UP Religious Economy: धर्मम् शरण गच्छामि, अर्थं शरणम् गच्छामि

UP Religious Economy: चाणक्य नीति में कहा गया है कि 'सुखस्य मूलं धर्मः। धर्मस्य मूलं अर्थः। अर्थस्य मूलं राज्यं।' अर्थात सुख का मूल धर्म है। धर्म का मूल अर्थ है और अर्थ का मूल राज्य है। उत्तर प्रदेश में चाणक्य की यह नीति पूरी तरह से चरितार्थ होती दिख रही है।

2017 में जब से राज्य में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी है तब से सुख के मूल धर्म को ही प्रमुखता से स्थापित करने का प्रयास ही नहीं हो रहा बल्कि धर्म के मूल अर्थ को भी प्राप्त करने का प्रयास हो रहा है। 19 फरवरी को उत्तर प्रदेश ने एकसाथ 10 लाख करोड़ की परियोजनाओं का भूमि पूजन करके अपनी 'बीमारू राज्य' और 'काऊ बेल्ट' वाली छवि को सफलता से बदलने का प्रयास किया है।

UP Religious Economy

आश्चर्य की बात तो यह है कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेसियों, समाजवादियों और बहुजनवादियों के शासन में जिस धर्म को राज्य से दूर रखा गया, वही धर्म अब उत्तर प्रदेश की आर्थिक समृद्धि का वाहक बन गया है। केन्द्र में 2014 में नरेन्द्र मोदी की सरकार बनने और उसके बाद राज्य में 2017 में योगी के मुख्यमंत्री बनने के बाद धर्म से दूरी के बजाय धर्म से नजदीकी दिखाने की कोशिश की गयी।

यह नजदीकी ऊपरी तौर पर तो राजनीतिक ही लग रही थी लेकिन पहले काशी विश्वनाथ कॉरीडोर और अब अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को धर्म का पंख लग गया है। काशी में सिर्फ काशी विश्वनाथ कॉरीडोर ही नहीं बना। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संसदीय क्षेत्र होने के कारण काशी की आधारभूत संरचना में भारी भरकम निवेश किया गया।

बिजली, सड़कें, गलियां, घाट, पोखरे, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट सबको हजारों करोड़ रूपये के निवेश से निखारा गया। बाबा विश्वनाथ में आस्था के कारण तीर्थयात्री और पर्यटक तो पहले भी कम नहीं आते थे लेकिन काशी में भारी भरकम पूंजी निवेश ने उसे एक आकर्षक पर्यटन नगरी के रूप में विकसित किया है।

मोदी ने काशी को क्योटो बनाने का वादा किया था, और बहुत हद तक वो इसमें सफल भी रहे हैं। हस्तकला संकुल, इंटरनेशनल कन्वेशन सेन्टर सहित अंतरराष्ट्रीय मानक की सुविधाएं विकसित होने से काशी की कला और संवाद परंपरा को अंतरराष्ट्रीय मंच मिला है। मोदी शुरु से ही काशी के औद्योगिकीकरण से अधिक उसके पर्यटन को बढावा देने के पक्षधर रहे हैं और देशी विदेशी पर्यटकों की बढती संख्या के रूप में उसका परिणाम भी अब दिखने लगा है।

इसी तरह अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण केवल धार्मिक और राजनीतिक रूप से ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के लिए आर्थिक रूप से भी वरदान साबित होने जा रहा है। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के साथ ही प्रापर्टी के बड़े कारोबारी और होटल व्यवसायी अयोध्या पहुंचने लगे हैं। 19 फरवरी को लखनऊ में निवेश के जिन प्रस्तावों पर मुहर लगी उनमें अकेले अयोध्या में 10 हजार करोड़ रूपये से अधिक के निवेश को मंजूरी मिली। इसमें लोढा ग्रुप द्वारा तीन हजार करोड़ रूपये की लागत से एक लक्जरी रेसिडेन्सियल सिटी बनाने का प्लान है तो कई बड़े होटल, रिसोर्ट खोलने का भी प्रस्ताव प्राप्त हुआ है।

इसी तरह काशी में 15 हजार करोड़ रूपये के पूंजी निवेश का भूमिपूजन हुआ जिसमें फाइव स्टार होटल से लेकर अन्य होटल और रिसोर्ट बनेंगे। लखनऊ के भूमि पूजन समारोह में जिन निवेशकों ने होटल, रिसोर्ट या रियलिटी सेक्टर में निवेश करने का वादा किया है उनमें सबसे अधिक काशी, अयोध्या, मथुरा और प्रयाग में ही निवेश का प्रस्ताव है। रियलिटी सेक्टर में निश्चित रूप से नोएडा सबसे आगे है लेकिन तीर्थक्षेत्रों में निवेशकों का उत्साह बताता है कि भारत में धार्मिक यात्राएं ही व्यापार की सबसे प्रबल संभावना पैदा करती हैं। यह बात पूंजी निवेशक अब अच्छे से समझने लगे हैं।

इसलिए यूपी की योगी सरकार ने अगर धार्मिक स्थलों के पुनर्विकास पर ध्यान दिया है तो इसका जबर्दस्त आर्थिक लाभ भी प्रदेश को होता दिखाई दे रहा है। 19 फरवरी के भूमि पूजन में प्रदेश के प्रमुख सात तीर्थस्थानों पर 86 हजार करोड़ रूपये का निवेश होने जा रहा है, जिनका भूमिपूजन किया गया। इसमें काशी में 15 हजार करोड़, मथुरा में 13,500 करोड़ और अयोध्या में लगभग 10 हजार करोड़ के प्रस्ताव मिला दें तो करीब 40 हजार करोड़ का निवेश इन्हीं तीन तीर्थस्थानों में होने जा रहा है। निश्चित रूप से यह निवेश इन तीनों तीर्थस्थानों को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन पटल पर मजबूत होने में मदद करेगा।

काशी, मथुरा, अयोध्या के अलावा प्रदेश की योगी सरकार ने अन्य प्रमुख तीर्थक्षेत्रों के विकास पर भी ध्यान दिया है। इसमें विंध्यांचल में कॉरीडोर का निर्माण लगभग अंतिम चरण में है। योगी सरकार मथुरा वृन्दावन कॉरीडोर पर भी काम कर रही है। देवीपाटन, नैमिषारण्य के साथ ही कुंभ नगरी प्रयाग में भी आधारभूत ढांचे के विकास पर निरंतर काम हो रहा है। अगले साल 2025 में प्रयाग में महाकुंभ होनेवाला है जिसे देखते हुए अभी से योगी सरकार ने तैयारी शुरु कर दी है। राज्य की धर्म से करीबी का परिणाम यह हुआ है कि हर तीर्थक्षेत्र में निवेशक पहुंच रहे हैं।

अभी तक प्रदेश सरकारों की ओर से ताजमहल को ही प्रमुखता से प्रचारित किया जाता था जिसका लाभ आगरा को मिला। लेकिन अब मथुरा, काशी, अयोध्या, प्रयाग, विन्धाचल, देवीपाटन, नैमिषारण्य, कुशीनगर, सारनाथ, चित्रकूट पर ध्यान देने से पर्यटकों में यहां जाने की उमंग भी पैदा हो रही है। इस साल के भूमिपूजन में काशी मथुरा अयोध्या के अलावा प्रयाग के लिए 9 हजार 600 करोड़, नैमिषारण्य (सीतापुर) के लिए 21 हजार करोड़, चित्रकूट के लिए 7 हजार करोड़ और कुशीनगर के लिए 1100 करोड़ के निवेश प्रस्ताव को मंजूरी मिली है।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया द्वारा पिछले महीने जनवरी में की गयी एक रिसर्च में बताया गया है कि 2028 तक यूपी की अर्थव्यवस्था 500 बिलियन डॉलर की हो जाएगी। यूपी की इस आर्थिक ताकत को बनाने में सबसे अधिक अगर कोई मदद करेगा तो वह धार्मिक पर्यटन ही होगा। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस साल 2024 के खत्म होने तक यूपी में धार्मिक पर्यटन से 4 लाख करोड़ का कारोबार होगा। इससे राज्य सरकार को राजस्व के रूप में 20 से 25 हजार करोड़ रूपये प्राप्त होगा।

एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट का अनुमान है कि आनेवाले चार पांच सालों में अयोध्या सबसे बड़ा तीर्थक्षेत्र बनकर उभरेगा जहां सालाना 5 करोड़ देशी विदेशी पर्यटक रामलला का दर्शन करने पहुंचेंगे। इस तरह अयोध्या भविष्य में आगरा को पीछे छोड़ प्रदेश का नंबर वन पर्यटन केन्द्र बन जाएगा। इसके अलावा काशी, मथुरा और प्रयागराज तो अपनी तरह से देशी विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करते ही हैं।

कहने का आशय यह कि जिन धर्मनगरियों को राजनीतिक रूप त्याज्य घोषित करके पूर्व की सरकारों ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को सुधारने का प्रयास किया था, वो पूरी तरह से गलत ही साबित हुए। मोदी और योगी ने प्रदेश की इस क्षमता को पहचाना और राजनीतिक रूप से मुखर होकर इन नगरों के विकास पर ध्यान दिया। धर्म की शरण में जाने से ही प्रदेश की आर्थिक तरक्की का रास्ता खुला है, यह अब खुली आंखों से दिख रहा है। काशी विश्वनाथ कॉरीडोर और अयोध्या में रामलला का मंदिर न केवल प्रदेश की राज्यव्यवस्था के लिए बल्कि अर्थव्यवस्था के लिए भी वरदान साबित हुआ है।

हां, इसके अलावा प्रदेश में औद्योगिक उत्पादन में भी बहुत सुधार हुआ है और आंकड़े बताते हैं कि 2022 में तमिलनाडु के बाद सबसे अधिक नये कारखाने यूपी में ही लगे हैं। इस बार के भूमिपूजन में भी निर्माण और उद्योग क्षेत्र में 2 लाख करोड़ के निवेश का शुभारंभ हुआ है। सौर उर्जा में एक लाख करोड़, आईटी में 90 हजार करोड़ और फूड प्रोसेसिंग में 60 हजार करोड़ के निवेश के साथ ही प्रदेश उद्योग के अन्य क्षेत्रों में भी आर्थिक प्रगति करते हुए बीमारू राज्य की छवि से बाहर निकल तेजी से प्रगति कर रहा है।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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