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जल्द ही शुरू होगा भाजपा के नये अध्यक्ष का इम्तिहान

बिहार के पांच बार के विधायक नितिन नबीन विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी के 12 वें अध्यक्ष बन गए हैं। 45 वर्षीय नितिन नबीन ने पार्टी के अब तक के इतिहास में सबसे कम आयु में यह गौरव अर्जित किया है। लगभग एक माह पूर्व जब उन्हें पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष मनोनीत किया गया था तभी यह सुनिश्चित हो चुका था कि वे जल्द ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर जे पी नड्डा के उत्तराधिकारी बनने जा रहे हैं और यह भी तय माना जा रहा था कि पार्टी में अब तक चली आ रही परिपाटी के अनुसार अध्यक्ष पद पर उनका निर्वाचन निर्विरोध होगा।

Nitin Nabin

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, पार्टी के निवर्तमान अध्यक्ष जे पी नड्डा और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह उनके प्रस्तावकों में प्रमुख थे।लगभग 18 करोड़ सदस्य संख्या वाले‌ विशाल राजनीतिक दल के अध्यक्ष का निर्विरोध निर्वाचन निश्चित रूप से दल की महान परंपरा का परिचायक है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नितिन नबीन को इन शब्दों में बधाई देना कि " पार्टी से जुड़े मामलों में आज से नितिन नबीन मेरे बास हैं। अब वे मेरी 'सी आर ' लिखेंगे " इस बात का परिचायक है कि वे संगठन को सत्ता से ऊपर मानते हैं और पार्टी अध्यक्ष के प्रति उनके मन में गहरा सम्मान है।

अध्यक्ष पद के लिए अनेक वरिष्ठ नेताओं को छोड़कर 45 वर्षीय नबीन नितिन के चयन ने संभवतः अनेक राजनीतिक पंडितों को आश्चर्यचकित किया होगा क्योंकि पार्टी के हाईप्रोफाइल नेताओं की कतार में उनका नाम पहले कभी नहीं सुना गया। भाजपा अध्यक्ष पद की कुर्सी संभालने के बाद उन्होंने स्वयं कहा कि साधारण कार्यकर्ता को असाधारण सम्मान मिला है।

ऐसा प्रतीत होता है कि नबीन नितिन की विलक्षण नेतृत्व क्षमता और राजनीतिक सूझबूझ सहित शीर्ष पद के लिए उनके चयन का आधार बनी है, उनकी यह विलक्षण नेतृत्व क्षमता और राजनीतिक सूझबूझ निकट भविष्य में होने जा रहे पश्चिम बंगाल और असम विधानसभाओं के चुनावों में पार्टी की संभावनाओं को बलवती बनाएगी। इसमें भी दो राय नहीं हो सकती कि संगठन के प्रति उनके समर्पण और सबको साथ लेकर चलने की उनकी कार्यशैली ने उन्हें पार्टी के शीर्षस्थ नेताओं का विश्वासपात्र बनाया है।

विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक दल ने अगर अध्यक्ष पद की बागडोर 45 वर्षीय नवीन नितिन को सौंपने का फैसला किया है तो उसे पार्टी में पीढ़ीगत बदलाव की शुरुआत का संकेत भी माना जाना चाहिए। गौरतलब है कि विगत दिनों पार्टी के एक भूतपूर्व अध्यक्ष और वर्तमान में मोदी सरकार के वरिष्ठ सदस्य नितिन गडकरी ने भी पार्टी में नयी पीढ़ी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जाने के पक्ष में अपनी राय व्यक्त की थी।पार्टी संविधान के अनुसार नितिन नबीन अगले तीन सालों के लिए अध्यक्ष निर्वाचित हुए हैं और अगले कुछ महीनों के अंदर ही उनके नेतृत्व कौशल , चुनावी रणनीतिक सूझबूझ का इम्तिहान शुरू होने जा रहा है। एक ओर जहां उन्हें असम विधानसभा चुनाव में पार्टी की लगातार तीसरी बार विजय‌ सुनिश्चित करना है वहीं पश्चिम बंगाल में पार्टी को सत्ता की दहलीज तक पहुंचाने की चुनौती भी उनके सामने है।

असम में तो भाजपा पिछले दो विधानसभा चुनावों में बहुमत हासिल कर सत्ता की बागडोर थामे हुए है लेकिन पश्चिम बंगाल में उसकी ताकत बढ़ने के बावजूद उसे सत्ता की दहलीज तक पहुंचने का सौभाग्य नहीं मिल पाया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वहां पिछले पंद्रह सालों से सत्तारूढ तृणमूल कांग्रेस का सबसे बड़ा चेहरा बनीं हुईं हैं। हालांकि पार्टी के अनेक वरिष्ठ नेताओं पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों एवं महिलाओं पर अत्याचार की घटनाओं में वृद्धि आदि के कारण दीदी की लोकप्रियता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। एस आई आर के कारण उनका अल्पसंख्यक वोट बैंक भी बिखर चुका है।भाजपा के न ए अध्यक्ष नितिन नबीन से यह उम्मीद की जा रही कि वे अपनी रणनीतिक सूझबूझ और नेतृत्व कौशल से राज्य में बढ़ते जन असंतोष को अपनी पार्टी के प्रति समर्थन में तब्दील करने में कामयाब हो जाएंगे।

अगर यह उम्मीद परवान चढ़ती है तो वे इतिहास रचने में सफल होंगे। इसी साल होने वाले तमिलनाडु,केरल और पुडुचेरी की विधानसभाओं के चुनावों को भी उन्हें चुनौती के रूप में स्वीकार करना होगा। तमिलनाडु में द्रमुक और कांग्रेस का गठबंधन सत्ता में है। केरल में वाममोर्चे की सरकार है। केरल के तिरुवनंतपुरम में भाजपा को पहली बार अपना मेयर बनवाने में सफल होकर उत्साह से भरी हुई है। भाजपा केरल में कांग्रेस और वाममोर्चे के बाद तीसरी ताकत बनने की तैयारी कर रही है और तमिलनाडु में अन्ना द्रमुक तथा अन्य क्षेत्रीय दलों के साथ तालमेल कर कांग्रेस और द्रमुक के गठबंधन को कड़ी चुनौती पेश कर रही है । पुडुचेरी में इसी तरह की स्थितियां हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा के आगामी चुनाव भी भाजपा के नये अध्यक्ष के ही कार्य काल में संपन्न होंगे।

उत्तर प्रदेश में भाजपा को अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा अर्जित करना है। इन सबके अलावा नितिन नबीन के कंधों पर यह जिम्मेदारी भी है कि उन्हें एनडीए के सभी घटक दलों के बीच तालमेल बना कर रखना है। नितिन नबीन युवा हैं, उत्साह से लबरेज हैं और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का आशीर्वाद उनके साथ है इसलिए उनसे यह उम्मीद की जा सकती है कि वे पार्टी अध्यक्ष के रूप में अपनी अलग लकीर खींचने में कामयाब होंगे।

(लेखक राजनैतिक विश्लेषक है)

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