सीएम योगी आदित्यनाथ के विशेष वरासत अभियान को मिला जबर्दस्त समर्थन

लखनऊ। राज्य में भूमि विवादों को पूरी तरह खत्म करने को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर चलाए जा रहे "विशेष वरासत अभियान" के तहत अब तक 6.21 लाख से अधिक प्रकरणों का निस्तारण किया गया है। यह अभियान बीते 15 दिसंबर से चलाया जा रहा। उक्त अभियान के तहत लंबित वरासत के प्रकरणों को निस्तारित करने के लिए करीब 23 हजार लेखपाल और 2700 राजस्व निरीक्षण गांव-गांव जा रहें हैं। पहली बार राज्य में इस तरह का अभियान चलाया जा रहा है।

Vishesh Varasat Abhiyan getting support in rural areas

राज्य के राजस्व सचिव संजय गोयल के अनुसार, गत 15 दिसंबर से "आपकी जमीन, आपका अधिकार, सबको मिले अपना उत्तराधिकार" के संकल्प से शुरु हुए इस अभियान के तहत 8 फरवरी तक वरासत से संबंधित 6,66,535 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 6,21,484 प्रकरणों का निस्तारण कर दिया गया है। ग्रामीणों से प्राप्त शेष बचे आवेदनों को निस्तारित करने की प्रक्रिया चल रही है। वरासत संबंधी 9538 मामलों की राजस्व कोर्ट सुनवाई हो रही हैं। इन सभी प्रकरणों को शीघ्र निस्तारित कराने के लिए निर्देश दिए गए हैं।

राजस्व सचिव संजय गोयल के मुताबिक, राज्य में वरासत संबंधी विवादों को पूरी तरह से खत्म करने के लिए पांच चरणों में चलाए जाने जा रहे विशेष वरासत अभियान के तहत गांवों में राजस्व विभाग के लेखपाल तथा अन्य अधिकारी ग्रामीणों से वरासत संबंधी प्रकरणों की जानकारी लेकर उसका निस्तारण कर रहें हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की शुरुआत करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया था कि उक्त अभियान को बेहद गंभीरता से चलाया जाए और इस अभियान के खत्म होने तक वरासत संबंधी सभी लंबित प्रकरण समाप्त हो जाने चाहिए। वास्तव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विशेष वरासत अभियान को लेकर बेहद गंभीर हैं। उनकी मंशा साफ है कि राज्य में वरासत से संबंधित सभी लंबित प्रकरणों का निस्तारण कर दिया जाए, क्योंकि इन प्रकरणों के लंबित रहने से भूमि के विवाद होते हैं। जिसका संज्ञान लेते हुए ही मुख्यमंत्री ने विशेष वरासत अभियान शुरू करने की योजना तैयार करायी थी। जिसके तहत मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी मंडलायुक्तों एवं जिलाधिकारियों को विशेष वरासत अभियान में प्राप्त आवेदनों का शत-प्रतिशत ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने के निर्देश दिए थे।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था कि राजस्व ग्राम समिति की बैठक के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि इस अभियान में अधिकतम सहभागिता सुनिश्चित की जा सके। मुख्यमंत्री के इस निर्देश पर राजस्व विभाग के लेखपाल और राजस्व निरीक्षक 15 दिसंबर से लगातार गांव- गांव जाकर वरासत संबंधी लंबित प्रकरणों के आवेदन ग्रामीणों से लेकर गए उनका निस्तारण करने में जुटे हैं। राजस्व सचिव संजय गोयल के अनुसार, प्रयागराज, आजमगढ़, हरदोई, जौनपुर और गाजीपुर में 15-15 हजार से अधिक वरासत संबंधी प्रकरण निस्तारित किए गए हैं। इसी प्रकार अंबेडकरनगर, अयोध्या, सुल्तानपुर, बलिया, गोरखपुर, गोंडा, कौशांबी, प्रतापगढ़, उन्नाव, खीरी और सीतापुर में 10-10 हजार से अधिक वरासत संबंधी प्रकरणों का निस्तारण किया गया है।

राजस्व सचिव के अनुसार, राज्य के सभी गांवों में लोग वरासत के प्रकरणों को निस्तारित कराने में रूचि लें, इसके लिए राजस्व विभाग के अधिकारी विशेष वरासत अभियान के प्रचार प्रचार भी कर रहे हैं। चंद दिनों में ही इतनी बड़ी संख्या में वरासत संबंधी मामलों का निस्तारण किए जाने से अब राज्य के गांव-गांव में विशेष वरासत अभियान में रूचि लेते हुए लोग निर्विवाद उत्तराधिकारों को खतौनियों में दर्ज कराने के लिए बढ़चढ़ कर आवेदन कर रहें हैं। इसे देखते हुए यह दावा किया जा रहा है कि आवेदन करने वालों की संख्या में इजाफा होगा और आगामी 15 फरवरी के बाद राज्य में वरासत से संबंधित एक भी विवाद शेष नहीं रहेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी यही चाहते हैं कि झगड़े की वजह बनने वाले वरासत से सभी प्रकरण खत्म हों। मुख्यमंत्री की इस मंशा को पूरा करने ले लिए अब वरासत संबंधी जिन प्रकरणों को निस्तारित किया जा चुका है, उसकी भी मौके पर जाकर राजस्व विभाग के अफसर चेक कर रहें हैं, ताकि 15 फरवरी तक राज्य में वरासत संबंधी सभी प्रकरणों को निस्तारित करने के टार्गेट को पूरा किया जा सके।

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