उत्तराखंड: पर्वतीय जिलों में लैंड बैंक बनाने के लिए जमीनों की तलाश तेज
देहरादून, 02 अगस्त: प्रदेश सरकार अब उद्योगों को पहाड़ चढ़ाने की तैयारी में जुट गई है। इस कड़ी में पर्वतीय जिलों में लैंड बैंक बनाने के लिए जमीनों की तलाश की जा रही है। सरकार ने जिलाधिकारियों के साथ ही विभागीय अधिकारियों को हर जिले में ऐसी जगहों की चिह्नित कर इसकी रिपोर्ट तलब की है। मकसद यह कि पर्वतीय क्षेत्रों में उद्योगों की स्थापना के साथ ही स्थानीय निवासियों को रोजगार मिल सके।

राज्य की आर्थिकी में औद्योगिक क्षेत्र का बड़ा योगदान है। प्रदेश के उद्योगों की स्थिति पर नजर डालें तो तो यहां 3222 मध्यम उद्योग, 543 बड़े उद्योग और 68 हजार से अधिक सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योग स्थापित हैं। प्रदेश में देहरादून के सेलाकुई, पौड़ी गढ़वाल के कोटद्वार, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर के पंतनगर, सितारगंज, नैनीताल के काशीपुर और नई टिहरी में औद्योगिक क्षेत्र स्थापित हैं। नई टिहरी को छोड़ शेष सभी मैदानी क्षेत्र हैं। प्रदेश में तेजी से हो रहे पलायन को देखते हुए सरकार ने पर्वतीय क्षेत्रों में उद्योग लगाने की बात कही थी। इसके लिए बाकायदा लैंड बैंक बनाने की बात तो हुई, मगर इस ओर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। दरअसल, पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां एक स्थान पर विस्तृत जमीन मिलने में दिक्कतें आती हैं, जहां जमीनें हैं वहां वन भूमि का पेच सामने आ जाता है।
इसे देखते हुए सरकार ने बसावट के आसपास ऐसी जगहों को तलाश करने की बात कही, मगर इसमें सफलता नहीं मिल पाई है। पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय उत्पादों के लिए ये उद्योग काफी अहम साबित हो सकते हैं। दरअसल, पर्वतीय क्षेत्रों में औद्यानिकी, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, जैविक उत्पाद, वेलनेस, सगंध एवं औषधीय पौध आधारित उद्योग, जैव प्रौद्योगिकी व हस्तशिल्प के क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं। इसे देखते हुए प्रदेश सरकार ने एक बार फिर इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं। सरकार ने सभी जिलाधिकारियों व विभागीय अधिकारियों से उद्योग स्थापित करने के लैंड बैंक चिह्नित करने को कहा है। इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि जमीनों को लेकर किसी भी तरह की कोई अड़चन है तो उससे शासन को अवगत कराया जाए। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि इस संबंध में सभी जिलों व विभागीय अधिकारियों से रिपोर्ट मंगाई गई हैं। जल्द इस पर बैठक कर इस दिशा में कदम उठाए जाएंगे।












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