छत्तीसगढ़ः CM भूपेश बघेल ने कहा- गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ से पूरा होगा बहुआयामी विकास
रायपुर। छत्तीसगढ़ में पंडित सुंदरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय के पंचम दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ का हमारा सपना प्रदेश के समग्र और बहुआयामी विकास से ही पूरा होगा। इस सपने को पूरा करने में अन्य शिक्षण संस्थाओं की तरह पंडित सुंदरलाल शर्मा (मुक्त ) विश्वविद्यालय की और यहां से उपाधि अर्जित करने वाले छात्र-छात्राओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका होनी चाहिए। विद्यार्थी छत्तीसगढ़ की माटी से जुड़े होने के कारण, राज्य को न सिर्फ अपना भावनात्मक समर्थन प्रदान करें, बल्कि आपकी पूरी प्रतिभा, ऊर्जा और सारे प्रयत्न भी छत्तीसगढ़ के जनजीवन को समृद्ध और खुशहाल बनाने में करें।

बघेल ने कहा कि जब हम कहते हैं-बात है अभिमान के, छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान के, तो हम चाहते हैं कि राज्य का संपूर्ण गौरव उभर कर सामने आए। हमारे कृषि, वन, जल, खनिज आदि सारे संसाधनों का उपयोग, युवाओं की भागीदारी और रोजगार सुनिश्चित करने में हो। इस तरह एक पंथ अनेक काज होने चाहिए, जो उच्च शिक्षा के साथ प्रत्येक व्यक्ति का जीवन संवारे, साथ ही प्रदेश के विकास में सबका योगदान दर्ज करे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के कमजोर तबकों के स्वावलंबन के प्रयासों को आगे बढ़ाने में उच्च शिक्षा की भागीदारी किस तरह से अधिक मजबूत हो। खेत, जंगल, जल, संसाधन, खदानें सभी को किस प्रकार से सतत विकास से जोड़ा जाए और उसमें हमारी युवा शक्ति की केंद्रीय भूमिका हो, यह विचार करने का समय आ गया है।
कोविड-19 के दौर में हम सभी सकारात्मक सोच के साथ एक-दूसरे के दुख के सहभागी बनें। अपनी क्षमता के अनुसार एक-दूसरे का सहयोग करें। मानवता की खातिर जो भी काम किया जा सकता है, वह हम सबको मिलकर करना चाहिए। यह बात राज्यपाल अनुसुईया उइके ने दीक्षांत समारोह में कही। उन्होंने कहा कि हमें भविष्य में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में ऐसे संसाधनों की जरूरत पड़ेगी, जो भौतिक दूरियों के बावजूद हमारे ज्ञान में अभिवृद्धि कर सकें। छत्तीसगढ़ के विश्वविद्यालय-महाविद्यालयों में व्याख्याताओं और प्राध्यापकों के पद रिक्त हैं। बस्तर-सरगुजा जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में यह समस्या ज्यादा है। इसके कारण शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इसके साथ ही शिक्षण संस्थानों को अच्छी ग्रेडिंग नहीं मिल पाती है, जिसके चलते शिक्षण संस्थानों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से सहायता राशि मिलने में कठिनाई होती है। इन रिक्तियों की जल्द पूर्ति किए जाने की आवश्यकता जताई।












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