New Parliament Building: संसद भवन के उद्घाटन पर हंगामा है क्यों बरपा?
गुलाम नबी आज़ाद ने खुलासा किया है कि नया संसद भवन बनाने की चर्चा तीस साल पहले ही शुरू हो गई थी, जब नरसिंह राव प्रधानमंत्री, शिवराज पाटिल स्पीकर और वह खुद संसदीय कार्यमंत्री थे।

New Parliament Building: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच दिन के विदेश दौरे से लौटे, तो आते ही उन्होंने एक ऐसी बात कह दी, जिससे विपक्ष जरुर शर्मसार हुआ होगा| प्रधानमंत्री जब विदेश में थे तो उस बीच विपक्षी दलों ने उनकी ओर से 28 मई को होने वाले नए संसद भवन के उद्घाटन का बॉयकॉट करने का एलान कर दिया था| प्रधानमंत्री ने लौटते ही कहा कि सिडनी में हुए उनके सार्वजनिक सम्मान समारोह में आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ही नहीं, पूर्व प्रधानमंत्री और विपक्ष के अनेक नेता भी मौजूद थे| भारत के समूचे विपक्ष को मोदी ने आईना दिखा दिया कि दुनिया के लोकतांत्रिक देशों के विपक्ष की सोच और उनकी सोच में कितना अंतर है|

भारत का विपक्ष पिछले नौ सालों से ट्रिपल तलाक के समर्थन वाले अपने सोलहवीं सदी के एजेंडे और नेगेटिव सोच से ग्रस्त है| उसने ट्रिपल तलाक पर पाबंदी का विरोध किया, अनुच्छेद 370 हटाने का विरोध किया, सरदार पटेल की प्रतिमा स्टेच्यू ऑफ यूनिटी लगाने पर सवाल उठाया, पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर की गई सर्जिकल स्ट्राईक पर सवाल उठाया, गलवान घाटी में चीन के खिलाफ की गई कार्रवाई पर सवाल उठाया, राफेल सौदे पर सवाल उठाया, सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का विरोध किया, नया संसद भवन बनाने का भी विरोध किया, और तो और कोरोना वेक्सीन पर सवाल उठाया और विदेशों को वेक्सीन भेजने पर भी सवाल उठाया|
आज उसी मानवता की रक्षा के लिए दुनिया भर में भेजी गई वेक्सीन का ही नतीजा है किसी अन्य देश का प्रधानमंत्री भारत के प्रधानमंत्री के पांव छूता है| प्रधानमंत्री ने आते ही यह चर्चा की कि कोरोना के समय भारत ने पूरी दुनिया में वेक्सीन भेज कर मानवता की जो रक्षा की, आज इसीलिए दुनिया भारत का सम्मान करती है, यह मोदी का सम्मान नहीं है, भारत का सम्मान है|
कांग्रेस ने नया संसद भवन बनाने का विरोध किया था, लेकिन अब गुलाम नबी आज़ाद ने खुलासा किया है कि नया संसद भवन बनाने की चर्चा उस समय शुरू हो गई थी जब नरसिंह राव प्रधानमंत्री, शिवराज पाटिल स्पीकर और वह खुद संसदीय कार्यमंत्री थे| यह 1992-93 की बात है, तब प्रधानमंत्री, संसदीय कार्यमंत्री और स्पीकर की कई बैठकें भी हुई थीं, और यह तय हुआ था कि 2026 से पहले ज्यादा क्षमता वाला नया संसद भवन बन कर तैयार होना चाहिए| क्योंकि 2026 तक तो रोक लगी हुई है, लेकिन 2026 के बाद संसद सदस्यों की संख्या में बढ़ोतरी होगी|
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गुलामनबी आज़ाद कहते हैं कि मोदी ने सही समय पर नया भवन बनवाने का कदम उठाया, लेकिन कांग्रेस ने 2020 में नए संसद भवन की नींव रखने के कार्यक्रम का भी बहिष्कार किया था| मोदी के इस बार के विदेश दौरे की विदेशी मीडिया में चर्चा हुई हो, या ना हुई हो, भारत में खूब चर्चा हुई| लोग तो यहां तक कहते हैं कि विपक्ष ने संसद भवन के उद्घाटन का मुद्दा विदेशों में मोदी की लोकप्रियता से ध्यान हटाने के लिए उठाया है| विदेश दौरे में मोदी को उम्मीद से ज्यादा मिले सम्मान की चर्चा भारत में ज्यादा न हो, इसलिए विपक्ष ने राष्ट्रपति से उद्घाटन न करवाए जाने पर बॉयकॉट का शिगूफा छोड़ दिया, ताकि लोग अब कुछ दिन उसी पर अपना सर खपाएं|
खैर यह सवाल उठा तो लोग भी गढ़े मुर्दे उखाड़ने लगे| कई रहस्य खुले कि किस तरह कांग्रेस ने राष्ट्रपतियों और राज्यपालों को इग्नोर किया| छत्तीसगढ़ की विधानसभा का नींव पत्थर तो हाल ही में सोनिया गांधी और राहुल गांधी से ऑनलाईन रखवाया गया था, जबकि राज्यपाल रायपुर में राजभवन में बैठे रहे| मोदी तो देश के चुने हुए प्रधानमंत्री हैं| सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि कांग्रेसी मुख्यमंत्री ने सोनिया और राहुल से छत्तीसगढ़ की विधानसभा का नींव पत्थर उनकी किस हैसियत से रखवाया था| वे तो किसी संवैधानिक पद पर ही नहीं हैं| सोनिया और राहुल ने अपने मुख्यमंत्री को क्यों नहीं कहा कि राज्यपाल से नींव पत्थर रखवाईए|
जिन 19 पार्टियों ने नए संसद भवन के उद्घाटन के बॉयकॉट का एलान किया है, उनमें ममता बनर्जी, केसीआर, केजरीवाल और स्टालिन भी हैं। ये चारों मुख्यमंत्री अपने अपने राज्य में राज्यपालों का कैसा सम्मान कर रहे हैं, और करते रहे हैं, यह किसी से छिपा है क्या? ममता बनर्जी ने जगदीप धनखड़ के साथ कैसा व्यवहार किया था, यूनिवर्सिटी के दौरे के समय उनकी हत्या तक का प्रयास किया गया| तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता ही उनका रास्ता रोक कर खड़े हो गए थे, क्या लोग उसे भूल जाएंगे? या अरविन्द केजरीवाल ने हाल ही में विधानसभा में उपराज्यपाल के बारे में जो कहा था, क्या उसे लोग भूल गए हैं? केजरीवाल ने तो बाकायदा विधानसभा का सत्र बुलाकर कहा था, कि मैं चुना हुआ मुख्यमंत्री हूँ, तुम कौन हो|
अगर सवाल राष्ट्रपति के सम्मान का है, तो सब जानते हैं कि राजीव गांधी ने ज्ञानी जेल सिंह के साथ क्या व्यवहार किया था| इंदिरा गांधी की हत्या के बाद जब ज्ञानी जेल सिंह उन पर दिल्ली के दंगों को रुकवाने के लिए फ़ौज बुलाने के लिए कह रहे थे, तो राजीव गांधी ने सार्वजनिक रूप से कह दिया था कि जब बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती ही है|
इसलिए इस बात को छोड़ दिया जाए कि संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति करें या प्रधानमंत्री| जिस विपक्ष ने सेंटर विस्टा परियोजना का ही विरोध किया, उसे रुकवाने के लिए कोर्ट के दरवाजे भी खटखटाए, उन्हें प्रधानमंत्री की ओर से संसद के उद्घाटन पर सवाल नहीं उठाना चाहिए| कल तक वे संसद भवन के निर्माण का विरोध कर रहे थे, अब उद्घाटन पर सवाल उठा रहे हैं| लेकिन विपक्ष के इस विरोध को चार दलों के अध्यक्षों ने पंचर कर दिया है, जिनमें दो नवीन पटनायक और जगन मोहन रेड्डी तो मुख्यमंत्री हैं| इसके अलावा चन्द्रबाबू नायडू और सुखबीर बादल ने भी उद्घाटन का न्योता स्वीकार किया है|
इन चारों दलों ने विपक्ष से दूरी बना ली है, जिनके राज्यसभा में 19 सांसद हैं, तो लगे हाथों यह भी साफ़ हो गया कि दिल्ली के अध्यादेश का बिल राज्यसभा से भी बिना बाधा के पास होगा| एनडीए के 110 सांसदों को मिला कर 238 के सदन में अध्यादेश के पक्ष में 129 सांसद हो गए| लेकिन मूल बात यह है कि विपक्ष मोदी को विदेश दौरे में मिले विशेष सम्मान से परेशान हैं| वे इसे छिपाना चाहते थे, इसलिए संसद के उद्घाटन का मुद्दा उठा दिया| लेकिन मोदी विरोधी मीडिया ने वह काम पूरा कर दिया।
मोदी विरोधी मीडिया ने नेगेटिव प्रचार देने के लिए खूब शोर मचाया कि सब कुछ मैनेज्ड था| प्रधानमंत्री के दौरे से पहले ही सब कुछ तैयारियां कर ली जाती हैं, दिल्ली से टीम भेजी जाती है| भाजपा के ओवरसीज कार्यकर्ता सब कुछ मैनेज करते हैं| एक ख़ास किस्म का पत्रकारों का कुनबा है जो मोदी विरोधी डिस्कशन पर ही ज़िंदा है, लेकिन इस कुनबे ने नेगेटिव प्रचार के जरिए वह कर दिया, जो विपक्ष नहीं चाहता था|
प्रधानमंत्री के किसी भी विदेशी दौरे से महीना भर पहले एडवांस टीम भेज कर वहां तैयारियां शुरू हो जाना कोई मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद शुरू नहीं हुआ| मैंने भी पत्रकार के नाते तत्कालीन प्रधानमंत्री के साथ कई विदेश यात्राएं की हैं| हमेशा से ही प्रधानमंत्री की हर विदेश यात्रा की उस देश में तैयारियों के लिए महीना भर पहले भारत से टीम पहुंच जाती है, लेकिन पापुआ न्यू गिनी में जिस तरह वहां के प्रधानमंत्री ने मोदी के पांव छुए, क्या उसे कोई भारतीय मैनेज कर सकता है? क्या भारत की कोई टीम या भाजपा की ओवरसीज ईकाई का कोई नेता किसी देश के प्रधानमंत्री को कह सकता है कि जब उनके देश के प्रधानमंत्री पहुंचे तो वह उनके पांव छूकर स्वागत करें|
उससे पहले जी7 की मीटिंग के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने जिस प्रकार नरेंद्र मोदी को गले लगाया और उनसे कहा कि आप अमेरिका में इतने लोकप्रिय हैं कि मुझे आप से आटोग्राफ लेना चाहिए, क्या यह छोटी बात है? बिडेन ने यह भी कहा कि अगले महीने जब वह अमेरिका आएँगे, तो भीड़ को संभालना मुश्किल हो जाएगा|
आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने जिस तरह खुले स्टेडियम में मोदी का सार्वजनिक सम्मान समारोह रखवाया| क्या ऐसा हर प्रधानमंत्री के लिए होता है, ऐसे कितने सम्मान समारोह मनमोहन सिंह के लिए आयोजित हुए? भले ही सिडनी के सम्मान समारोह में जुटे लगभग सभी लोग भारतीय मूल के रहे होंगे, लेकिन उनका जोश देखा, ऐसा जोश कभी किसी अन्य प्रधानमंत्री के लिए देश के बाहर देखा था? इसका मतलब यही है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कारण भारत का सम्मान पूरी दुनिया में बढ़ा है|
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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