शहरों में प्रदूषण रोकने के लिए योगी सरकार लागू करने जा रही नई व्यवस्था
लखनऊ। यूपी सरकार शहरों में गीले और सूखे कूड़े से फैल रहे प्रदूषण को रोकने के लिए नई व्यवस्था लागू करने जा रही है। इसके लिए बड़े प्रतिष्ठानों को निकायों से लाइसेंस लेकर अपने यहां अपशिष्ट प्रसंस्करण सुविधा केंद्र स्थापित करना होगा। नगर विकास विभाग इस संबंध में जल्द ही कैबिनेट से प्रस्ताव मंजूर कराने जा रहा है। शहरों में कूड़ा निस्तारण की सबसे बड़ी समस्या है। निकायों को इस पर करोड़ों रुपये बजट खर्च करने पड़ते हैं इसके बाद भी इस समस्या का स्थाई समाधान नहीं हो पा रहा है। इसीलिए नगर विकास विभाग चाहता है कि बड़े प्रतिष्ठानों खासकर होटल, रेस्टोरेंट, मैरिज हॉल, व्यापार मेला, प्रीतिभोज स्थल, सामुदायिक हाल, क्लब, वधशाला, चिकन, मछली और मटन की दुकान, अस्पताल व अन्य स्वास्थ्य देखभाल संस्थाएं, औद्योगिक क्षेत्र, निजी उद्यान, सार्वजनिक पार्क, दुग्धशालाएं व पशुशालाओं में वहीं पर ही कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था कराई जाए, जिससे कूड़ा इधर-उधर न बिखरे।

नगर विकास विभाग का मानना है कि बड़े प्रतिष्ठानों में जैसे पार्किंग के लिए जमीन आरक्षित की जाती है, उसी तरह कूड़ा निस्तारण के लिए जमीन आरक्षित करते हुए इसके निस्तारण की व्यवस्था की जाए। इसके लिए मानक तय किया जा रहा है कि कितना कूड़ा निकलने पर किसी क्या व्यवस्था करनी होगी। छोटे-मोटे संस्थानों या प्रतिष्ठानों को इससे मुक्त रखा जाएगा, जिससे किसी को कोई परेशानी न होने पाए। नगर विकास विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था के बाद शहरों में कूड़ा निस्तारण को लेकर होने वाली समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
होटल, रेस्टोरेंट व भोजनालय जहां 100 किलो रोजाना निकलता है वे दायरे में आएंगे। मैरिज हाल, मैरिज हाल, व्यापार मेला, सामुदायिक हाल या क्लब 100 किलो कूड़ा निकलने पर दायरे में आएंगे। बधशालाएं, चिकन, मछली और मटन बेचने वाली वो दुकानें जहां रोजाना 50 किलो कूड़ा निकलेगा। बीस बेड के अस्पताल जहां रोजाना 100 किलो कूड़ा निकलेगा। औद्योगिक क्षेत्र 50 किलो, सार्वजनिक पार्क 50 किलो कूड़ा निकलने पर दायरे में आएंगे।












Click it and Unblock the Notifications