जंतु उस घर से दूर रहते हैं। शिव की कृपा से घर में किसी चीज की कमी नहीं होती।
ये भी लगा सकते हैं: यदि उपरोक्त में से कोई भी पौधा आपको उपलब्ध न हो पाए तो कोई बात नहीं आपके पास जो भी उपलब्ध पौधा हो वह लगाएं। प्रत्येक प्रकार के फल-फूल वाले पौधे लगाने से पुण्य प्राप्त किया जा सकता है। केवल अपने आसपास के परिवेश में जहरीले और कंटीले पेड़ पौधे न लगाएं।












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