राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान: उत्तराखंड में 43.29 लाख बच्चों को खिलाई जाएगी एलबेंडाजोल की गोली

देहरादून, 5 अगस्त। उत्तराखंड में 6-11 सितंबर तक राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान संचालित किया जाएगा। इस दौरान 1-19 आयुवर्ग के 43.29 लाख बच्चों को एलबेंडाजोल की गोली दी जाएगी। अभियान के तहत आशाएं घर-घर जाकर बच्चों को दवा देंगी। जहां आशाएं नहीं हैं, वहां यह काम आंगनबाड़ी कार्यकर्त्‍ता करेंगी। वहीं, एएनएम इस अभियान की निगरानी करेंगी। राज्य स्तर से अभियान की निगरानी के लिए 104 टेली कालिंग प्रणाली को विकसित किया जा रहा है।

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अपर सचिव स्वास्थ्य एवं एनएचएम की मिशन निदेशक सोनिका ने बुधवार को अभियान के सफल संचालन के लिए राज्य समन्वय समिति की बैठक ली। वर्चुअल बैठक में विभिन्न विभागों एवं सहयोगी संस्थाओं के 34 अधिकारियों ने हिस्सा लिया। उन्होंने बताया कि लगभग 34.92 लाख एलबेंडाजोल की गोलियां जनपदों को उपलब्ध करा दी गई हैं। इस दवा का पूर्व परीक्षण भी कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि दवा देने से पूर्व यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी अभिभावक एवं इस बारे में जागरूक हों कि दवा क्यों दी जा रही है। समुदाय की जागरूकता ही अभियान की सफलता का मुख्य कारक है। इससे ही लोग स्वयं बच्चों को दवा खिलाने के लिए आगे आएंगे।

उन्होंने निर्देश दिए कि पंचायती राज विभाग ग्राम प्रधानों एवं जन प्रतिनिधियों को आनलाइन प्रशिक्षण के जरिए अभियान की जानकारी दे। ताकि ग्राम प्रधानों के माध्यम से अभिभावकों को दवा की उपयोगिता के बारे में जागरूक किया जा सके। इसी प्रकार राज्य स्वच्छता मिशन और महिला एवं बाल विकास विभाग भी अभियान को सफल बनाने के लिए आवश्यक प्रचार-प्रसार व सोशियल मोबिलाइजेशन का जिम्मा संभालें।

एनएचएम निदेशक डा. सुमन आर्य ने कहा कि अभियान का संचालन पूरी तरह कोविड-19 के मानकों के अंतर्गत किया जाएगा। दवा देने के दौरान आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्त्‍ता कोविड अनुरूप व्यवहार का पालन करते हुए दवा खिलाएंगी। अभियान की निगरानी के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्त्‍ताओं एवं विभागीय अधिकारियों की एक स्थान पर बैठक आदि नहीं की जाएगी। इसकी जगह टेलीफोन पर अभियान की निगरानी की जाएगी।

एनएचएम के प्रभारी अधिकारी डा. भार्गव विश्वास गायकवाड़ ने कहा कि कृमि संक्रमण के कारण बच्चों में दस्त और डायरिया होता है और डायरिया के दौरान पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। जिस कारण कुपोषण की वजह से बच्चों का शारीरिक एवं मानसिक विकास अवरुद्ध हो जाता है। उन्होंने बताया कि यह अभियान साल में दो बार संचालित किया जा रहा है।

बीती मार्च में कोविड के बावजूद भी यह अभियान चलाया गया, जिसमें 79 प्रतिशत बच्चों को ही कृमि मुक्ति की दवा दी जा सकी। निजी विद्यालय संगठन के अध्यक्ष प्रेम कश्यप ने सुझाव दिया कि अभियान के तहत शहरी मलिन बस्तियों में रहने वाले बच्चों पर विशेष फोकस किया जाए। उनके अभिभावकों को जागरूक करने पर ही वह इस अभियान से भलीभांति जुड़ेंगे।

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