ईडी द्वारा संजय राउत की गिरफ्तारी के बाद ठाकरे परिवार में भी घबराहट
खाली समय में हारमोनियम बजाने के शौकीन संजय राउत, शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' का सनसनाता संपादकीय लिखने की भवबाधाओं से जूझकर लगभग मुक्त हो ही रहे थे कि एक जोर का झटका जैसे उनका इंतजार कर रहा था। ईडी अफसरों का अमला उनके घर पर दस्तक दे चुका था और यह कोई अच्छी खबर नहीं थी, क्योंकि शिवसेना की हर खबर में बहस का हिस्सा बनने वाले राउत खुद अपनी ही खबर का मजमून बने हुए थे।

वह 31 जुलाई को रविवार का दिन था और संसदीय व सार्वजनिक जीवन में आम तौर पर यह दिन छुट्टी का होने के बावजूद संजय राउत उस दिन सबसे ज्यादा व्यस्त थे। ईडी ने पहले उनसे पूछताछ की, फिर हिरासत में लिया और बाद में गिरफ्तार भी कर लिया। और, जैसा कि सभी राजनीतिक पार्टियों में होता ही है, शिवसेना की अंदरूनी राजनीति में संजय राउत के अचानक उत्थान से जो नेता कोई बहुत खुश नहीं हैं, उनको राउत का गिरफ्तार होना जरूर सुकून दे रहा होगा। लेकिन डर उनको भी सता रहा है कि क्योंकि महाराष्ट्र में सत्ता पलटने के साथ ही दिल्ली के दरवाजों से जो संदेश निकला है उसका मजमून यही है कि नंबर सबका लगेगा।
खुद उद्धव ठाकरे और उनके बेटे आदित्य भी सहमे हुए हैं। क्योंकि राजनीति में और खासकर शिवसेना की राजनीति में ऐसे लोगों की संख्या बहुत ज्यादा है, जिनका राजनीतिक जीवन धन कमाने के मामले में कोई बहुत उजला नहीं रहा है।महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना की सरकार आने के बाद सबसे बड़ा लाभ तो भले ही मुख्यमंत्री बनने के कारण उद्धव ठाकरे व उनके परिवार का हुआ, लेकिन पत्रकार से सामना के संपादक, और सांसद बनने के बाद शिवसेना के उपनेता से प्रवक्ता के तौर पर राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित होकर शिवसेना में सबको पछाड़कर आगे बढ़ने वाले नेता साबित हुए संजय राउत।
मुंबई के पास अलीबाग में 1961 में जन्मे राउत अब गिरफ्तार हैं और स्पेशल पीएमएलए कोर्ट के आदेश पर वे 4 अगस्त तक ईडी की कस्टडी में हैं, और हमारे देश की न्याय व्यवस्था में जिनका विश्वास है, उनको इस बात पर कोई आश्चर्य नहीं कि 4 अगस्त को यह कस्टडी अगली तारीख तक बढ़ा दी जाए।
यह भी संभव है कि आनेवाले कई दिनों तक संजय राउत गिरफ्तार ही रहे, क्योंकि महाराष्ट्र के मंत्री रहते हुए अनिल देशमुख और नवाब मलिक को पिछले साल जब जेल भेजा गया तब भी बहुत लोगों को विश्वास तो था ही कि वे दो चार दिन में छूट आएंगे।
राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि बीजेपी मुंबई महानगरपालिका सहित आसपास की प्रमुख पालिकाओं के चुनाव तक शिवसेना को इस तरह से उलझाए रखेगी कि वह परेशान रहे और ढंग से चुनाव लड़ ही न पाए। क्योंकि शिवसेना की सबसे बड़ी ताकत ये नगरपालिकाएं ही हैं, जहां से निकलनेवाली अर्थगंगा से वह लगातार फलती फूलती रही है। मुंबई महानगरपालिका शिवसेना के लिए सबसे दुधारू गाय रही है, उसी शहर के गोरेगांव उपनगर की पतरा चाल के विकास के लगभग एक हजार करोड़ के घोटाले में संजय राउत को गिरफ्तार किया गया है।
राउत न केवल शिवसेना में बल्कि ठाकरे परिवार सहित महाराष्ट्र की राजनीति में भी अहम शख्सियत माने जाते हैं। शिवसेना के प्रवक्ता राउत पार्टी के समर्थन और उद्धव ठाकरे के लिए अपने उग्र लेखों के लिए विख्यात हैं और इसी वजह से विरोधियों में कुख्यात भी। प्रवक्ता के रूप में उनकी छवि को देश जानता है और महाराष्ट्र में उनकी कितनी अहमियत है, इसे समझने के लिए उनकी हिरासत की शाम एक कार्यक्रम में माइक थामे मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के उस कथन पर ध्यान देना जरूरी है, जब उन्होंने माइक ठीक करने के बहाने राउत पर तंज कसा कि - "जरा ये वाला माइक ठीक करो, वो दूसरा वाला माइक तो आज से बंद हो गया, जो बहुत बोलता था।"
पतरा चाल पर ईडी के सवाल
संजय राउत को जिस एक हजार करोड़ से अधिक के पतरा चाल घोटाले में 31 जुलाई की रात गिरफ्तार किया गया है वह पतरा चाल पुरानी ईमारतों का समूह है, जिसके पुनर्विकास में कथित अनियमितताओं से जुड़े धन शोधन के मामले में राउत ईडी द्वारा गिरफ्तार हैं।
पतरा चाल महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवेलपमेंट अथॉरिटी यानी म्हाडा की कुल 47 एकड़ जमीन है, जिस जमीन पर ये फ्लैट रिडेवलप होने थे। लेकिन गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन ने म्हाडा को धोखे में रख बिना फ्लैट बनाए ही ये जमीन 9 बिल्डरों को बेच दी। और उससे मिली रकम का एक हिस्सा अपने करीबी सहयोगियों को ट्रांसफर कर दिया, जिनमें संजय राऊत का नाम भी बताया जा रहा है।
ईडी अधिकारियों ने जानकारी दी है कि गिरफ्तारी से पहले उन्होंने राउत के आवास पर करीब नौ घंटे तक छापेमारी की, पूछताछ भी की और लगभग 11.5 लाख रुपये नकद जब्त किए हैं। भले ही फोन पर एक महिला को 17 सैकंड में 27 बार मां-बहन की गालियां देते हुए धमकाने का रिकॉर्ड संजय राऊत के नाम दर्ज है, लेकिन रविवार रात 12 बजे उन्हें गिरफ्तार करके ईडी के अफसर अपने साथ ले जाने लगे, तो संजय राउत अपनी मां से लिपटकर बहुत भावुक हो गये।
शिवसेना और ठाकरे परिवार के लिए हर मुश्किल में ढाल बनकर मैदान में कूदनेवाले संजय राउत के परिवार के लिए निश्चित तौर से यह मुश्किल घड़ी थी, जिसकी संवेदनशीलता को समझते हुए उनके नेता उद्धव ठाकरे मैदान में कूदे और परिवार से मिलने के बाद भाजपा को लगभग चेतावनी की मुद्रा में कहा कि एक दिन हमारा टाइम भी आएगा। वक्त लगातार बदलता रहता है। जब हमारा वक्त आएगा तो सोचिए कि आपका क्या होगा।
इसी दौरान उद्धव ने यह भी कहा, जिस पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि "आज की राजनीति ताकत से चल रही है और बीजेपी चाहती है कि राज्यों में पार्टियां खत्म हो जाएं। बीजेपी जो कर रही है, वह सत्ता का गुमान है। मेरे साथ विधायक और सांसद नहीं हैं, लेकिन वफादार हैं। मुझे संजय राउत पर गर्व है। यदि आप ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स के जरिए विपक्ष से लड़ते हैं तो फिर लोकतंत्र कहां रहा। मुझे मरना मंजूर है, लेकिन मैं उनकी शरण में नहीं जाऊंगा।"
उद्धव ठाकरे जब यह सब कह रहे थे, तो उनके कहे की विवेचना करने वाले उनके वक्तव्य को उनके भीतर का डर बता रहे थे। डर वाजिब भी है, क्योंकि बीजेपी नेता किरीट सौमैया ने मुख्यमंत्री के तौर पर उद्धव के ढाई साल और मुंबई महानगरपालिका में तीन दशक की शिवसेना की सत्ता को घोटालों का अंबार खड़ा करने वाला साबित किया है। उसके मायने बहुत कुछ और भी हैं। संजय राउत और उनकी गिरफ्तारी तो उस सबका केवल एक हिस्सा भर है। इब्तिदा ए इश्क में रोता है क्या। आगे आगे देखिए होता है क्या।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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