पुराने वाहन चला रहे मालिकों को दिल्ली सरकार ने जारी किया नोटिस, स्क्रैप करवाने की दी सलाह

नई दिल्ली, 31 अगस्त। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में व्हीकल स्क्रैपेज पॉलिसी को लागू करने के लिए दिल्ली सरकार ने उन सभी वाहन मालिकों को नोटिस जारी किया है जो अभी भी शहर में अपने पुराने वाहन चला रहे हैं। दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग ने लोगों को अपने 15 साल पुराने पेट्रोल और 10 साल पुराने डीजल वाहनों को सड़क से दूर रखने की नसीहत दी है। राज्य सरकार ने ऐसे वाहनों को अधिकृत केंद्रों पर स्क्रैप करवाने की भी सलाह दी है।

vehicle scrappage policy Delhi government issued notice to owners driving old vehicles

दिल्ली के परिवहन विभाग ने एक नोटिस जारी किया, जिसके अनुसार, "10 साल से अधिक पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों के मालिकों को सलाह दी जाती है कि वे इन वाहनों को दिल्ली/एनसीआर में सड़कों पर न चलाएं। आगे कहा गया कि, परिवहन विभाग के अधिकृत स्क्रैपर्स के माध्यम से ऐसे वाहनों को स्क्रैप किया जाए"।

सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए इस नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, मानकों को पूरा न करने वाले ऐसे पुराने डीजल और पेट्रोल वाहनों को जब्त भी किया जा सकता है। इतना ही नहीं, यदि आपका पेट्रोल वाहन 15 साल और डीजल वाहन 10 साल से ज्यादा पुराना है और आपके पास सभी प्रकार के वाहनों के पंजीकरण प्रमाण पत्र मौजूद हैं, इसके बावजूद भी इन्हें सड़क पर चलाने की अनुमति नहीं है। हालांकि यह भी कहा गया है कि, ऐसे वाहनों को संबंधित अधिकारियों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करने के बाद अन्य राज्यों में पंजीकृत किया जा सकता है।

जानकारी के अनुसार, अकेले दिल्ली में दोपहिया सहित लगभग 37 लाख ऐसे वाहन हैं, जिन्हें एंड-ऑफ-लाइफ वाहन या अनफिट वाहन माना जाता है, लेकिन अभी भी उपयोग किए जा रहे हैं। मौजूदा समय में दिल्ली राज्य में 1 करोड़ से अधिक वाहन पंजीकृत हैं। दिल्ली अक्सर गंभीर प्रदूषण के मुद्दों से जूझती है और सरकार ने इसके पीछे प्रमुख कारणों में से एक प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों को जिम्मेदार ठहराया है। आपको याद दिला दें कि, दिल्ली देश का पहला राज्य था जिसने वाहनों के प्रदूषण को कम करने के लिए साल 2016 में सम-विषम (ऑड-ईवन) नीति को लागू किया था।

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इस महीने की शुरुआत में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय ऑटोमोबाइल स्क्रैपेज नीति का शुभारंभ किया। केंद्र ने 20 साल बाद निजी वाहनों और 15 साल बाद व्यावसायिक वाहनों के लिए फिटनेस टेस्ट के निर्देश दिए हैं। इसने फिटनेस टेस्ट पास करने पर पुराने वाहनों को चलाने की भी अनुमति दी। नीति का उद्देश्य भारत में रजिस्टर्ड व्हीकल स्क्रैपिंग फेसिलिटीज (RSVF) और ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) के रूप में स्क्रैपिंग बुनियादी ढांचे का निर्माण करना है।

वहीं सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) का कहना है कि देश भर में लगभग एक करोड़ ऐसे अनफिट वाहन हैं, जिन्हें तत्काल रिसाइकिल करने की जरूरत है। हैवी कमर्शियल व्हीकल्स के लिए अनिवार्य फिटनेस टेस्ट आगामी 1 अप्रैल, 2023 से लागू होगा, और यह 1 जून, 2024 से अन्य सभी कैटेगरी के वाहनों के लिए चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

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