Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Telangana BJP: किंग नहीं तो किंगमेकर बनने की आस में तेलंगाना भाजपा

Telangana BJP: अपने ही अंदाज में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तेलंगाना के चुनावी मैदान में उतर चुके हैं। शुरुआत तेलंगाना की सीमा के बाहर आंध्र प्रदेश का हिस्सा हो चुके तिरुपति मंदिर में दर्शन पूजन से की। इससे तेलंगाना के वोटरों पर कितना असर पड़ेगा यह तो समय बतायेगा लेकिन 24 महीने पहले तक खुद को केसीआर की पार्टी बीआरएस का विकल्प मान कर चल रही भाजपा अब कांग्रेस के बाद तीसरे नंबर पर पहुंच गई है और खुद को त्रिकोणीय मुकाबले में तीसरे स्थान पर देख रही है।

तेलंगाना में 30 नवंबर को मतदान है और 3 दिसंबर को पांचों राज्यों के चुनाव परिणाम घोषित होगे। भारतीय जनता पार्टी मध्यप्रदेश, राजस्थान में सरकार बनाने को लेकर निश्चिंत है तो छत्तीसगढ़ में किसी चमत्कार की उम्मीद कर रही है। अन्य राज्यों की तरह ही भाजपा तेलंगाना में भी मोदी के नाम और केन्द्र के काम के भरोसे वोट मांग रही है।

Telangana election 2023 BJP hopes to become kingmaker in Telangana

बीआरएस और कांग्रेस को पछाड़कर पिछड़ी जातियों के वोट हासिल करने के लिए भाजपा ने तेलंगाना में सत्ता में आने पर पिछड़ी जाति से मुख्यमंत्री देने का वादा किया है। भाजपा को यह रणनीति कारगर लग रही है क्योंकि राज्य में पिछड़ा वर्ग की आबादी 52 फीसदी है और अभी तक इस वर्ग का कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नहीं बैठा है। यही कारण है कि भाजपा ने इस वर्ग को 36 टिकट दिए हैं वही बीआरएस ने 23 और कांग्रेस ने भी 23 पिछड़े वर्ग के नेताओं को टिकट दिए हैं।

इसके अलावा भाजपा ने रेड्डी समुदाय के 24, अनुसूचित जाति के 13, अनुसूचित जनजाति के 9 और कम्मा, ब्राह्मण और वेलमा समुदाय के एक-एक व्यक्ति को पार्टी का टिकट दिया है। भाजपा की कोशिश सभी 140 उप जातियों को एक छत के नीचे लाने की है। हालांकि पिछड़े नेता को मुख्यमंत्री बनाने का वादा और सबसे ज्यादा पिछड़े लोगों को टिकट देने का फार्मूला जमीनी स्तर पर बहुत असर करेगा, इसकी संभावना कम लग रही है, क्योंकि भाजपा ने पिछड़ा वर्ग की जाति आधारित गणना कराने का निर्णय नहीं लिया है। भाजपा को इस बात की उम्मीद है कि वह तेलंगाना में किंग नहीं तो किंगमेकर बन सकती है। भाजपा के इस भरोसे के पीछे 15 फीसद वोट शेयर और 12 सीटें जीतने की उम्मीद है।

एक समय ऐसा भी था जब लग रहा था कि भाजपा बीआरएस को बेदखल करके सरकार बना लेगी। वह समय था दिसंबर 2020 का जब ग्रेटर हैदराबाद नगर परिषद चुनाव में भाजपा ने 150 सीटों में से 48 सीटें जीत ली थी और उसके बाद दुब्बाका और हुजूराबाद विधानसभा उप चुनाव में जीत दर्ज की थी। कार्यकर्ता भी उत्साहित थे लेकिन चुनाव से चार महीने पहले जुलाई 2023 में भाजपा ने तेलंगाना में अपने तेजतर्रार अध्यक्ष बंडी संजय कुमार को हटाकर केन्द्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी को राज्य की कमान सौंप दी। किशन रेड्डी मंत्री के साथ प्रदेश अध्यक्ष बने रहे और उनकी छवि पार्ट टाइम अध्यक्ष की बन गई।

इसलिए अब तेलंगाना में भाजपा की छवि केसीआर को सत्ता से बेदखल करने वाली पार्टी के बजाय कांग्रेस को सत्ता में आने से रोकने की कोशिश कर रही पार्टी की बनी है। भगवा पार्टी और उसके नेता जानते हैं कि सार्वजनिक रूप से एक दूसरे के प्रति हमलावर दिखने के बावजूद तेलंगाना के लोग दोनों पार्टियों के बीच किसी मौन समझौते को मान कर चल रहे हैं।

भाजपा का असली गेमप्लान यह है कि विधानसभा चुनाव का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाया जाए जिससे कुछ ही महीनों बाद होने वाले लोकसभा चुनाव में सांसदों की संख्या 4 से बढ़ाकर 8 तक की जा सके। लोकसभा में अपनी संभावनाओं को मजबूत करने के लिए ही भाजपा ने उम्मीदवारों की घोषणा में जानबूझकर देरी की ताकि बीआरएस और कांग्रेस दोनो के ही असंतुष्ट दिग्गजों को भरपूर मौका दिया जा सके। भाजपा ने अन्य दलों से आए कम से कम 11 पूर्व विधायकों और तीन पूर्व सांसदों को टिकट दिए हैं।

लेकिन कांग्रेस और भाजपा की तमाम कोशिशों के बाद भी 2014 से सत्ता पर काबिज चंद्रशेखर राव को तीसरी बार सत्ता से रोकना आसान नहीं होगा। केसीआर के तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने की पूरी संभावना लग रही है। इसके कारण भी हैं। केसीआर ने पहले कार्यकाल में सिंचाई और बिजली आपूर्ति पर जोर देने के साथ ही किसानों को सालाना दस हजार रूपये प्रति एकड़ देने की नीति अपनाई। केसीआर की इस योजना ने दक्षिण के इस राज्य को चावल का कटोरा बना दिया। कृषि उपज 1.54 करोड टन से बढ़कर 3.78 करोड टन हो गई। प्रति व्यक्ति बिजली की खपत 2126 यूनिट है जो राष्ट्रीय औसत 1255 यूनिट से 70 फीसद अधिक है।

केसीआर मतदाताओं को गर्व से यह भी बताते हैं कि तेलंगाना का सकल राज्य घरेलू उत्पाद 2014-15 में पांच लाख करोड़ से 2022-23 में 12.9 लाख करोड़ रूपये हो गया है। राव के पक्ष में यह आंकड़ा भी जाता है कि राज्य की विकास दर औसतन 12.7 फीसद सालाना रही है, जो राष्ट्रीय औसत 10.5 फीसद के इस साल के बजटीय अनुमान से 2.2 फीसद अधिक है। केसीआर इस बात पर भी वोट मांग रहे हैं कि तेलंगाना में प्रति व्यक्ति आय जो 2014 में 1.12 लाख रूपये थी वह बढ़कर 2023 में 3.12 लाख रूपये हो गई।

इन शानदार आंकड़ों के बाद भी केसीआर के लिए यह तीसरा चुनाव जीतना आसान नहीं होगा। 2014 में नए राज्य की सहानुभूति केसीआर के लिए स्वाभाविक मददगार बनी। 2018 में रायतु बंधु योजना ने उन्हे सत्ता में वापसी करा दी। लेकिन इस बार राव के लिए चुनाव आसान नहीं रहने वाला है क्योंकि भाजपा और कांग्रेस दोनों उन पर भ्रष्टाचार और पेपरलीक के आरोप लगा रहे हैं। केसीआर के खिलाफ एक आम शिकायत यह भी है कि वह किसी की नहीं सुनते और प्रशासन पूरा अपने हाथों में रखते हैं। पार्टी के वरिष्ठ सहयोगियों और मंत्रियों को भी कोई अधिकार नहीं है। केसीआर के बिना बीआरएस संगठन और सरकार में पत्ता भी नहीं हिलता।

परिवारवाद का आरोप भी केसीआर के लिए परेशानी का सबब है। केसीआर खुद मुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष हैं। उनके बेटे केटीआर कार्यकारी अध्यक्ष और उद्योग मंत्री है। एक भतीजा टी हरीश राव स्वास्थ्य और वित्त मंत्री है। दूसरा भजीता संतोष कुमार राज्यसभा सांसद है। केसीआर पर परिवारवाद को बढ़ावा देने और सत्ता की मलाई परिवार में ही बांटने का आरोप है।

तमाम आरोपों के बाद भी केसीआर तीसरी बार सरकार बनाने को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं। तेलंगाना का यह चुनाव केसीआर बनाम केसीआर है। अगर केसीआर तीसरी बार मुख्यमंत्री बन जाते हैं तो ऐसा कारनामा करने वाले वह दक्षिण के पहले नेता होगें क्योंकि अभी तक दक्षिण में कोई नेता लगातार तीन कार्यकाल नहीं ले सका है। केसीआर लगातार तीसरी बार वापसी करेंगे या कांग्रेस केसीआर को बेदखल करेगी या फिर किसी को भी बहुमत न मिलकर त्रिशंकु सरकार बनेगी, यह तो 3 दिसंबर को साफ हो सकेगा। लेकिन इतना साफ है कि जहां केसीआर के लिए यह चुनाव करो या मरो जैसा है, वहीं भाजपा त्रिशंकु विधानसभा की उम्मीद लगाये बैठी है ताकि उसकी प्रासंगिकता प्रदेश में बढ़ जाए।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+