MP: कोरोना से अनाथ हुए 3 बच्चों का सरकार रखेगी ख्याल, विद्या, अहम और अर्थव की उठाएगी जिम्मेदारी

भोपाल, मई 31: कोरोना महामारी में अपने माता- पिता का साया खोने वाले अनाथ बच्चों की परवरिश से लेकर पढ़ाई का खर्चा शिवराज सरकार उठा रही है, जिसके तहत सरकार ने मुख्यमंत्री कोविड 19 बाल कल्याण योजना के तहत ऐसे बच्चों का चयन किया जा रहा है। इसके लिए रविवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पीड़ित बच्चों के परिजनों से रूबरू हुए। पांच मिनट के संवाद में सबसे पहले सीएम ने गीता चौरसिया और गोरेलाल त्रिपाठी से बात की।

Chief Minister Covid 19 Child Welfare Scheme

महिला एवं बाल विकास के कार्यक्रम अधिकारी सौरभ सिंह ने बताया कि 1 मार्च 2021 से 30 जून 2021 के बीच अनाथ हुए बच्चों का मुख्यमंत्री कोविड 19 बाल कल्याण योजना अंतर्गत चयन हो रहा है। ऐसे में सतना जिले में तीन हितग्राहियों का चयन हो चुका है, जबकि पांच मामलों की महिला एवं बाल विकास स्टडी कर रहा है।

सड़क हादसे से पिता और कोरोना से मां की मौत

गीता चौरसिया निवासी लालपुर ब्लॉक अमरपाटन से ​सीएम शिवराज सिंह चौहान ने बातचीत की। सीएम को गीता ने बताया कि हितग्राही विद्या चौरसिया की मैं बड़ी मां और मौसी हूं। उन्होंने बताया कि विद्या के पिता 5 मार्च 2016 को एक सड़क हादसे में जान गवां दिए थे, जबकि माता की मृत्यु 30 अप्रैल 2021 को कोरोना से हो गई थी। ऐसे में उसके पालने पोसने का जिम्मा मेरे पास आ गया है। क्योंकि मेरे बगल में ही विद्या चौरसिया का घर बना है। आंगनबाड़ी के माध्यम से योजना का पता चला तो अधिकारियों ने बयान लेने के बात मैंने स​​हमति दी है।

पिता की कोरोना से मौत, मां गम में की खुदकुशी

सतना शहर के मारूती नगर में रहने वाले गोरेलाल त्रिपाठी ने बताया कि बड़े बेटे की कोविड से 25 अप्रैल 2021 को मौत हो गई। ऐसे में तेरहवीं के बाद बहू ने भी गम में सुसाइड कर ली। जिससे अहम त्रिपाठी और अर्थव त्रिपाठी के पालने पोसने की जिम्मेदारी निभा रहा हूं। ऐसे में आंगनबाड़ी की मदद से मुख्यमंत्री कोविड 19 बाल कल्याण योजना का पता चला तो लगा कि शायद बुरे वक्त में सरकार सहारा बने।

अनाथ बच्चों को जानिए क्या मिलेगा

योजना के मुताबिक अनाथ बच्चों को 5 हजार प्रतिमाह पेंशन दी जाएगी। वहीं रहने का स्थान न होने पर बाल देख रेख संस्था में प्रवेश दिलाया जाएगा, निशुल्क मासिक राशन, 1 से आठ तक निशुल्क शिक्षा सरकारी स्कूल में, प्राइवेट में आरटीई के तहत प्रवेश व शुल्क सहायता, 9 से 12 तक पढ़ने पर 10 हजार सालाना फीस, हायर एजुेशन का भी खर्चा, मेडिकल-इंजीनियरिंग की पढ़ाई में सरकार की ओर से मदद।

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