Pakistan: पाकिस्तान को क्यों सता रहा है भारत के हमले का डर?

भारत में अगले साल आम चुनाव होने वाले हैं। मोदी सरकार घरेलू स्तर पर विरोधियों से चुनावी लड़ाई जीतने की रणनीति बनाने में जुटी है, लेकिन दिल्ली से सैकड़ों मील दूर बैठे पाकिस्तान के हुक्ममरानों के मन में यह आशंका बैठी है कि कहीं फिर से भारत उन पर 2019 की तरह कोई कार्रवाई ना कर दे।

हालांकि उनके उस डर का कोई आधार नहीं है, फिर भी वे अपने यहां दहशतगर्दों की बेलगाम कार्रवाइयों से सकते में हैं और यह मानते हैं कि किसी दिन किसी आतंकवादी संगठन द्वारा भारत के खिलाफ कोई ऑपरेशन हुआ तो भारत की गाज पूरे पाकिस्तान पर भी गिर सकती है।

Why is the fear of Indian attack troubling Pakistan?

इसीलिए वहां के लेखक और एक्सपर्ट पाकिस्तान के मियांवाली वायु सेना बेस पर कुछ दिन पहले हुए हमले को, जिसमें पाकिस्तान के 17 सैनिक मारे गए, रॉ और टीटीपी की कार्यवाई बता रहे हैं। 10 नवंबर को लाहौर से प्रकाशित अख़बार पाकिस्तान टुडे लिखता है कि "भारत की रॉ और तहरीक ए तालिबान की भागीदारी की कई मौकों पर पुष्टि की गई है। भारत हमेशा से पाकिस्तान को स्वीकार करने में अनिच्छा दिखाता रहा है और लगातार अस्थिर करने वाली गतिविधियाँ चलाता है। बलूचिस्तान में उग्रवादी समूहों के लिए भारत का हस्तक्षेप और समर्थन जगजाहिर है। जौहर टाउन बम विस्फोट में रॉ की संलिप्तता स्थापित हो चुकी है।" ऐसे में पाकिस्तान को डर है कि भारत पाकिस्तान पर सीधा हमला भी कर सकता है।

5 नवंबर को रक्षा एक्सपर्ट एजाज़ हैदर ने डॉन अख़बार में एक लेख के जरिए पाकिस्तान के डर का विस्तृत वर्णन किया है। लेख में कहा गया है कि "रूस-यूक्रेन युद्ध और अब गाजा में चल रहे भीषण संघर्ष के कारण दुनिया का ध्यान काफी हद तक दक्षिण एशिया से हट गया है। लेकिन यहां, भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी संवाद के अभाव में इस क्षेत्र को बेहद खतरनाक संकटों के प्रति और संवेदनहीन बना दिया गया है। भारत में घरेलू घटनाक्रमों से स्थिति और भी जटिल हो गई है, जहां पिछले नौ वर्षों से एक दक्षिणपंथी सरकार का शासन है, जिसकी न केवल 2024 के चुनाव जीतने पर नजर है, बल्कि पाकिस्तान के खिलाफ आक्रामक इरादे के अपने बयानों के साथ रिकॉर्ड पर है।"

लेख में आगे कहा गया है कि "भारत ने, अपनी घोषणाओं के अनुरूप 2016 में पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक किया और फिर 2019 में पाकिस्तान में एक लक्ष्य पर बमबारी करने के लिए हवाई हमले का इस्तेमाल किया। 2019 में भारतीय हमले के कारण पाकिस्तान की हवाई प्रतिक्रिया हुई, जो 1971 के युद्ध के बाद पहली थी। हवाई लड़ाई में पाकिस्तान वायु सेना (पीएएफ) ने दो भारतीय लड़ाकू विमानों को मार गिराया और एक पायलट को पकड़ लिया। इस घटना के बाद भारत की ओर से तीखी बयानबाजी शुरू हो गई, जिसमें पाकिस्तान में लक्ष्यों पर मिसाइलें दागने की धमकी दी गई। स्थिति तब शांत हुई जब पाकिस्तान ने भारतीय मिग के पायलट को लौटा दिया। तापमान को नीचे लाने में अंतरराष्ट्रीय कूटनीति ने भी भूमिका निभाई। हालाँकि, भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, जो उस समय राष्ट्रीय चुनावों में जा रहे थे, ने इस प्रकरण का उपयोग अपने पूर्ण घरेलू लाभ के लिए किया, बड़ी जीत हासिल की और सत्ता में वापसी की।"

एजाज हैदर लिखते हैं कि "एक बार फिर 2024 में भारत के चुनावों के बीच अलग-अलग कारक एक विशेष रूप से खतरनाक समय की ओर इशारा करते हैं। भारत का अपने परमाणु शस्त्रागार का विकास और आधुनिकीकरण और पाकिस्तान व चीन दोनों के प्रति भाजपा के शत्रुतापूर्ण रवैये को देखते हुए पाकिस्तान की प्रतिक्रिया क्या होनी चाहिए?" हैदर के अनुसार भले ही भारत अपने मिसाइल विकास और आधुनिकीकरण के लिए चीन के खतरे को प्राथमिक कारण बताता रहा है। यह इस तथ्य के बावजूद है कि इसकी अधिकांश सैन्य तैनाती, जिसे 'ऑर्डर ऑफ बैटल' कहा जाता है, पाकिस्तान केंद्रित बनी हुई है। भारत की कम से मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें और क्रूज़ मिसाइलें, उनकी रेंज के हिसाब से, पाकिस्तान-स्पेसिफिक ही हैं। अग्नि V, निर्माणाधीन अग्नि VI एमआईआरवी और के-4 को चीन के विरुद्ध तैनात किया जा सकता है।

पाकिस्तान के पूर्व राजनयिक और डिफेन्स एक्सपर्ट जाविद हुसैन ने कुछ महीने पहले लिखा था कि पिछले तीन दशकों में तीव्र आर्थिक वृद्धि और मजबूत सैन्य निर्माण ने भारत को क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख स्थान पर पहुंचा दिया है, जिससे यह देश आने वाले वर्षों में 'महान शक्ति' का दर्जा पाने का एक मजबूत दावेदार बन गया है। भारत की तेजी से बढ़ती आर्थिक ताकत ने उसे अपने सैन्य खर्च को तेज गति से बढ़ाने में सक्षम बना दिया है।

सशस्त्र संघर्ष के विभिन्न पहलुओं को देखने वाले एक स्वतंत्र शोध संस्थान 'सिपरी' के अनुसार, 2022 में भारत का सैन्य खर्च 81.4 अरब डॉलर होने का अनुमान लगाया गया था, जो विश्व स्तर पर चौथे स्थान पर है, जबकि 2023-24 के आधिकारिक अनुमान के अनुसार, पाकिस्तान का सैन्य खर्च केवल 8 बिलियन डॉलर होने का अनुमान है। भारत की अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ इसकी तेजी से विकसित हो रही रणनीतिक साझेदारी ने इसके सैन्य वजन को बढ़ा दिया है, जिससे दक्षिण एशिया में रणनीतिक संतुलन बिगड़ गया है। इससे पाकिस्तान को नुकसान हो रहा है। यदि कोई पाकिस्तान के आंतरिक, क्षेत्रीय और वैश्विक लक्ष्यों और नीतियों में खतरनाक रुझानों पर विचार करता है तो भारत पाकिस्तान की सुरक्षा और आर्थिक भलाई के लिए एक स्थायी खतरा है।

ग्लोबल कॉन्फ्लिक्ट ट्रैकर का भी कहना है कि मई 2023 में भारत में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों ने कश्मीर पर तीखी नोकझोंक की, जिससे संबंधों में सुधार का अवसर जाया हो गया। इसके अलावा, 2023 की शुरुआत में इमरान खान के खिलाफ पाकिस्तानी सेना की कार्रवाइयों ने चिंताएं बढ़ा दी हैं कि पाकिस्तानी राजनीतिक उथल-पुथल भारतीय कट्टरपंथियों के तर्कों को बढ़ावा देगी और शांति में बाधा बनेगी।

हालांकि यह स्थापित तथ्य हो चुका है कि पाकिस्तान अब भारत से आमने सामने की लड़ाई करने की हैसियत में नहीं है। ऐसे में वह आतंकवादियों को प्रॉक्सी बनाकर भेजता रहेगा और भारत के साथ युद्ध की आशंका की बात भी करता रहेगा। इसी से उसके यहां की जनता को मूर्ख बनाया जा सकता है और यह करने में पाकिस्तान के हुक्मरान सबसे आगे रहे हैं।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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