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Tobacco Addiction: नौजवानों की जिन्दगी बर्बाद करती तंबाकू

Tobacco Addiction: राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी सकारात्मक विचार और सधी जीवनशैली के सदैव समर्थक रहे। हर बुरी आदत से बचने की सीख उनके विचारों का हिस्सा रही है। हाल ही में बापू की स्मृति में ऐसे ही एक सरोकारी अभियान की शुरुआत की गई है। स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार ने देश को तंबाकू मुक्त करने के लिए नई पीढ़ी को सजग रहने का संदेश देने की मुहिम छेड़ी है। जिसके तहत (2 अक्टूबर) गांधी जयंती पर बच्चों को तंबाकू की लत से बचाने से लिए जागरूकता अभियान 'प्रॉमिस टू प्रोटेक्ट' शुरू किया गया है।

दरअसल, किसी भी बुरी लत के जाल में फँसने के बाद निकलना कठिन होता है। ऐसे में जरूरी है कि नई पीढ़ी को तंबाकू सेवन की बुरी आदत को लेकर समय रहते जागरूक किया जाए। साथ ही मौजूदा दौर की डिजिटल जीवनशैली में ऐसी किसी भी मुहिम की पहुंच बनाना भी आवश्यक है। 'प्रॉमिस टू प्रोटेक्ट' अभियान ऐसी कई बातों के चलते एक सधी हुई मुहिम कहा जा सकता है। यह दिलचस्प डिजिटल अभियान न केवल युवाओं और बच्चों को तंबाकू सेवन के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करने का उद्देश्य लिए है बल्कि नई पीढ़ी को तंबाकू से दूर रहने की प्रतिज्ञा दिलाने का सार्थक प्रयास भी है। साथ ही डिजिटल अभियान होने के चलते आज के युवाओं तक इस मुहिम की पहुँच भी आसान होगी।

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भारत का भविष्य सहेजने वाले इस देशव्यापी अभियान से 1,000 से अधिक शिक्षकों को जोड़ा जाएगा। इस मुहिम से जुड़कर श‍िक्षक विद्यार्थियों एवं युवाओं को तंबाकू की लत से बचाने की सजगता का पाठ पढ़ाते हुए अपने स्कूलों को तंबाकू मुक्त रखने के लिए बच्चों को इस बुरी लत से दूर रहने की प्रतिज्ञा भी दिलाएंगे। ज्ञात हो कि तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान दिशानिर्देशों का लक्ष्य शैक्षणिक संस्थानों के आसपास धूम्रपान मुक्त वातावरण बनाना भी है। यह नियमावली शैक्षणिक परिसरों में तंबाकू उत्पादों की बिक्री, विज्ञापन और उपयोग पर प्रतिबंध लगाने और स्वस्थ शिक्षण माहौल सुनिश्चित करने से जुड़ी है।

कुल मिलाकर 'प्रॉमिस टू प्रोटेक्ट' अभियान से जुड़े समस्त बिन्दु स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थानों के दिशानिर्देशों के अनुरूप ही है जो कि तंबाकू के हानिकारक प्रभावों को लेकर बच्चों और युवाओं को समय रहते चेताने और भावनात्मक रूप से मजबूत बनाने वाले हैं। ऐसे उत्पादों से सदा दूर रहने का वादा लेने वाले इस अभियान के माध्यम से स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा के प्रयासों में जुटा है।

विचारणीय है कि कम उम्र में ही तंबाकू के लती बन जाने वाले बच्चे अनगिनत स्वास्थ्य समस्याओं से भी घिर जाते हैं। ऐसे हालात उनके जीवन को ही नहीं मन को भी दिशाहीन करते हैं। कई बच्चे अपनी लत से मजबूर होकर चोरी तक करने लगते हैं। इन पदार्थों के लती बन चुके लोगों की संगत में आपराधिक घटनाओं का हिस्सा तक बन जाते हैं। इतना ही नहीं किसी तरह के नशे की आदत अन्य नशीले पदार्थों के सेवन की ओर भी प्रवृत्त करती है। यह अंतहीन कुचक्र बच्चों की मनोदशा तक बिगाड़ देता है।

जाने-अनजाने नशे और अपराध के जाल में फँसने वाले कई बच्चे आत्महत्या जैसा भयावह कदम भी उठा लेते हैं। यही वजह है कि छोटी आयु में ही सतर्कता और समझ का धरातल बनाना आवश्यक है। चिंतनीय है कि हमारे यहाँ नई पीढ़ी की एक बड़ी आबादी को किशोरावस्था में ही तंबाकू सेवन जैसी बुरी आदतें घेर लेती हैं। चार वर्ष पहले आए ग्लोबल यूथ टोबैको सर्वे-4 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में 38 प्रतिशत सिगरेट और 47 प्रतिशत बीड़ी पीने वाले एवं 52 फीसदी धुआं रहित तंबाकू का सेवन करने वाले अपने 10वें जन्मदिन से पहले ही इस जाल में फंस जाते हैं। कहीं हम उम्र बच्चों की देखा-देखी नई पीढ़ी अपनी जिंदगी की दिशा भूल जाती है तो कहीं किशोर बच्चे मादक पदार्थों के बाजार की सोची समझी रणनीति का आसानी से शिकार बन जाते हैं।

आज की बदलती जीवनशैली में हर आयु वर्ग में तम्बाकू उत्पादों का उपयोग एक फैशन बन गया है। आमतौर पर युवाओं को सम्बोधित तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन एक स्टाइल स्टेटमेंट की तरह पेश किए जाते हैं। जानलेवा लत को जिंदादिल होने की जीवनशैली से जोड़कर दिखाया जाता है। अफ़सोस कि शौक के तौर पर शुरू होने वाली यह आदत लत बनकर स्वास्थ्य के हर पहलू को प्रभावित करने लगती है। अब तो ई-सिगरेट के रूप में निकोटिन सेवन का नया तरीका भी युवाओं में खूब प्रचलित है। व्यावसायिक रणनीति के तहत इसे स्मोकिंग वाले तम्बाकू उत्पादों का एक विकल्प बताकर बाजार में उतारते हुए प्रचारित किया गया था कि यह सेहत को हानि नहीं पहुँचाता।

अध्ययन बताते हैं कि ई-सिगरेट भी सिगरेट के बराबर हानिकारक है। इसमें इस्तेमाल होने वाले रासायनिक तत्व भी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह ही हैं। चिंतनीय है कि हमारे देश में प्रतिवर्ष लगभग 10 लाख मौतें तंबाकू उत्पादों के सेवन के चलते ही हो रही हैं। बावजूद इसके 15 वर्ष से अधिक उम्र के 28.6 प्रतिशत लोग किसी न किसी रूप में तंबाकू सेवन की जद में हैं। चिंतनीय है कि बीते कुछ वर्षों में युवतियों में भी तंबाकू सेवन के आंकड़े बढ़े हैं। धुआँ रहित तंबाकू उत्पादों के सेवन की लत हो या धूम्रपान, महिलाओं में बीमारियाँ बढ़ाने के साथ ही प्रजजन क्षमता पर भी प्रतिकूल असर डाल रही है। महिलाओं में तम्बाकू का सेवन गर्भपात और असामान्य बच्चों के जन्म का भी बड़ा कारण बन रहा है।

मौजूदा दौर में नई पीढ़ी खान-पान से लेकर नशीले उत्पादों के सेवन तक, स्वास्थ्य से जुड़े अनगिनत जोखिमों के जाल में है। ऐसे में बच्चों और युवाओं को लती बनाने वाली यह आदत सेहत ही नहीं आर्थिक और सामाजिक पहलू पर भी जीवन को पीड़ादायी परिस्थितियों तक पहुंचाने वाली है। तंबाकू सेवन की आदत शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को ही नहीं मन की शक्ति को भी कमज़ोर करती है। इसीलिए बचाव ही इसका उपचार है। मन की मजबूती का पाठ पढ़ाने वाले बापू के विचारों का स्मरण करते हुए देश के भविष्य को तंबाकू के चंगुल में फंसने से बचाने वाला यह अभियान आज समय की जरूरत है।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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