Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

हिन्दुओं की सहानुभूति सोनिया गाँधी के साथ क्यों नहीं?

जो सोनिया गांधी दशकों तक भारत पर एक महारानी की तरह राज करती रही, आज वही देश की राजनीति में हाशिये पर जा चुकी है। भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तारी की तलवार उनके ऊपर लटकी हुई है, अब तो वृद्धावस्था और बीमारी ही उनका बचाव है। फिर भी आम जनता, विशेषकर हिन्दुओं, में सोनिया गांधी के प्रति सहानुभूति दिख नहीं रही तो यह प्रश्न स्वाभाविक है कि सोनिया ने ऐसा क्या किया कि भारतीय जन मानस उनकी प्रशंसा करते करते उनका कट्टर विरोधी हो गया?

Sonia Gandhi

यह केवल संयोग नहीं है सोनिया गांधी की अध्यक्षता में कांग्रेस का हिन्दू विरोध ज्यादा मुखर हुआ है। वह कांग्रेस जो कभी मुस्लिम लीग के निशाने पर थी, आज खुद मुस्लिम लीग क्यों बनती जा रही है? आखिर ऐसा क्या हुआ है कि कांग्रेस लगातार मुस्लिम और क्रिश्चियन एजंडे को भारत की मुख्यधारा साबित करने में लगी रहती है। क्या इसके पीछे सोनिया गांधी की भी कोई भूमिका है?

दरअसल, सोनिया गाँधी एक ऐसा रहस्यमयी व्यक्तित्व है जिनकी भारत में आने से पहले की जिंदगी से लेकर वर्तमान में बीमारी तक सब कुछ देश से छिपाया जाता रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के निधन के बाद जब कांग्रेस के भीतर सत्ता हस्तांतरण के युग का सूत्रपात हुआ तो उनकी पत्नी सोनिया गाँधी ने राजीव गाँधी के सिपहसालारों को साथ लेकर दबाव बनाने का प्रयास किया किन्तु उस दौर में कांग्रेस के ब्राह्मण नेताओं ने उन्हें नेतृत्व नहीं करने दिया।

इतिहास गवाह है कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. पी.वी. नरसिम्हाराव के रहते सोनिया गाँधी कभी कांग्रेस कार्यालय की सीढ़ियाँ नहीं चढ़ी और जब नरसिम्हाराव का देहांत हुआ तो प्रधानमंत्री के प्रोटोकॉल के पालन को धता बताकर सोनिया गाँधी ने उनकी अंत्येष्टि तक दिल्ली में नहीं होने दी। वहीं इतिहास इस तथ्य की गवाही भी देता है कि कैसे सोनिया गाँधी के इशारों पर तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष बुजुर्ग सीताराम केसरी को उनके सामान सहित कार्यालय से बाहर फिंकवा दिया गया था।

दरअसल, कांग्रेस में हिन्दू विरोधी युग का सूत्रपात तो उसी दिन हो गया था जब राजीव व सोनिया गाँधी ने ईसाई धर्मगुरु पोप को भारत आने का निमंत्रण दिया और पोप भारत आ भी गये। हालांकि दर्जन भर हिन्दू संगठनों के भारी विरोध के चलते वे रांची हवाई अड्डे से लम्बे समय तक बाहर ही नहीं आ पाये। बाद में उनकी सभा हुई किन्तु यह सोनिया गाँधी की बड़ी हार थी क्योंकि राजीव गाँधी उस समय देश के प्रधानमंत्री थे, और झारखंड ( तत्कालीन दक्षिण बिहार) में कांग्रेसनीत सरकार सत्तासीन थी। ऐसा प्रतीत होता है मानो उस दिन की घटना को सोनिया गाँधी ने अपमान समझ कर कालांतर में कांग्रेस और देश के ईसाईकरण को अपना लक्ष्य बना लिया। एक समय ब्राह्मणों की पार्टी कहलाने वाली कांग्रेस को सोनिया गाँधी ने क्रॉस पर लटका दिया।

2004-2007 के बीच जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने भारतीय मुद्रा (सिक्कों) पर ईसाई क्रॉस का निशान बनाकर देश के समक्ष प्रस्तुत किया था, जिसे नाम दिया गया "अनेकता में एकता"। यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि ऐसा किसके इशारों पर किया गया होगा। मनमोहन सिंह भी सरकार का ईसाईकरण होने से नहीं रोक पा रहे थे।

सरकार के इतर सोनिया गांधी के हाथ में परोक्ष रूप से सत्ता संचालन सौंपने के लिए एक राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (NAC) का गठन किया गया। इसकी मुखिया होने के नाते सोनिया गाँधी का पार्टी और सरकार, दोनों पर समान अधिकार था। मिहिर शाह, नरेंद्र जाधव, आशीष मंडल, फराह नकवी, अनु आगा, मिराई चटर्जी, वर्जिनियस ज़ाक्सा, अरुणा रॉय, डॉ. राम दयाल मुंडा, ज्यां द्रेज, हर्ष मंदर, जैसे चर्च के प्रभाव में काम करने वाले और हिन्दू विरोधी मानसिकता के जिन लोगों को लेकर जिस राष्ट्रीय सलाहकार परिषद् का गठन किया गया उसी ने साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा रोकथाम विधेयक-2011 जैसे काले कानून का मसौदा तैयार किया था।

यदि यह संसद से पारित हो जाता तो बहुसंख्यक हिन्दू समाज बिना कुछ कहे दंगाई कौम घोषित हो जाता। यही नहीं, सोनिया गाँधी के इशारे पर कैसे हत्या के झूठे मामले में फंसाकर जगतगुरु शंकराचार्य को जेल भेजा गया और कैसे उड़ीसा से लेकर दक्षिण भारत और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में ईसाई प्रचार-प्रसार किया गया, देश इसे भूला नहीं है। साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर से लेकर कर्नल पुरोहित और स्वामी असीमानंद जैसे हिंदुवादियों को जेल भिजवाकर प्रताड़ित करना यकीनन सोनिया गाँधी का हिन्दू विरोधी एजेंडा का हिस्सा ही था।

सोनिया गाँधी के नेतृत्व में कांग्रेस की मनमोहन सिंह सरकार ने हिन्दू आतंकवाद जैसा शब्द गढा। सोनिया गांधी के खास सिपहसालार अहमद पटेल थे जिन्होंने उनसे भी एक कदम आगे बढ़कर कांग्रेस को 'मुस्लिम पार्टी' का तमगा दिलवा दिया। सोनिया कालखंड में जिस धर्मनिरपेक्षता की बात की जाती थी, वह असल में 'हिन्दू विरोधी' राजनीति मात्र थी।

कांग्रेस का सुनहरा इतिहास जिसने भी पढ़ा है उसने यह भी पढ़ा होगा कि उस दौर में पार्टी में एक से बढ़कर एक हिंदूवादी, राष्ट्रवादी चरित्र के नेता हुआ करते थे। लेकिन बतौर कांग्रेस अध्यक्ष 20 साल से कांग्रेस का नेतृत्व कर रही सोनिया गांधी के समय में अहमद पटेल, सलमान खुर्शीद, अम्बिका सोनी, दिग्विजय सिंह, कपिल सिब्बल (वर्तमान में सपा में), मार्गरेट अल्वा, एके एंटोनी जैसे दर्जनों नेताओं का महत्व बढा जिन्हें उनकी हिन्दू विरोधी छवि के लिए जाना जाता है। इनके हिन्दू विरोधी बयानों से पार्टी को कितना फायदा होता है यह चुनाव परिणामों ने कई बार दर्शा दिया है लेकिन शायद इससे ईसाई जगत में कांग्रेस और सोनिया गांधी की प्रशंसा होती हो, इसलिए सब जानबूझकर होने दिया जाता है।

मोदी सरकार ने अराजक कमाई का अड्डा बन चुके गैर सरकारी स्वयंसेवी संगठनों (NGO) पर जब लगाम लगाई तब यह खुलासा भी हुआ था कि हजारों NGO भारत विरोधी और हिन्दू विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं तथा गरीबों के कन्वर्शन को बढ़ावा दे रहे हैं। इन NGO को बड़ी मात्रा में विदेशी ईसाई संस्थाओं से धन प्राप्त हो रहा था और धन की यह आवक मनमोहन सिंह सरकार के समय उच्चतम स्तर पर थी।

इसके इतर, सोनिया गाँधी की हिन्दुओं से नफरत के कारण ही हामिद अंसारी जैसे इस्लामिक कट्टरपंथी को दो बार लगातार उप-राष्ट्रपति पद दिया गया जिनके राष्ट्र विरोधी कृत्य अब सामने आ रहे हैं। उपरोक्त सभी उदाहरण यह बताने को पर्याप्त हैं कि सोनिया गाँधी के रहते कांग्रेस के हिन्दू विरोधी चरित्र में कोई बदलाव नहीं आयेगा। अब ऐसे में यदि राहुल गाँधी स्वयं को दत्तात्रेय गोत्र में जन्में जनेऊधारी पंडित के रूप में प्रदर्शित करते हैं तो भी हिन्दू विश्वास नहीं कर रहे।

दरअसल, सोनिया गांधी के लम्बे कार्यकाल ने कांग्रेस की मूल भावना और चरित्र को निस्तेज कर दिया है। जन नेता पार्टी में हाशिये पर पड़े हैं और भारत विरोधी वामपंथी षड्यंत्रकारी सोनिया व राहुल के सलाहकार बन चुके हैं। कभी एक बेहद मजबूत संगठन रही कांग्रेस को सोनिया गांधी के संकीर्ण सांप्रदायिक विचारों ने बेहद कमजोर व संकुचित कर दिया है। कांग्रेस का पूर्णरूपेण अहिन्दूकरण हो चुका है और इसकी 'घर वापसी' नेहरू माइनो परिवार के रहते नहीं हो सकती।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+