अगले साल से मप्र की नर्सरियों में इस्तेमाल होंगे रूट ट्रेनर, पॉलीथिन से मिलेगी निजात
भोपाल। मध्य प्रदेश की हरियाली में पॉलीथिन के दाग मिटाने के लिए राज्य सरकार का वन विभाग रूट ट्रेनर (पौधे रोपने की विशेष ट्रे)] का सहारा लेगी। अगले साल से विभाग की नर्सरियों में इसका इस्तेमाल शुरू हो जाएगा। हालांकि पहले साल प्रयोग के तौर पर रूट ट्रेनर में पांच हजार पौधे ही तैयार किए जाएंगे। इसकी सफलता के बाद आगामी वर्षो में इनकी संख्या बढ़ाई जाएगी। इससे पौधे तैयार करने और रोपण स्थल तक ले जाने में पॉलीथिन का इस्तेमाल कम हो जाएगा और जमीन को प्रदूषित होने से बचाया जा सकेगा।

प्रदेश में वन विभाग की 171 नर्सरी हैं। इनमें हर साल करीब छह करोड़ पौधे तैयार किए जाते हैं। इन्हें जुलाई माह में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में रोपा जाता है। इन पौधों को तैयार करने के लिए करीब आठ करोड़ पॉलीथिन बैग का इस्तेमाल होता है। पौधे लगाते समय ये पॉलीथिन रिसाइकल करने के बजाय निकाल कर फेंक दी जाती हैं, जिससे भूमि प्रदूषण होता है। इसे लेकर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने दो साल पहले पौधे तैयार करने में पॉलीथिन के इस्तेमाल पर रोक लगाई थी, पर प्रदेश में इसका विकल्प नहीं तलाशा जा सका था।
ये होता है रूट ट्रेनर
यह उम्दा किस्म के प्लास्टिक से बनाई गई ट्रे होती है। इसमें गिलास जैसे कई ट्रेनर होते हैं। इनमें थोड़ी मिट्टी, खाद और बीज डालकर पौधे तैयार किए जाते हैं। इसमें छह से 10 इंच के पौधे भी रोपने लायक हो जाते हैं। ट्रे को पौधारोपण की जगह ले जाकर मिट्टी सहित पौधे को निकालकर रोपा जाता है। 10 से 15 साल तक काम आएंगे रूट ट्रेनर अधिकारियों के मुताबिक रूट ट्रेनर का पर्यावरण को साफ रखने में तो योगदान रहेगा ही। इससे सरकार को बचत भी होगी।
दरअसल, पॉलीथिन का एक बार इस्तेमाल होता है। लाखों पॉलीथिन तो ऐसी निकलती हैं, जिनका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है, पर रूट ट्रेनर अच्छे प्लास्टिक से निर्मित होते हैं। इन्हें 10 से 15 साल तक उपयोग किया जा सकता है। इनके उपयोग से करोड़ों की संख्या में पॉलीथिन बैग खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी।












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