दिल्ली के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती, खाली पड़े पदों की भरने की कवायत शुरू
Delhi में शिक्षकों की भर्ती, खाली पड़े पदों की भरने की कवायत शुरू
नई दिल्ली, मई 28। दिल्ली कोरोना संकट से धीरे-धीरे उबर रहा है। इस महामारी की दूसरी लहर ने दिल्ली को बुरी तरह से प्रभावित कर दिया था, लेकिन अब धीरे-धीरे दिल्ली ने इस पर काबू पा लिय है। महामारी के बाद अब सरकार बरोजगारी से निपटने की तैयारी कर रही है। दिल्ली के सरकारी स्कूलों में खाली पड़ सीटों को भरने की कवायत शुरू कर दी गई है। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। ऐसे में अगर आपने बीएड कर लिया है और आपके पास उर्दू और पंजाबी का नॉलेज है तो ये खबर आपके लिए खुशखबरी है।

राजधानी दिल्ली में पंजाबी और उर्दू शिक्षकों के रिक्त पड़े पद भरने की कवायद शुरू हो गई है। पिछले काफी समय से स्कूलों में इन शिक्षकों के पद खाली हैं। कुछ दिनों पहले अन्य शिक्षकों के पद भरने के लिए दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड ने विज्ञापन निकाले थे, लेकिन पंजाबी व उर्दू को इसमें शामिल नहीं किया गया था। सिख इसका विरोध कर रहे थे। गौरतलब है कि जग आसरा गुरु ओट (जागो) के अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके ने दिल्ली में सत्तासीन आम आदमी पार्टी सरकार पर पंजाबियों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया था। अब दिल्ली सरकार की ओर से इन शिक्षकों के पद भरने की घोषणा कर दी गई है। उधर, मनजीत सिंह जीके ने कहा कि 12 मई को सरकारी स्कूलों के 6886 पदों को भरने की घोषणा की गई थी। पिछले काफी समय से मांग किए जाने के बावजूद पंजाबी शिक्षकों के 787 और उर्दू के 671 पद भरने के लिए कोई कदम नहीं उठाए जाने से लोगों में नाराजगी थी।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों की कमी से इन दोनों भाषाओं को पढ़ने वाले लाखों बच्चों को परेशानी हो रही है। कई छात्र मजबूरन दूसरी भाषा की पढ़ाई कर रहे हैं। विरोध के बाद सरकार ने बृहस्पतिवार शाम को पंजाबी व उर्दू शिक्षकों के पद भरने के लिए विज्ञापन जारी कर दिया है। उन्होंने सरकार से शिक्षकों के पद शीघ्र भरने की मांग की है जिससे कि अगले शिक्षा सत्र में छात्रों की परेशानी दूर हो सके। बता दें कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति का मसला भी उठ चुका है और दिल्ली सरकार इस पर शिक्षकों की भर्ती के लिए आश्वासन भी दे चुकी है।












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