हरियाणा में आक्सी-वन परियोजना, पुरानी मुगल बादशाही नहर इलाके में 9 तरह के वन होंगे, मिलेगी शुद्ध वायु
करनाल। हरियाणा में करनालवासियों के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की अगुवाई वाली सरकार से अनूठा उपहार मिला है। यहां करीब 5 करोड़ रुपए की लागत से "आक्सी-वन करनाल माडल" बनाया जा रहा है। इसमें 9 प्रकार के वन विकसित किए जाएंगे। इनमें चित वन (सौंदर्य वन), पाखी वन (पक्षी वन), ऋषि वन (सप्तऋषि वन) नीर वन (झरना वन), तपो वन (ध्यान का वन), सुगंध सुवास( सुगंध वन), अंतरिक्ष वन (नक्षत्र वन), आरोग्य वन(स्वास्थ्य वन) तथा स्मरण वन(स्मृति वन) शामिल हैं।

डीसी निशांत कुमार यादव ने बताया कि, आक्सी-वन परियोजना से लोगों को शुद्ध वायु मिलेगी। उन्होंने कहा कि बढ़ती आबादी के कारण आज विश्वभर में पेड़-पौधों की जगह कंक्रीट के जंगल खड़े हो रहे हैं। हीट आइलैंड इफेक्ट से वायु की गुणवत्ता खराब होती है। इसलिए पेड़ों की बहुत आवश्यकता है। हम जो परियोजना शुरू करा रहे हैं, वहां सभी वनों में विभिन्न प्रकार के फल-फूल, छायादार तथा आरोग्य औषधी के पौधेरोपित किए जाएंगे। सूचना केंद्र और स्मारिका की दुकान भी होगी। एम्फी थियटर का निर्माण किया जाएगा। लाइट एंड साउंड शो भी दिखाया जाएगा।
इस नहर पर विकसित होगा आक्सी-वन
डीसी ने बताया कि आक्सी-वन पुरानी मुगल बादशाही नहर (ओल्ड मुगल कैनाल) पर सेक्टर-चार से लेकर मधुबन तक करीब 4.5 किलोमीटर लंबा व 200 फुट चौड़ा तथा 40 हेक्टेयर भूमि पर बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि, वन फूलों की खुशबू से महकेगा। पुरानी मुगल बादशाही भी जंचेगी। चित वन में विभिन्न मौसमों में खिलने वाले आर्किड टी (कचनालर), इंडियन लैबर्नम (अमल्तास), प्राइड ऑफ इंडिया, रेड सिल्क कॉटन ट्री(सीमल), इंडियन कोरल, सीता अशोक, जावा कैसिया, लाल गुलमोहर, गोल्डन शॉवर व पैशन फ्लावर, जैसे सजावटी और फूल वाले पौधे लगाए जाएंगे।
चित वन में विभिन्न पौधे होंगे
यहां पाखी वन में पीपल, बरगद, पिलखन, नीम आदि के पौधे होंगे, आंतरिक्ष वन में जंगल की आग(पलाश/ढाक), कटहल गुल्लर, आवंला, कृष्णा नील, चैम्पा, खैर व बेल पत्थर जैसे पौधे होंगे। इसी प्रकार आरोग्य वन में तुलसी, आश्वगंधा, नीम, एलोवेरा, हरड़, बेहड़ा, आंवला आदि औषधीय पौधे होंगे। सुगंध वाटिका में चमेली, रात की रानी, दिन का राजा, पारिजात, चम्पा, गुलाब, हनी स्कल व पैसी फ्लौरा आदि पौधे होंगे।
34 तीर्थ स्थलों पर पंचवटी वाटिका
डीसी ने बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर हरियाणा सरकार द्वारा कुरुक्षेत्र भूमि 48 कोस के अंतर्गत पड़ने वाले करीब 134 तीर्थ स्थलों पर पंचवटी वाटिका लगाने की शुरूआत की गई। इनमें करनाल जिला के 34 तीर्थ भी शामिल है। पंचवटी वाटिकाओं में बरगद, पीपल, आंवला, बेल पत्थर तथा सीता अशोक के पेड़ शामिल हैं। पौराणिक महत्व के अलावा ये पेड़ पर्यावरणीय लाभ भी प्रदान करते है। बड़ और पीपल विभिन्न प्रकार के पक्षियों, कीड़ों आदि सहित विभिन्न जीवन रूपों को भोजन और आश्रय प्रदान करते हैं। ये बहुत अच्छे छायादार पेड़ हैं।

उन्होंने बताया कि कोविड संकट और जीवन रक्षक आक्सीजन के उत्पादन के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल की प्रेरणा से वन विभाग ने राज्य के लोगों को बेहतरीन सुविधाएं प्रदान करने पर ध्यान केन्द्रित किया है। इसी उद्देश्य से वन विभाग ने इस वर्ष तीन करोड़ पौधे लगाने की महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है।












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