सीएम शिवराज सिंह चौहान की केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात, विभिन्न योजनाओं की राशि स्वीकृत करने का अनुरोध किया
भोपाल, 12 जुलाई। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान रविवार रात को दिल्ली पहुंचे। उन्होंने केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्रियों से मध्य प्रदेश के विभिन्न प्रस्तावों को स्वीकृत करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि अधिक राशि मिलने से योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। केंद्रीय मंत्रियों ने आश्वस्त किया कि इस संबंध में शीघ्र कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार से कहा कि भारत सरकार के राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) के तहत तीन पेंशन योजनाओं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था, विधवा और निशक्त पेंशन योजना में भारत सरकार द्वारा जनगणना वर्ष 2001 को आधार बनाकर प्रदेश के लिए 22.05 लाख हितग्राहियों की संख्या का स्टेट कैप निर्धारित किया है।
इस स्टेट कैप के अतिरिक्त 11.38 लाख पात्र हितग्राहियों पर 66.78 करोड़ रुपये प्रतिमाह राज्य शासन पर अतिरिक्त वित्तीय भार आ रहा है। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से प्रेषित केंद्रीय अनुदान प्रस्तावों की स्वीकृतियों एवं तीनों पेंशन योजनाओं में निर्धारित स्टेट कैप को फिर से निर्धारित करने का अनुरोध किया।
59.64 करोड़ के प्रस्ताव दिए
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र को वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र के 25 जिलों की राशि 8.44 करोड़, 26 संस्थाओं के दीनदयाल दिव्यांग पुनर्वास योजना की राशि 7.59 करोड़, 10 जिलों के एडिप योजना की राशि 3.39 करोड़ एवं 12 संस्थाओं के एजीपी योजना की राशि 1.75 करोड़ रुपये के प्रस्ताव प्रेषित किए गए हैं।
साथ ही वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र के 18 जिलों की राशि 59.64 करोड़ रुपये के प्रस्ताव प्रेषित किए हैं। मुख्यमंत्री ने इन प्रस्तावों को स्वीकृत करने का केंद्रीय मंत्री से अनुरोध किया। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को वर्ष 2021-22 के लिए सरप्लस शेयरिंग मॉडल को प्रदेश में क्रियान्वित करने के लिए अनुमति प्रदान करने का अनुरोध किया।
चौहान ने बताया कि प्रदेश में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना खरीफ 2020 एवं रबी 2020-21 में क्रियान्वित करने के लिए बीमा कंपनियों के चयन के लिए तीन बार निविदा जारी की गई लेकिन प्रीमियम दरें अधिक आने के कारण शासन द्वारा 80-110 प्रतिशत सरप्लस शेयरिंग मॉडल को प्रदेश में लागू किया गया है।
इसके अनुसार बीमा कंपनी की क्लेम देनदारियां कुल प्रीमियम के 80 से 110 प्रतिशत रहेंगी। कुल प्रीमियम के 110 प्रतिशत से अधिक स्तर का क्लेम राज्य शासन द्वारा वहन किया जाएगा तथा 80 प्रतिशत से कम दावा बनने पर बीमा कंपनी द्वारा 80 प्रतिशत सीमा के अतिरिक्त की राशि राज्य शासन को वापस की जाएगी।
मालूम हो कि सरप्लस शेयरिंग मॉडल में क्लेम की गणना में राज्य शासन की सहभागिता होती है, जिससे किसानों को पारदर्शी व्यवस्था से बीमा का लाभ मिलता है तथा प्रीमियम की राशि कम होने से राज्यांश तथा केंद्रांश की राशि कम रहती है। मुख्यमंत्री ने उनसे ग्रीष्मकालीन मूंग का पांच लाख टन उपार्जन लक्ष्य बढ़ाने का भी अनुरोध किया।












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