SDG India Index 2021: विकास के मापदंड में उत्तराखंड का तीसरा स्थान, हासिल किए 72 अंक
देहरादून, जून 4। उत्तराखंड देश के उन राज्यों में से है, जिन्हें किसी भी विकास कार्य के लिए कई तरह के पर्यावरण घटकों का ध्यान रखना पड़ता है। लेकिन, पर्यावरणीय बंदिशों के बावजूद विकास की दिशा में राज्य के कदम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) इंडेक्स में राज्य तीसरा स्थान हासिल कर फ्रंट रनर राज्यों में शामिल हो गया है। ऊर्जा, शिक्षा की गुणवत्ता के साथ ही शांति, न्याय और संस्थाओं की मजबूती में भी राज्य ने अच्छा प्रदर्शन किया है।

पिछ्ले वर्ष से बढ़ा राज्य का स्कोर
एसडीजी इंडेक्स स्कोर में केरल ने 75 स्कोर लेकर पहला स्थान प्राप्त किया है। 74 स्कोर के साथ हिमाचल प्रदेश व तमिलनाडू दूसरे और 72 स्कोर के साथ उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, गोवा और कर्नाटक तीसरे स्थान पर रहे हैं। 2019-20 की तुलना में 2020-21 में एसडीजी में उत्तराखंड का स्कोर 64 से बढ़कर 72 हो गया है। स्कोर रैंकिंग में आठ की वृद्धि की बदौलत उत्तराखंड विकास कार्यों में अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्य में शुमार हो गया है।
टॉप-पांच में उत्तराखंड को जगह दिलाने में ऊर्जा क्षेत्र की अहम भूमिका रही। हरित ऊर्जा के रूप में सौर ऊर्जा की दिशा में राज्य ने तेजी से कदम बढ़ाए हैं। प्रदेश ने लर्निंग आउटकम में सुधार किया है। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता अच्छी हुई है। विद्यालयों में नामांकन में प्रदर्शन अच्छा है। गरीबी उन्मूलन में राज्य ने इच्छाशक्ति दिखाई है। इसका नोडल विभाग ग्राम्य विकास है। दरअसल एसडीजी को लेकर प्रदेश सरकार की इच्छाशक्ति ने अच्छा असर दिखाया है। सरकार की ओर से इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सेंटर फार पब्लिक पालिसी एंड गुड गवर्नेंस की स्थापना की गई है। इस सेंटर की मुख्य कार्यकारी अपर मुख्य सचिव नियोजन मनीषा पंवार और अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी डा मनोज पंत ने राज्य के इस प्रदर्शन को विकास के प्रति दृढ इच्छाशक्ति का परिणाम बताया है।
कैबिनेट मंत्री व सरकार के प्रवक्ता सुबोध उनियाल ने कहा कि एसडीजी रैंकिंग से यह साबित हो गया है कि सरकार ठीक दिशा में आगे बढ़ रही है। इस रैंकिंग में टाप पर पहुंचने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ा जाएगा।
एसडीजी के इन लक्ष्यों में उत्तराखंड ने इन क्षेत्रों में की है मेहनत
-गरीबी उन्मूलन, पोषण व खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, जेंडर, पेयजल व स्वच्छता, ऊर्जा और अक्षय ऊर्जा, ओवरआल ग्रोथ व पर्यटन, अवस्थापना व उद्योग, विसंगतियों में कमी, शहरीकरण, सतत उपभोग और उत्पादन, जलवायु परिवर्तन, वन व पर्यावरण और शांति, सुरक्षा और मजबूत संस्थाएं।












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