Reconstruction of Ayodhya: निर्माण से पहले विध्वंस की प्रसव पीड़ा से गुजरती अयोध्या
अयोध्या इस समय निर्माण से पहले होने वाले विध्वंस की भूमि बन गयी है। सड़क के दोनों तरफ पसरा मलबा, धूल का गुब्बार, घरों-दुकानों पर हथौड़ा धौंकते सैकड़ों मजदूरों को देखकर ऐसा लगता है, जैसे अयोध्या में कोई युद्ध चल रहा है।

Reconstruction of Ayodhya: त्रेता युग की अयोध्या का जैसा वर्णन रामकथाओं में मिलता है, आज की अयोध्या में उसके लक्षण नहीं दिखते। 2019 से पहले अयोध्या धूल, गुबार और गरीबी में लिपटा एक ऐसा कस्बा था जो सबसे ज्यादा किसी को जानता था तो उसका नाम था कर्फ्यू। रामभक्तों से ज्यादा यहां पुलिस और सुरक्षा बल के जवान मौजूद रहते थे। लेकिन 2019 के बाद से अयोध्या परिवर्तन की प्रसव पीड़ा से गुजर रही है।
नवंबर 2019 में श्रीराम जन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सिर्फ राम मंदिर का निर्माण ही नहीं चल रहा। इस समय पूरी अयोध्या का नये सिरे से निर्माण हो रहा है। रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, बस अड्डा, सड़कें, नया शहर, नये चौक चौराहे सबका नवनिर्माण हो रहा है। लखनऊ से लेकर अयोध्या नगर निगम तक सब मिलकर 2024 तक अयोध्या के बुनियादी ढांचे में बदलाव के लिए प्रयास कर रहे हैं। 2024 में मकर संक्रांति के मौके पर जब श्री राम मंदिर का पहला चरण पूरा हो जाएगा तब अयोध्या के नवनिर्माण का भी पहला चरण पूरा हो जाएगा।
इसके लिए सबसे प्रमुख है राम मंदिर तक जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों का विस्तार। इस समय इन मार्गों को चौड़ा करने के लिए दोनों ओर के मकान और दुकानें तोड़ी जा रही हैं। मानों अयोध्या के सीने से गर्द, गुबार और गरीबी को हटाकर एक नयी अयोध्या के निर्माण का रास्ता साफ किया जा रहा है। इस समय अगर आप अयोध्या पहुंचेंगे तो पायेंगे कि जैसे किसी युद्ध की जमीन पर आ पहुंचे हों। सड़क के दोनों तरफ पसरा मलबा, धूल का गुब्बार और घरों-दुकानों के सीने पर हथौड़ा धौंकते सैकड़ों मजदूरों के सधे अंदाज से ऐसा लगता है, जैसे अयोध्या में कोई युद्ध ही चल रहा हो।
हां, यह युद्ध ही तो है। अयोध्या के नवनिर्माण का युद्ध। इस युद्ध में कुछ योद्धा स्वेच्छा से शामिल हैं, तो कुछ दबाव में। थोड़ा विस्थापन का दर्द है, तो तनिक डर जीविकोपार्जन पर मंडराते खतरे का है। किसी को भविष्य की चिंता है, तो कोई बदलाव से खुश है। कोई बेहतर भविष्य की संभावनाओं से प्रसन्न है, तो किसी को विकास की नई कोशिश सुनहरे कल की उम्मीद बंधा रही है। इस समय अयोध्या में निर्माण का युद्ध कई मोर्चों पर चल रहा है, जिसमें सबके अपने-अपने सुख और दुख हैं। सबकी अपनी-अपनी आस्था और व्याख्या है।
रामभक्तों की मस्ती, हनुमानभक्तों का जयकारा, विध्वंस, निर्माण, शोर, धूल-गुब्बार, जाम, डायवर्जन, अस्त-व्यस्त भीड़, बेतरतीब दौड़ते वाहन। फिलहाल यही वर्तमान पहचान है अयोध्या की। ऐसा लग रहा है कि पुरानी अयोध्या उस प्रसव पीड़ा से गुजर रही है, जिसके बाद नयी अयोध्या का जन्म होना है। अभिमन्यु के हाथों बृहद्रथ की मौत के बाद उजड़ सी गई अयोध्या को योगी सरकार उसी तरह संवारने-सजाने में लगी है।
सन 1528 से मंदिर-मस्जिद विवाद के अनिश्चय में जूझती अयोध्या और अयोध्यावासियों ने इससे अधिक मुश्किल दिन देखे हैं। आजाद भारत में पुलिस के बूटों का खौफ, कारसेवकों की लाशों से पटी गलियां और खून से सराबोर सरयू के पानी को भी इसी अयोध्या ने देखा है। आजाद भारत में सबसे ज्यादा कर्फ्यू और पुलिस का आतंक देखने की पीड़ा भी अयोध्या के हिस्से में है। श्रद्धालुओं-पर्यटकों की रामनगरी से विरक्ति, पलायन और भुखमरी भी अयोध्या ने देख रखी है, लेकिन अब उम्मीद की नई सुबह उगने को तैयार है।

पांच सौ सालों से चली आ रही अनिश्चितता का बोझ अयोध्या के सीने से हट चुका है। एक तरफ भव्य राम मंदिर का निर्माण हो रहा है तो दूसरी तरफ दिव्य अयोध्या आकार ले रही है। सड़क चौड़ीकरण के चलते अपने घर के सामने का हिस्सा तुड़वा रहे अजय कुमार गुप्ता कहते हैं, ''अयोध्या का विकास हो यह सभी चाह रहे हैं, लेकिन इसकी कीमत भी हमें चुकानी पड़ रही है। बीते तीन-चार दशक में जिस हालात में रहे हैं, उसके मुकाबले इस स्थिति को हम बेहतर मानते हैं। हमारे दिन फिरेंगे ऐसी उम्मीद है।''
बगल में अपनी दुकान तुड़वा रहे राजकुमार गुप्ता कहते हैं, ''हमें सरकार से सहायता राशि के रूप में मात्र एक लाख रुपये मिले हैं, पर हम मानकर चल रहे हैं कि मंदिर निर्माण पूरा हो जायेगा और श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ेगी तो हमारी मुश्किल आसान होगी।'' अयोध्यावासियों की एक दिक्कत यह है कि पीढि़यों से सड़क किनारे दुकान और मकान बनाकर रह रहे कई परिवारों के पास मालिकाना हक से जुड़े राजस्व के कागज नहीं है। ऐसे परिवारों को मुआवजा देने में दिक्कत आ रही है।
कुछ परिवार मंदिर और मठों की दुकानों में दो से तीन पीढ़ी से किरायेदार हैं। कुछ के विवाद न्यायालय में चल रहे हैं। कुछ लोगों के पास जमीन के कागजात नहीं हैं। कुछ लोगों ने नजूल की जमीन पर कब्जा कर मकान-दुकान बना रखे हैं। सरकारी नियम से ऐसे लोग मुआवजा के हकदार नहीं हैं, लेकिन योगी सरकार आरएनआर फंड के जरिए दुकानदारों को पुनर्वास सहायता राशि दे रही है। एक मानक तय किया गया है। मुआवजा भवन की चौड़ाई, गहराई और उसकी आयु के आधार पर न्यूनतम एक लाख से लेकर अधिकतम दस लाख तक दिया जा रहा है।
अयोध्या के मंडलायुक्त गौरव दयाल कहते हैं, ''प्रशासन के लिये सबसे बड़ी चुनौती सआदतगंज से नयाघाट तक की लगभग 13 किलोमीटर सड़क के चौड़ीकरण की है। ज्यादातर परिवारों ने स्वेच्छा से अपनी जमीनें सरकार को दी हैं, जहां मामला फंसा हुआ है उसे जल्द से जल्द निपटाने का प्रयास प्रशासन कर रहा है। कोई बड़ा विवाद सामने नहीं आया है, इसलिये मात्र एक महीने में प्रशासन ने चौड़ीकरण का मामला सुलझा लिया है। नियमानुसार सभी को मुआवजा दिया जा रहा है, जो इस केटेगरी में नहीं हैं, उसे पुनर्वास सहायता राशि दी जा रही है।''
दरअसल, राम मंदिर एवं हनुमानगढ़ी तक पहुंचने के लिये राज्य सरकार सआदतगंज से नयाघाट तक राम पथ, श्रृंगार हाट से राम जन्मभूमि तक भक्ति पथ तथा सुग्रीव किला मार्ग से राम जन्मभूमि तक धर्म पथ का चौड़ीकरण करवा रही है, जिसमें मकान-दुकान अधिग्रहित हो रहे हैं। स्थानीय सांसद लल्लू सिंह कहते हैं, ''अयोध्या के नवनिर्माण के चलते लोगों को कुछ परेशानी हो रही है, लेकिन सरकार उनके साथ खड़ी है। पर्याप्त मुआवजा दे रही है। विकास के क्रम में 7 आरओबी, रेलवे स्टेशन तथा एयरपोर्ट का काम आखिरी चरण में है।''
हनुमानगढ़ी के संजय यादव सवाल करते हैं, ''सरकार विकास के नाम पर हमारी दुकान ले रही है, लेकिन जहां पुनर्वास के लिये जमीन दी जायेगी क्या वहां तक श्रद्धालु पहुंच पायेंगे?'' जाहिर है कि कुछ नागरिकों की चिंता भविष्य को लेकर है। लल्लू सिंह कहते हैं, ''मंदिर का निर्माण पूरा हो जायेगा तब श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भीड़ बढ़ेगी। निश्चित रूप से अयोध्या के सभी लोगों को फायदा मिलेगा। रोजी-रोजगार में बढ़ोतरी होगी। प्रदेश सरकार इसी को ध्यान में रखकर काम कर रही है।''
हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास कहते हैं, ''सरकार के इस निर्णय से वोटों का नुकसान तो होगा, लेकिन अयोध्या के विकास के लिये योगी आदित्यनाथ ने जो इच्छा दिखाई है, उसका असर भविष्य में दिखेगा। यहां के लोग इस बात को समझ रहे हैं, इसलिये बनारस में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तरह विरोध नहीं है। अस्सी फीसदी लोग अयोध्या के विकास से खुश हैं।'' योगी ने प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दे रखा है कि योजना ऐसी तैयार की जाए कि श्रद्धालुओं को पीक सीजन में पांच किमी और सामान्य सीजन में दो किमी से ज्यादा ना चलना पड़े।
योगी आदित्यनाथ अयोध्या के विकास को लेकर इतने प्रतिबद्ध हैं कि रामनगरी के विकास की समीक्षा वह स्वयं कर रहे हैं। दीपोत्सव जैसे कार्यक्रमों के जरिये उन्होंने अयोध्या की नई पहचान स्थापित की है। वरिष्ठ पत्रकार मनोज श्रीवास्तव कहते हैं, ''पांच सौ सालों के अभिशाप से मुक्त होने के बाद अयोध्या का भाग्योदय हो रहा है। योगी आदित्यनाथ श्रद्धा से अयोध्या को संवार रहे हैं। अयोध्या ने दुख की ढेर सारी घड़ियां देखी हैं, अब उसके सुख का समय आ रहा है। नियति ने योगी को अयोध्या का विश्वकर्मा बनाकर भेजा है।''
गौरव दयाल कहते हैं, ''मुख्यमंत्री अयोध्या को एक आदर्श धर्मनगरी बनाने को लेकर पूरी तरह से वचनबद्ध हैं। अयोध्या को दिव्य एवं भव्य बनाने के लिये समस्त निर्माण कार्य भविष्य की जरूरतों एवं श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को ध्यान में रखकर कराया जा रहा है।'' प्रशासन ने राम पथ की खुबसूरती बढ़ाने के लिये सभी मकानों का रंग एवं डिजाइन एक तरीके का करने के लिये एक योजना तैयार की है। अयोध्या में छह तरफ से आने वाली सड़कों का चौड़ीकरण एवं सभी पर छह बड़े गेट, पार्किंग तथा फूड कोर्ट भी बनने वाले हैं।
स्वाभाविक है आज अयोध्या जिस विध्वंस की साक्षी बन रही है, उसके बाद का निर्माण बहुत शानदार होने जा रहा है। इस विध्वंस के गर्भ से जिस नव्य अयोध्या का जन्म होगा वह अयोध्या एक आधुनिक तीर्थ नगरी के रूप में पुन: सबको आकर्षित करेगी।
यह भी पढ़ें: हर राम नवमी पर राम लला पर पड़ेगी सूरज की किरणें, कुछ इस तरह से डिजाइन किया गया राम मंदिर का गर्भगृह
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
-
'मैं कुछ गलत नहीं करती', 54 साल की Hema का पब वीडियो वायरल, पुलिस की रेड में एक्ट्रेस को ये क्या हुआ? -
Raghav Chadha:'परिणीति ने खत्म किया पति का करियर',अभिनेत्री पर क्यों भड़के लोग? क्या है PM मटेरियल वाली बात? -
Ajay Devgn की जीप के सामने आया बच्चा, 15 Minute तक बीच सड़क पर 25 लोगों ने जमकर पीटा, क्या हुई बात? -
US Pilot कौन है, जिसे F-15E विमान मार गिराने के बाद ईरान की IRGC ने दबोचा? पेंटागन चुप क्यों? -
LPG Cylinder Price Today: आज बदल गए घरेलू गैस के दाम? सिलेंडर बुक करने से पहले चेक करें नई रेट लिस्ट -
BJP लिस्ट से बाहर ‘सिंघम’ Annamalai! क्यों नहीं मिला टिकट? ‘साउथ फेस’ गायब होने के पीछे ये है अंदर की कहानी -
Gold Rate Today: गुड फ्राइडे पर सोने में बड़ी गिरावट! ₹4245 गिरे दाम, दिल्ली से पटना तक ये है 22K, 18K के रेट -
Gold Rate Today: सोना लगातार हो रहा सस्ता, 3500 गिरे दाम, क्या खरीदारी का सही मौका? 22K-18K गोल्ड के नए रेट -
समोसा से पैटरनिटी लीव तक—क्या यही वजह बनी राघव चड्ढा को राज्यसभा में ना बोलने देने की! 7 मुद्दे चर्चा में -
Seema Haider Kids: सीमा हैदर ने छठी औलाद का रखा ऐसा नाम, पाकिस्तान को लगेगी मिर्ची! 5 बच्चों की क्या पहचान? -
Hormuz Strategic Plan: होर्मुज का खेल खत्म! भारत के हाथ लगा वो 'जादुई रूट', तेल -LPG की किल्लते होंगी दूर -
'जो डर गया, समझो मर गया'- Raghav Chadha को लेकर AAP ने खोला मोर्चा, आतिशी-सौरभ भारद्वाज ने गिनवाईं गलतियां












Click it and Unblock the Notifications