उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में अब प्राकृतिक आपदाओं का मिलेगा पूर्वानुमान
देहरादून, अगस्त 23। उत्तराखंड के अत्यधिक ऊंचाई वाले इलाकों पर अक्सर ग्लेशियर फटने, भूस्खलन और झीलों का वॉटर लेवल बढ़ने की समस्याएं अक्सर सामने आती रहती हैं। इन समस्याओं का समाधान खोजने के लिए वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी की ओर से ग्लेशियरों के नीचे नदियों में वॉटर लेवल रिकॉर्डर लगाए जाएंगे। इससे न सिर्फ नदियों में जनप्रवाह की मॉनिटरिंग की जाएगी, वरन जलप्रवाह अचानक तेज होने का भी आकलन किया जाएगा।

नदियों में वॉटर लेवल रिकॉर्डर लगाए जाने की प्रक्रिया शुरू
वाडिया इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. कालाचांद सांई के मुताबिक अभी उच्च हिमालयी क्षेत्रों में नदियों के जलप्रवाह की मॉनिटरिंग का कोई प्रभावी तंत्र विकसित नहीं है। ऐसे में ग्लेशियरों के टूटने या फिर हिमस्खलन के चलते बनने वाली झीलों, नदियों के जलप्रवाह की मॉनिटरिंग के लिए नदियों में वॉटर लेवल रिकॉर्डर लगाए जाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
प्राकृतिक आपदाओं का पूर्वानुमान लगाने में सहूलियत होंगी
पहले चरण में गंगोत्री, ढोकरियानी और दूनागिरी जैसे ग्लेशियरों के पास वॉटर लेवल रिकॉर्डर लगाने की तैयारी है। यदि ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने या टूटने के बाद नदियों के जलप्रवाह में अचानक बढ़ोतरी होती है तो वॉटर लेवल रिकॉर्डर के जरिए पता चल जाएगा। इसके साथ ही यदि नदियों के जलस्तर में तेजी से कमी आती है तो इसका भी आकलन किया जाएगा। इससे प्राकृतिक आपदाओं का पूर्वानुमान लगाने में थोड़ी सहूलियतें होंगी।












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