हरियाणा की परिवार पहचान पत्र योजना: सरकार ने कहा- समाज के आखिरी व्यक्ति को भी योजनाओं का लाभ मिल रहा

चंडीगढ़। हरियाणा में परिवार पहचान पत्र योजना से लाखों लोगों का भला हुआ है। इस​लिए, इस योजना की न केवल अदालत ने सराहना की, बल्कि देश के कई राज्यों में इसकी अब तक चर्चा हो रही है। जर्मनी के राजदूत ने भी इस योजना को समझा और सराहा। प्रदेश सरकार का कहना है कि, परिवार पहचान पत्र के साथ जन्म मृत्यु और विवाह पंजीकरण को भी जोड़ा जाएगा। बताते चलें कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास 1996 में जब हरियाणा भाजपा का प्रभार था, तब उन्हें पूरे प्रदेश में घूमने का मौका मिला था। हरियाणा को उन्होंने बहुत अंदर तक जाकर देखा। यहां के लोगों की दिक्कतें-परेशानियों को महसूस किया।

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उन दिनों भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रमेश जोशी हुआ करते थे। प्रांतीय संगठन मंत्री का दायित्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के हाथों में था। संगठन के कामकाज से मोदी का अक्सर हरियाणा आना होता था। मोदी कभी रोहतक, कभी पंचकूला तो कभी फरीदाबाद और गुरुग्राम में रुका करते थे। भाजपा को सत्ता में लाने और समाज के आखिरी व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के तरीकों पर मोदी की मनोहर लाल से अक्सर बातें हुआ करती थीं। मोदी के बूथ मैनेजमेंट का ही नतीजा है कि भाजपा हरियाणा में दूसरी बार सत्ता में है और उनके पुराने सहयोगी मनोहर लाल मुख्यमंत्री हैं।

अंत्योदय की भावना से ओतप्रोत मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कई ऐसी योजनाएं हरियाणा में चलाईं, जो न केवल दूसरे राज्यों के लिए प्रेरणा बनीं, बल्कि केंद्र सरकार ने भी उन्हें पूरे देश में लागू कर दिया। स्वामित्व योजना, आनलाइन तबादले, मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी, मेरी फसल-मेरा ब्योरा, मेरा पानी-मेरी विरासत, अंत्योदय परिवार उत्थान योजना और कोरोसीन मुक्त प्रदेश कुछ ऐसी योजनाएं हैं, जिनके लागू करने से हरियाणा को नई पहचान मिली। यहां तबादला उद्योग पूरी तरह से बंद हो गया। नौकरियां मैरिट पर दी जाने लगीं। भíतयों के लिए होने वाले पेपर लीकेज को रोकने के लिए प्रदेश सरकार ने ठोस कानून बना दिया। अब मुख्यमंत्री अपने राज्य में परिवार पहचान पत्र योजना लेकर आए हैं, जो अन्य प्रदेशों के लिए भी आदर्श साबित हो सकती है। मनोहर लाल संघ की पाठशाला से निकले हैं। इसलिए वह व्यक्ति नहीं, बल्कि परिवार को इकाई मानने में भरोसा रखते हैं। यही वजह है कि हरियाणा में परिवार पहचान पत्र योजना के जरिये जिस तरह समाज के हर व्यक्ति को सरकारी योजनाओं का लाभ देने की शुरुआत की गई है, नि:संदेह वह अनुकरणीय पहल है।

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मुख्यमंत्री खुद मानते हैं कि परिवार पहचान पत्र योजना लागू होने से छिपा हुआ गोलमाल बाहर आएगा। अभी तक सिस्टम ऐसे बने हुए थे कि जो दबंग है और ऊंचा बोल सकता है, वह तो सभी योजनाओं का लाभ ले जाता है, लेकिन जो गरीब है और अपनी बात बोल नहीं सकता, वह आज भी सुविधाओं से वंचित है। अंतिम व्यक्ति की चिंता के लिए किसी ने भी सिस्टम नहीं बनाया था। परिवार पहचान पत्र योजना अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई कल्याणकारी योजना है। पिछले तीन वर्षो से इस योजना पर काम किया जा रहा है। प्रदेश में 64 लाख परिवारों ने परिवार पहचान पत्र में अब तक रजिस्ट्रेशन करवा दिया है। जो भी कोई सरकारी सेवा का लाभ उठाना चाहता है, उसके लिए हरियाणा का निवासी होने का कोई तो दस्तावेज होना चाहिए। हरियाणा सरकार द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं पर हरियाणा के नागरिकों का पहला अधिकार है।

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अपने प्रदेश के नागरिकों को सुविधा देने के लिए मजबूत डाटा की जरूरत है। अलग-अलग विभागों के पास अपना-अपना डाटा होता है, लेकिन उसका मिलान करते हैं तो वह कहीं भी मेल नहीं खाता। इस बात को ध्यान में रखते हुए यूनिक डाटा तैयार करने के लिए परिवार पहचान पत्र योजना बनाई गई है। इसका सबसे ज्यादा फायदा गरीब और वंचित लोगों को होगा। बीपीएल परिवारों के लिए अभी तक 10 शर्ते होती थीं, जिनमें फ्रिज, टीवी व जमीन नहीं होने की शर्त भी शामिल थी। अभी तक बीपीएल उसे माना जाता है, जिस परिवार की सालाना आय एक लाख 20 हजार रुपये है। परिवार पहचान पत्र योजना के तहत 1.80 लाख रुपये की सालाना आय वाले परिवारों को बीपीएल में शामिल किया जाएगा। इससे प्रदेश के लगभग तीन लाख और परिवारों को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा।

हरियाणा की इस योजना की न केवल अदालत ने सराहना की, बल्कि देश के कई राज्यों में इसकी चर्चा हो रही है। जर्मनी के राजदूत ने भी इस योजना को समझा और सराहा है। परिवार पहचान पत्र के साथ जन्म, मृत्यु और विवाह पंजीकरण को भी जोड़ा जाएगा। इससे सरकार के पास रियल टाइम डाटा उपलब्ध होगा, जिससे योजना बनाने और क्रियान्वित करने में आसानी होगी। विपक्ष ने एक चिंता जाहिर की थी कि कहीं यह डाटा चोरी न हो जाए या फिर सरकार इसे कहीं बेच न दे। विपक्ष की इस चिंता को दूर करने के लिए सरकार ने कल ही विधानसभा में कानून बना दिया है। परिवार पहचान पत्र का डाटा सुरक्षित करने के लिए आइटी सिक्योरिटी फीचर इस्तेमाल किए गए हैं। बिना अनुमति के कोई भी इस सूचना का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। इस डाटा की किसी प्रकार की चोरी होती है तो सजा का प्रविधान भी किया गया है।

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