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राम जेठमलानी

राम जेठमलानी
राम जेठमलानी एक बेहतरीन भारतीय वकील हैं जिन्होंने वाजपेयी के प्रशासन में केंद्रीय मंत्री के रूप में कार्य किया। उन्होंने 17 साल की उम्र में वकालत शुरू कर दी थी, क्योंकि उन्होंने कम उम्र में लॉ स्कूल की पढ़ाई पूरी कर ली थी, जिसमें उन्होंने विलक्षण बुद्धि का प्रदर्शन किया था। उनके द्वारा पुराने नियम के विरुद्ध लड़ने पर न्ययालय को कानूनी तौर पर वकालत करने की उम्र को 21 वर्ष से कम करना पड़ा ताकि उन्हें वकालत शुरु करने का अवसर मिल सके। अपनी स्नातक स्तर की पढ़ाई के तुरंत बादए उन्होंने विभाजन से पहले कराची में अपनी फर्म खोली, हालांकि, जब दंगे भड़क गए तो वे भारत गए और एक नई शुरूआत की। एक के बाद एक हाई प्रोफाइल मामले जीतने के कारण उन्होंने खुद को कानूनी दुनिया में एक ताकत के रूप में स्थापित कर लिया। उनके द्वारा एक शरणार्थी के रूप में लड़े गए मामलें प्रमुख थे जिनमें कानून अपराधियों के साथ बराबरी का व्यवहार करने की अनुमति देता है। जेठमलानी ने बॉम्बे उच्च न्यायालय में एक मामला दायर किया, जिसमें कानून को असंवैधानिक घोषित करने के लिए कहा और इसमें जीत हासिल की। वे 1993-1998 में नरसिम्हा राव रिश्वत मामले और हर्षद मेहता घोटाले के दौरान हर्षद मेहता का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों में से एक थे। उन्हें 2010 में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन का अध्यक्ष चुना गया था। वे 2017 में कानून से सेवानिवृत्त हुए। उन्हें पहली बार संसद के लिए चुना गया था। उन्होंने दो कार्यकालों के लिए सीट बनाए रखी और बाद में 1988 में राज्यसभा के लिए चुने गए। उन्होंने राज्य सभा में छह कार्यकालों के लिए सेवा की है।. .
By Keshav Karna | Sunday, January 31, 2021, 01:01:25 PM [IST]

राम जेठमलानी जीवनी

राम जेठमलानी एक बेहतरीन भारतीय वकील हैं जिन्होंने वाजपेयी के प्रशासन में केंद्रीय मंत्री के रूप में कार्य किया। उन्होंने 17 साल की उम्र में वकालत शुरू कर दी थी, क्योंकि उन्होंने कम उम्र में लॉ स्कूल की पढ़ाई पूरी कर ली थी, जिसमें उन्होंने विलक्षण बुद्धि का प्रदर्शन किया था। उनके द्वारा पुराने नियम के विरुद्ध लड़ने पर न्ययालय को कानूनी तौर पर वकालत करने की उम्र को 21 वर्ष से कम करना पड़ा ताकि उन्हें वकालत शुरु करने का अवसर मिल सके। अपनी स्नातक स्तर की पढ़ाई के तुरंत बादए उन्होंने विभाजन से पहले कराची में अपनी फर्म खोली, हालांकि, जब दंगे भड़क गए तो वे भारत गए और एक नई शुरूआत की। एक के बाद एक हाई प्रोफाइल मामले जीतने के कारण उन्होंने खुद को कानूनी दुनिया में एक ताकत के रूप में स्थापित कर लिया। उनके द्वारा एक शरणार्थी के रूप में लड़े गए मामलें प्रमुख थे जिनमें कानून अपराधियों के साथ बराबरी का व्यवहार करने की अनुमति देता है। जेठमलानी ने बॉम्बे उच्च न्यायालय में एक मामला दायर किया, जिसमें कानून को असंवैधानिक घोषित करने के लिए कहा और इसमें जीत हासिल की। वे 1993-1998 में नरसिम्हा राव रिश्वत मामले और हर्षद मेहता घोटाले के दौरान हर्षद मेहता का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों में से एक थे। उन्हें 2010 में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन का अध्यक्ष चुना गया था। वे 2017 में कानून से सेवानिवृत्त हुए। उन्हें पहली बार संसद के लिए चुना गया था। उन्होंने दो कार्यकालों के लिए सीट बनाए रखी और बाद में 1988 में राज्यसभा के लिए चुने गए। उन्होंने राज्य सभा में छह कार्यकालों के लिए सेवा की है।

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राम जेठमलानी निजी जीवन

पूरा नाम राम जेठमलानी
जन्म तिथि 14 Sep 1923
मृत्यु तिथि 08 Sep 2019 (उम्र 96)
जन्म स्थान सिंध (पाकिस्तान)
पार्टी का नाम Bharatiya Janta Party
शिक्षा
व्यवसाय वरिष्ठ अधिवक्ता, भारत के सर्वोच्च न्यायालय
पिता का नाम स्वर्गीय श्री बुलचंद गुरुमुख दास
माता का नाम श्रीमति पार्वती जेठमलानी
जीवनसाथी का नाम श्रीमती रत्ना आर।
जीवनसाथी का व्यवसाय वकील
संतान 2 पुत्र 2 पुत्री

राम जेठमलानी शुद्ध संपत्ति

शुद्ध संपत्ति
N/A
सम्पत्ति
N/A
उत्तरदायित्व
N/A

राम जेठमलानी के बारे में रोचक जानकारी

जेठमलानी ने कनाडा से 1977 का लोकसभा चुनाव लड़ा और जीता, जहां वे आपातकाल के दौरान उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने के बाद स्व-निर्वासित निर्वासन में रह रहे थे, जहाँ उन्होंने इंदिरा गाँधी सरकार की मुखर निंदा की थी।

राम जेठमलानी का राजनीतिक जीवन

  • 2019 : सदस्य, वरिष्ठ नागरिकों के लिए राष्ट्रीय परिषद।
  • 2016 : वे बिहार से छठे कार्यकाल के लिए राज्यसभा के लिए चुने गए।
  • 2006 : सदस्य, विदेश मंत्रालय के लिए परामर्शदात्री समिति और बाद में पांचवें कार्यकाल के लिए राज्य सभा के लिए चुने गए।
  • 2006 : सदस्य, संयुक्त समिति, लाभ के कार्यालय से संबंधित संवैधानिक और कानूनी स्थिति की जांच करने के लिए।
  • 2006 : उन्हें चौथे कार्यकाल के लिए राज्यसभा के लिए नामित किया गया।
  • 2004 : सदस्य, गृह मामलों की समिति।
  • 2000 : उन्हें तीसरे कार्यकाल के लिए राज्यसभा के लिए फिर से चुना गया।
  • 1998 : उन्हें केंद्रीय शहरी मामलों और रोजगार मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया।
  • 1996 : उन्हें केंद्रीय कानून, न्याय और कंपनी मामलों के मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया ।
  • 1994 : उन्हें दूसरे कार्यकाल के लिए राज्यसभा के लिए फिर से चुना गया।
  • 1988 : वे राज्यसभा के लिए चुने गए।
  • 1980 : वे दूसरे कार्यकाल के लिए सातवीं लोकसभा के सदस्य के रूप में चुने गए, जहां उन्होंने रामराव आदिक को 90,000 मतों के अंतर से हराया। आगामी चुनावों में उन्हें हार का सामना पड़ा।
  • 1977 : वे उत्तर पश्चिमी बॉम्बे से छठी लोकसभा के लिए चुने गए जहां उन्होंने कांग्रेस के गोखले हरि रामचंद्र को हराया।

पूर्व इतिहास

  • 1940: उन्होंने वकालत शुरू कर दी।

राम जेठमलानी की उपलब्धिया‍ँ

उन्हें वर्ल्ड पीस थ्रू लॉ, वाशिंगटन द्वारा मानवाधिकार पुरस्कार, 1977 से सम्मानित किया गया।

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