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AI and India: एआई से जब संसार सहमा हुआ है तो भारत में स्वागत क्यों?

Open AI के सीईओ सैम ऑल्‍टमैन ने शुक्रवार को PM मोदी से मुलाकात की है। जब अमेरिका व यूरोप एआई को नियंत्रित करने की योजना बना रहे हैं तब भारत ने ऑल्टमैन को खुले बाजार और असीमित संभावना का आश्वासन क्यों दिया है?

why india welcome artificial intelligence Open AI CEO Sam Altman met PM Modi

AI and India: सैम ऑल्टमैन एक विशुद्ध कारोबारी हैं। उनका काम है अपने व्‍यावसायिक हितों की सुरक्षा करना। इस हफ्ते भारत सहित आधा दर्जन देशों की उनकी यात्रा के पीछे कोई विश्व दर्शन की चाह नहीं है। इसके पीछे उनका मकसद ज्‍यादा अनुकूल और ज्‍यादा संभावनाओं भरी बिजनेस एवेन्‍यूज की तलाश है। उनकी इस यात्रा में शामिल छह देशों के नाम देखिए, आपको चयन के मानकों का अंदाजा लगाने में कोई मुश्किल नहीं होगी। ये देश हैं- भारत, इजराइल, साउथ कोरिया, संयुक्‍त अरब अमीरात, जॉर्डन और कतर।

इनमें पहले तीन देश उन पचास देशों में शामिल हैं, जहॉं ऑल्‍टमैन की कंपनी ओपेन एआई का बनाया चैट जीपीटी यूजर्स के लिए उपलब्‍ध है। यहॉं उसे सामाजिक या राजनीतिक स्‍तर पर किसी चुनौती या विरोध का सामना भी नहीं करना पड़ रहा है। बाकी तीन देशों में भी उनके लिए विस्‍तार की काफी संभावनाएं हैं।

ऑल्‍टमैन की इस वैश्विक यात्रा में भारत एक सबसे महत्‍वपूर्ण पड़ाव है। अमेरिका के बाद, चैटजीपीटी के सबसे ज्‍यादा यूजर अगर कहीं हैं तो वह भारत है। यूएस में इसके 15.22 % यूजर हैं और भारत में 6.32%। यह फर्क देखने में बड़ा है। लेकिन जिस तरह अमेरिका में चैट जीपीटी का विरोध बढ़ता जा रहा है, फर्ज कीजिए कि अगर वहॉं से ऑल्‍टमैन को अपना कारोबार समेटना पड़ गया तो उसके सबसे ज्‍यादा ग्राहक कहॉं होंगे? निश्‍चय ही भारत में।

यह आशंका इसलिए बेमानी नहीं है कि कुछ ही हफ्ते पहले, अमेरिका की वाइस प्रेसिडेंट कमला हैरिस ऑल्‍टमैन और उनके दूसरे हमपेशाओं को व्‍हाइट हाउस तलब कर चेतावनी दे चुकी हैं। हैरिस ने कहा था कि वे एआई के संभावित खतरों को सीमित करें। यूरोप में भी चैटजीपीटी और एआई के खिलाफ माहौल बन रहा है। इसे हाइरिस्‍क घोषित कर कड़े कानून बनाने की तैयारियॉं चल रही हैं।

ये कानून कितने सख्‍त हो सकते हैं, इसका अंदाज ऑल्‍टमैन की उस प्रतिक्रिया से लगाया जा सकता है, जिसमें उन्‍होंने यूरोपीयन यूनियन के देशों से अपना कारोबार समेटने की बात कही थी। अब बचा भारत, जो आने वाले समय में ओपेन एआई के सबसे बड़े यूजर बेस की मेजबानी करने वाला देश बन सकता है। इसलिए ओपेन एआई के सीईओ को हमसे बहुत आशाएं हैं।

भारत में ऑल्‍टमैन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। जिस प्रकार की जोशीली प्रतिक्रिया उन्‍हें हमारे यहॉं से मिली, उससे साफ है कि न उनके अनुमान गलत थे और न उम्‍मीदें गलत साबित होने वाली हैं। इस मुलाकात में दोनों के बीच भारत में एआई के भविष्‍य और समस्‍याओं पर चर्चा हुई। अपने ट्विटर पेज पर इस बारे में जानकारी देते हुए ऑल्‍टमैन ने इसे एक अच्‍छी मुलाकात बताया। ऑल्‍टमैन ने उन्‍हें बताया कि भारत एआई से कैसे लाभान्वित हो सकता है। उन्‍होंने अपनी पोस्‍ट में कहा है कि "प्रधानमंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर काफी उत्साह दिखाया और अपनी चिंताएं भी सामने रखीं।" मुलाकात को लेकर संतुष्टि प्रदर्शित करते हुए ऑल्टमैन ने इसे बेहद खास और दिलचस्‍प बताया है।

यह उत्‍साह प्रधानमंत्री के इस ट्वीट से भी प्रदर्शित होता है, जो उन्‍होंने ऑल्टमैन से मुलाकात के बाद किया। उन्‍होंने लिखा है कि "भारत के तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र में, विशेष रूप से युवाओं के बीच एआई की क्षमता बहुत बड़ी है।" पीएम मोदी ने यह भी लिखा कि "हम उन सभी सहयोगों का स्वागत करते हैं जो हमारे नागरिकों को सशक्त बनाने के लिए हमारे डिजिटल परिवर्तन को गति दे सकते हैं।"

दरअसल भारत सरकार का रुख शुरू से ही एआई को लेकर काफी सकारात्‍मक रहा है। फरवरी माह में सरकार ने कहा था कि भारत में एआई ने चार लाख से अधिक प्रोफेशनलों को रोजगार दे रखा है और इस सेक्‍टर में सालाना 20 से 25 प्रतिशत विकास दर रहने का अनुमान है। उम्‍मीद जताई गई थी कि वर्ष 2035 तक भारत की अर्थव्‍यवस्‍था में एआई 957 अरब डॉलर का योगदान कर सकती है। यानी पॉंच खरब डॉलर की अर्थव्‍यवस्‍था के लक्ष्‍य को हासिल करने में बीस फीसदी हिस्‍सेदारी तो एआई की रहने वाली है। ऐसे में भारत कैसे एआई की उपेक्षा कर सकता है?

पूरी दुनिया में एआई के खतरों के खिलाफ माहौल है। रोष व्‍यक्‍त किया जा रहा है कि इसकी वजह से अगले पॉंच सालों में करीब डेढ़ करोड़ लोग अपनी नौकरियॉं गंवाने जा रहे हैं। खुद सैम ऑल्‍टमैन भी इससे इंकार नहीं करते। गुरुवार को जब एक कार्यक्रम में उनसे पूछा गया कि क्‍या एआई बड़े पैमाने पर नौकरियॉं खत्‍म करने जा रही है, तो उनका जवाब बड़ा कूटनीतिक था। लेकिन, उन्‍होंने यह स्‍वीकार करने में कतई संकोच नहीं किया कि इसकी वजह से नई नौकरियॉं जरूर पैदा होंगी, लेकिन कुछ पुरानी नौकरियॉं तेजी से खत्‍म हो सकती हैं।

ऑल्टमैन की इस स्वीकारोक्ति के बावजूद, हम यह सिद्ध करने पर आमादा है कि एआई की वजह से नौकरियों पर कोई खतरा नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी और ऑल्‍टमैन की मुलाकात के बाद, एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि फिलहाल एआई की वजह से नौकरियों को बहुत ज्‍यादा खतरा नहीं है। उनका कहना था कि एआई ने पिछले कुछ सालों में एक करोड़ नौकरियों का सृजन किया है। अभी ऐसी कोई संभावना नहीं है कि यह इतनी बुद्धिमान हो जाए कि अगले पॉंच साल बाद यह कुछ क्षेत्रों में मानव श्रम को रिप्‍लेस कर दे। उनका दावा है कि इससे लोग अधिक सक्षम होंगे। यह जरूर हो सकता है कि आने वाले वर्षों में कुछ दोहराव वाली या रूटीन जॉब्‍स पर इसका असर पड़े, लेकिन आज जो स्थिति है, उसमें ऐसा होने की संभावना न्‍यूनतम है।

यह हमारी अनभिज्ञता है, या जानबूझकर वास्‍तविकता को नजरअंदाज करने की मजबूरी, पर हम उस सच्‍चाई से मुंह फेर रहे हैं, जिसने पूरी दुनिया को हलकान कर रखा है। एआई ने सिर्फ नौकरियॉं ही नहीं, बल्कि समस्‍त मानवजाति के सामने अस्तित्‍व का प्रश्‍न खड़ा कर दिया है। अभी तो यह अपनी शैशव अवस्‍था में है और एआई एक्‍सपर्ट कहने लगे हैं कि इसे नियंत्रित नहीं किया जा सकता। और जिस तरह से यह खुद को निरंतर और तेजी से विकसित कर रहा है, उसे देखकर वह दिन बहुत ज्‍यादा दूर नहीं लगता, जब हम इसके नियंत्रण में आ जाएंगे।

ओपेन एआई सहित कई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रोग्राम डेवलपर कंपनियॉं एक ही लक्ष्‍य पर काम कर रही हैं। वह है, ऐसी मशीनें बनाना, जो इंसान के मुकाबले ज्‍यादा बेहतर और तेज गति से सोचने व सीखने में सक्षम हों। भविष्‍य में इस बात की भी बहुत संभावना है कि ऐसी मशीनें विकसित हो जाएं, जो बिना मानवीय निर्देशों के खुद को सुधार सकें, बदल सकें। इसके बाद उनमें मानव को खत्‍म करने की क्षमता भी आ सकती है।

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    आज इन बातों को लेकर सिर्फ आशंका ही जताई जा सकती है लेकिन भविष्य की इन आशंकाओं को बिल्कुल खारिज भी नहीं किया जा सकता। मशीनों के विकास का जो क्रम है उसके साथ आर्टिफिशल इन्टेलिजेन्स का प्रयोग सीधे सीधे मानव श्रम को महत्वहीन करने का उपाय है। चीन और भारत में ऑटोमेशन के नाम पर इसका प्रयोग शुरु हो भी चुका है। फिर भी एक ओर रोजगार का वादा और दूसरी ओर रोजगार खत्म करने का इरादा लेकर अगर भारत सरकार काम कर रही है तो कोई क्या कर सकता है?

    (इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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