विनायक चतुर्थी 2021: 16 अप्रैल को चैत्र मास की विनायक चतुर्थी, जानें शुभ तिथि और महत्व
नई दिल्ली, 16 अप्रैल: चैत्र मास की विनायक चतुर्थी 16 अप्रैल यानी कल मनाई जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार हर महीने में दो चतुर्थी आती हैं, अमावस्या के बाद आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। यह दिन भगवान गणेश की पूजा का दिन होता है। मान्यता है कि विनायक चतुर्थी पर व्रत रखने से सभी संकटों से छुटकारा मिल जाता है। जो भी भक्त इन दिन विध्नहर्ता की विनायक चतुर्थी का व्रत रखते हैं गणेश जी उसे धैर्य के साथ ज्ञान का आशीर्वाद देते हैं।
विनायक चतुर्थी 2021 शुभ मुहूर्त
शुभ तिथि 15 अप्रैल को दोपहर 3 बजकर 27 मिनट से शुरू होकर 16 अप्रैल को शाम 6:05 बजे तक शुभ तिथि समाप्त होगी ।आइए जानते है विनायक चतुर्थी की पूजा विधि और इसका महत्व।

विनायक चतुर्थी पूजा की विधि
पूज की विधि पर गौर करें तो सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। फिर कोशिश रहे कि पीले या लाल रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए और उपवास की पालन करते हुए भगवान गणेश जी की पूजा अर्चना करें। पूजा के दौरान 'ॐ सिद्ध बुद्धि सहित महागणपति आपको नमस्कार है' करते हुए पूजा शुरू करनी चाहिए। इस दौरान अपने सामार्थ्य अनुसार फूल, फल, मिठाई, दूध और लड्डू का भोग लगाना चाहिए। फिर शाम को व्रत करने वाले भक्तों को चतुर्थी व्रत कथा सुननी चाहिए। फिर चंद्रोदय होने पर गणेश का पूजन करें। फिर चांद को अर्ध्य देकर अपना व्रत खोलना चाहिए।

विनायक चतुर्थी पर करें इन मंत्रों का जाप
- 'ओम एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्ति प्रचोदयात्'
- 'गजाननम् भूत गणादि सेवितम्, कपित् य जम्भु फलसरा भिक्षितम्, उमसुतम् शोका विनशा करणम्, नमामि विघ्नहेश्वर पद पंकजम्'
- 'वक्रतुण्ड महाकाय, सूर्य कोटि समप्रभ:, निर्विघ्नम् कुरुमदेव सर्व कार्येषु सर्वदा'
- ॐ ग्लौम गौरी पुत्र, वक्रतुंड, गणपति गुरू गणेश। ग्लौम गणपति, ऋदि्ध पति, सिदि्ध पति। मेरे कर दूर क्लेश।
- ॐ नमो गणपतये कुबेर येकद्रिको फट् स्वाहा।
- ॐ वक्रतुंडाय हुम्
- ॐ हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा।

विनायक चतुर्थी का महत्व
हिंदू धार्मिक मान्यता के अनुरूप भगवान गणेश विद्या, बुद्धि, समृद्धि के दाता है। वो अपने भक्तों को कभी निराश नहीं करते हुए उनकी बाधाओं को मिटाते हैं। सभी गृहस्थ लोगों को अपनी जीवन में कम से कम एक बार इस उपवार को आवश्यक रखना चाहिए। भगवान गणेश की कृपा से ज्ञान विवेक की प्राप्ति होती है। वहीं इस व्रत को करने से उच्च कोटि की संतान भी प्राप्ति होती है।












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