The Kerala Story: 'द केरला स्टोरी' को लेकर क्यों परेशान हैं कुछ लोग?
कश्मीर फाइल्स के बाद 'द केरला स्टोरी' एक ऐसी मूवी बन गयी है जो लव जिहाद जैसे मामले का तथ्यात्मक तरीके से खुलासा करती है।

The Kerala Story: केरल में लेफ्ट गठबंधन की सरकार है और विपक्ष में है कांग्रेस गठबंधन। इन दोनों पार्टियों ने हर जगह हाथ मिला लिया मगर केरल में नहीं। लेकिन 5 मई को रिलीज होने जा रही मूवी 'द केरला स्टोरी' ने दोनों को एक ही मंच पर ला दिया है। कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियां दोनों नहीं चाहती कि ये मूवी रिलीज हो। 'कश्मीर फाइल्स' से परेशान लोगों को "द केरला स्टोरी" फिल्म दूसरा बड़ा झटका देने वाली है।
पिछले साल जब इस फिल्म का टीजर रिलीज हुआ था, तभी दोनों पार्टियों के नेता विरोध में आ गए थे। यहां तक कि फिल्ममेकर्स के खिलाफ केरल पुलिस में एफआईआर तक दर्ज करवा दी गई थी। पता चला कि एक पत्रकार ने भी सीएम को पत्र लिखकर इस मूवी के खिलाफ जांच की मांग की है। पुलिस ने जांच कमेटी भी बैठा दी, फिर लीगल ओपीनियन लेने का भी बयान दिया। लेकिन मेकर्स को ना रुकना था और ना रुके। अब ना केवल ट्रेलर जारी कर दिया गया है बल्कि मूवी के रिलीज की तारीख भी आ गई है। इस मूवी के निर्माता हैं द हॉलीडे, नमस्ते लंडन, कमांडो, फोर्स टू जैसी फिल्मों के निर्माता विपुल अमृतलाल शाह, यानी शेफाली शाह के पति।
जबकि इस फिल्म के निर्देशक सुदीप्तो सेन तब चर्चा में आए थे, जब उन्होंने 2018 में केरल में लव जिहाद को लेकर अपनी एक डॉक्यूमेंट्री बनाई थी, नाम था 'इन दी नेम ऑफ लव'। उसके बाद उनका बयान आया कि 32,000 हिंदू, ईसाई लड़कियों को केरल में धर्मान्तरण करके मुस्लिम बना दिया गया है। उनके इस बयान के चलते काफी विवाद हुआ था। वैसे सुदीप्तो आसमां, लखनऊ टाइम्स और द लास्ट मोंक जैसी फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं।
'द केरला स्टोरी' का ट्रेलर सामने आने के बाद अब फिर से ये बहस शुरू हो गई है कि क्या वाकई में केरल में इतने बड़े पैमाने पर लड़कियों का धर्मांतरण करवाया जा रहा है? क्या वाकई आईएसआईएस इन सब लड़कियों को दूसरे धर्मों के खिलाफ इस्लामिक जंग में अफगानिस्तान, सीरिया जैसी जगहों पर इस्तेमाल कर रहा है? ट्रेलर उतना ही बोल्ड और शॉकिंग है, जैसा कि विवेक अग्निहोत्री की फिल्म 'कश्मीर फाइल्स' का था।
मूवी की लीड रोल में है '1920' और 'कमांडो' जैसी फिल्मों से अपनी अलग किस्म की एक्टिंग से पहचान बनाने वालीं अदा शर्मा। उनके किरदार का नाम है शालिनी उन्नीकृष्णन। ट्रेलर में दिखाया जाता है कि कैसे उसका ब्रेनवाश किया जाता है। कैसे ये बताया जाता है कि उनके देवता कितने कमजोर हैं और सर्वशक्तिमान सिर्फ अल्लाह है। कैसे उसे बताया जाता है कि इस्लामिक देशों में कोई लड़कियों की तरफ आंख उठाकर तक नहीं देखता है।
फिर कहानी में एक किरदार प्लांट किया जाता है, जो रोमांटिक तबियत का होता है। शालिनी को उससे प्यार हो जाता है और वो उसके प्यार तथा धर्मान्तरण में लगी अपनी सहेलियों के दवाब में शालिनी से फातिमा बन जाती है। फिर शुरू होता है घरवालों से झगड़े, लव मैरिज आदि का सफर, इस्लामिक देशों की यात्रा और फिर वहां जुल्मों का सफर। ट्रेलर की शुरूआत ही इस सीन से होती है, जिसमे जेल में बंद शालिनी ये बताना चाहती है कि उसने आईएसआईएस क्यों ज्वॉइन किया। जैसे जैसे वो कहानी बताती है, फिल्म आगे बढ़ने लगती है।
माना जा रहा है कि ये सच्ची कहानी पर बनी मूवी है। निर्देशक सुदीप्तो सेन ने एक इंटरव्यू में बताया था कि लव जिहाद की शिकार 32,000 लड़कियों का आंकड़ा खुद पूर्व मुख्यमंत्री ओमान चांडी ने विधानसभा को दिया था। हालांकि इसको लेकर भी लोगों के अलग अलग दावे रहे हैं। दरअसल लव जिहाद की ये चर्चा केरल में तब से शुरू हुई, जब खुद केरल हाईकोर्ट ने पहली बार 'लव जिहाद' शब्द का प्रयोग किया था। पहले हिंदू ही इससे परेशान थे, फिर खबरें आने लगीं कि ईसाई भी वहां के कट्टर मुस्लिमों से परेशान रहने लगे हैं।
कुछ महीनों पहले चर्च के एक बड़े चेहरे ने भी जब खुलकर केरल में मुस्लिमों को ईसाई लड़कियों के धर्मान्तरण के लिए जिम्मेदार ठहराया तो काफी हलचल मची। प्रधानमंत्री मोदी का दिल्ली के एक चर्च में जाना और फिर केरल में जाकर कई चर्च नेताओं से मिलना ये बताता है कि केरल का ईसाई समुदाय भी बीजेपी के निकट आ रहा है। विपुल शाह आमतौर पर विवादित फिल्मों से बचते रहे हैं, लेकिन इस मूवी पर जब विवाद उठा तो उनका जवाब था, हम एक भी सीन बिना तथ्यों के नहीं दिखाएंगे। ऐसे में सवाल उठाना ही गलत है। वो कहते हैं, निर्देशक और लेखक सुदीप्तो सेन ने चार साल तक इस फिल्म के बारे में कड़ी रिसर्च की है।
फिल्म के निर्देशक सुदीप्तो सेन उस वक्त भी चर्चा में आए थे, जब पिछली साल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टीवल (इफ्फी, गोवा) की इंटरनेशनल ज्यूरी में वह इकलौते भारतीय सदस्य चुने गए थे। जब ज्यूरी चेयरमेन एक विदेशी फिल्मकार ने कश्मीर फाइल्स को लेकर एक विवादित बयान दे दिया था, तब सुदीप्तो सेन ने ही अंदर की बात बताकर स्थिति संभाली थी।
बहरहाल द केरला स्टोरी भले ही अदा शर्मा के किरदार के इर्दगिर्द घूमती लगती हो, लेकिन इसमें चार लड़कियों की कहानी है। बाकी तीनों के किरदार योगिता बिहानी, सोनिया बलानी और सिद्धि इदानी ने निभाए हैं। ट्रेलर से पहले मूवी के 5 पोस्टर लांच करना भी रणनीति का एक हिस्सा थे, जिसमें साफ दिखता है कि पहले एक लड़की बुर्के में दिखती है, फिर सभी की सभी ना केवल बुर्के में दिखती हैं, बल्कि किसी मुस्लिम देश में आईएसआईएस के लड़ाकों के साथ दिखती हैं।
चूंकि केरल की नर्सों की मांग कई देशों में रही है, इसलिए मुख्य किरदार यानी शालिनी और फातिमा एक नर्स के तौर पर ही दिखेंगी। माना जा रहा है कि ये एक सच्ची कहानी पर आधारित मूवी है, जब 2016 में 4 नर्सों के साथ साथ 21 लोगों का एक समूह केरल से अफगानिस्तान चला गया था, ताकि आईएसआईएस ज्वॉइन कर सके। तीन साल मुसीबतों में रहने के बाद उन्होंने 2019 में सरेंडर किया था। इनमें से कुछ हिंदू और ईसाई लड़कियां भी थीं।
ऐसे में इस मूवी का रिलीज होना न केरल कांग्रेस को रास आ रहा है और न लेफ्ट पार्टियों को। लेफ्ट हो या कांग्रेस दोनों पार्टियों के नेता इसकी रिलीज रोकना चाहते हैं। यही नहीं कुछ लेफ्ट लिबरल समूह से जुड़ी फैक्ट चैकिंग बेबसाइट और पत्रकार एक्टिविस्ट भी इसके खिलाफ हैं। जेएनयू के वामपंथी छात्र नेता तो डॉक्यूमेंट्री के शो में ही काफी हंगामा कर चुके हैं। लेकिन जितना ये विरोध कर रहे हैं, उतना ही मूवी के हक में जा रहा है क्योंकि हिंदूवादी इस मूवी को 'कश्मीर फाइल्स' का अगला भाग मानकर इसको आगे बढ़ा रहे हैं। उनको लगता है कि इस मूवी से पहली बार केरल में चल रहे लव जिहाद के गैंग का पर्दाफाश होगा।
इस मूवी का ट्रेलर ही ऐसा है, जो लव जिहादियों के काम करने के तरीके को सामने लाता है। यानी कैसे उदार हिन्दुओं और ईसाई लड़कियों का ब्रैनवाश करके उन्हें उनके ही धर्म के खिलाफ भड़काया जाता है। हिन्दूवादियों और ईसाई समूहों को लगता है कि इस मूवी के जरिए उनके बच्चे सावधान हो सकेंगे। यही एकमात्र वजह है, जिसके चलते केवल ट्रेलर देखकर कहा जा सकता है कि ये मूवी कश्मीर फाइल्स जैसी कामयाबी हासिल करे ना करे, लेकिन लोगों को झकझोर कर जरुर रख देगी।












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