ब्रेक लगते ही ट्रेन में बनने लगेगी बिजली, जानिए कानपुर मेट्रो में किस खास तकनीक का होगा इस्तेमाल
कानपुर, जून 05: प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बाद कानपुर जिले में भी मेट्रो का निर्माण तेज गति से हो रहा है। साथ ही, इस मेट्रो ट्रेन में ब्रेक लगाते ही बिजली का उत्पादन भी होगा। जी हां...यह सच है। इससे पहले लखनऊ मेट्रो में इस तकनीक का इस्तेमाल हो चुका है और आने वाले समय में कानपुर के अलावा आगरा में भी इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कारपोरेशन (यूपीएमआरसी) एक खास तरह की तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। आइए जानते है क्या है वो तकनीक...

इस तकनीक को कहा जाता है रीजनरेटिव ब्रेकिंग
दरअसल, कानपुर मेट्रो ट्रेन में ब्रेक लगते ही बिजली का बनना शुरू हो जाएगा और इससे कुल बिजली की खपत का 45 फीसद रीजेनरेट किया जाएगा। उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कारपोरेशन (यूपीएमआरसी) मेट्रो और लिफ्ट के रुकने से पैदा हुई ऊर्जा का इस्तेमाल अपने कार्यों के लिए करेगा। जिस तकनीक के जरिए यह बिजली उत्पन होगी, उस तकनीक को रीजनरेटिव ब्रेकिंग कहा जाता है।
कैसे काम करती है यह सिस्टम
ट्रेन में ब्रेक लगाने के दौरान बहुत सारी ऊर्जा निकलती है जो गर्मी के रूप में यूं ही बेकार हो जाती है। इस ऊर्जा को ही रीजनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम से संरक्षित किया जाता है। इसके तहत डीसी ट्रैक्शन मोटर ब्रेक लगने पर जेनरेटर की तरह काम करने लगता है। यह सिस्टम 15 से 100 किलोमीटर की रफ्तार से दौड़ रही ट्रेन में काम करता है। इंजन की गति के मुताबिक, हर बार ब्रेक लगने पर 30 से 50 किलोवाट तक ऊर्जा का उत्पादन होता है। इस प्रणाली से यह ऊर्जा वापस थर्ड रेल में चली जाएगी।
थर्ड रेल के जरिए वापस जाएगी बिजली
लखनऊ में मेट्रो के ऊपर ओवरहेड लाइन है लेकिन कानपुर में पटरियों के ठीक बगल में एक थर्ड रेल चलेगी। जिससे मेट्रो को करंट मिलेगा। इसी थर्ड रेल से मेट्रो को करंट मिलेगा भी और इससे ही मेट्रो अपने द्वारा उत्पन्न ऊर्जा को वापस भेज देगी। जिसका उपयोग दूसरी मेट्रो कर सकेंगी।
39 ट्रेन, 29 स्टेशनों पर लगाएंगी ब्रेक
कानपुर में दोनों कारीडोर में 29 स्टेशन होंगे और इन स्टेशनों पर 39 ट्रेनों का चलाया जाएगा। 29 ट्रेनें पहले कारीडोर में चलेंगी और 10 ट्रेनें दूसरे कारीडोर में। तो वहीं, 21 स्टेशन पहले कारीडोर में और आठ स्टेशन दूसरे कारीडोर में होंगे। कुल 32.4 किलोमीटर लंबा यह रास्ता होगा, जिसमें जहां भी ब्रेक लगेगा खुद बखुद ऊर्जा बिजली के रूप में बदल कर इलेक्ट्रिक लाइन में चली जाएगी। इन सभी ट्रेनों में रीजनरेटिव उपकरण लगाने के लिए पहले से कह दिया गया है।
कोच व लिफ्ट में लग रहे ऊर्जा को वापस ट्रांसफर करने वाले सिस्टम
इतना ही नहीं, मेट्रो कोच और स्टेशन पर लगी लिफ्ट के रुकते समय ऊर्जा उत्पन्न होती है। यह ऊर्जा वापस मेट्रो की इलेक्ट्रिक सप्लाई की लाइन में जा सके, इसके लिए मेट्रो के कोच में ही पहियों के पास से उपकरण लगाए जा रहे हैं। मेट्रो कोच अपनी यात्रा के दौरान जितनी बार भी रुकेगा तो ब्रेक लगने से उत्पन्न हुई ऊर्जा को पहिए के पास लगे उपकरण इसे वापस लाइन में भेज देंगे। पूरे ट्रैक पर बहुत सारी मेट्रो एक साथ चलती रहेंगी। इनके रुकने से पैदा ऊर्जा बिजली के रूप में वापस इलेक्ट्रिक लाइन में पहुंचेगी और इसका उपयोग दूसरी ट्रेनों के संचालन में होगा।












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