Short Video Craze: क्यों बढ़ रही है महिलाओं में सोशल मीडिया पर रील बनाने की सनक?
Short Video Craze: रोहतक के भारतीय प्रबंधन संस्थान (आइआइएम) द्वारा किए गए हालिया सर्वे के अनुसार युवा हर रोज औसतन 7 घंटे सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं। सोशल मीडिया पर पुरुषों की तुलना में महिलाएं करीब 20 मिनट ज्यादा सक्रिय रहती हैं।
वर्चुअल स्क्रीन पर पल पल सामने आती रील्स और अजब- गजब वीडियोज़ पर नजर डालें तो यह बात सही प्रतीत होती है। आभासी संसार में महिलाएँ काफी समय बिता रही हैं। साथ ही देश भर के हर हिस्से में सोशल मीडिया के प्रति महिलाओं की इस बढ़ती सनक के गंभीर परिणाम सामने आने लगे हैं। इस जुनून के चलते ना केवल महिलाओं और बेटियों के लिए असुरक्षा के हालात पैदा हुए हैं बल्कि आपराधिक घटनाएँ भी हो रही हैं।

ठहराव और मन की दृढ़ता के मान पाने वाली भारतीय स्त्रियों द्वारा रील्स और वीडियोज़ में साझा की जा रही सामग्री वाकई हैरान करने वाली है। मजाक के नाम पर हद दर्जे की असभ्य बातें और नृत्य के नाम पर अश्लील हावभाव स्वयं स्त्रियाँ ही परोस रही हैं। कहीं ग्रामीण महिलाएं कुएं में झूलती चारपाई पर बैठी रील्स बनाकर जीवन को खतरे में डाल रही हैं तो कहीं भैंस पर चढ़कर नृत्य कर रही हैं।
परिस्थितियाँ ऐसी हैं कि छोटे-छोटे गांवों-कस्बों में बसी घर-परिवार संभाल रही महिलाएँ भी इस पागलपन का शिकार हो चली हैं। बहुत से घरों में उनके अपने भी इस जुनून से परेशान हैं। रोक-टोक करने पर आपराधिक घटनाएँ तक हो रही हैं। हाल ही में कर्नाटक के चामराज नगर में एक युवक ने पत्नी के रील्स बनाने के जुनून से व्यथित होकर आत्महत्या कर ली। युवक को हर समय पत्नी का सोशल मीडिया में व्यस्त रहना परेशान करने लगा था। वहीं पत्नी इंस्टाग्राम और टिकटोक पर रील्स को लेकर बेहद जुनूनी हो गई थी।
बिहार के बेगूसराय में हुई एक अन्य घटना में पति ने पत्नी को रील्स बनाने से रोका तो पत्नी और ससुराल के कुछ लोगों ने उसकी हत्या कर दी। इस मामले की जांच में खुलासा हुआ है कि रील्स बनाने की वजह से पत्नी की दोस्ती अन्य लड़कों से हो गई थी। अनजान लोगों से हुई मित्रता को लेकर पति महिला को बार-बार समझाता था।
इसी बात को लेकर हुए विवाद के बाद समझाने के लिए पति अपनी ससुराल गया था, जहां महिला ने अपने अन्य साथियों की मदद से उसे मौत के घाट उतार दिया। विचारणीय है कि रील्स बनाने की दीवानगी के कारण उजड़ी इस गृहस्थी के बिखराव का दंश झेलने वालों में दोनों का एक 5 साल का बेटा भी है।
सोशल मीडिया पर चल रही रील्स के इस दौर में नाबालिग बच्चियाँ, युवतियाँ और घर-परिवार बसाकर मातृत्व की ज़िम्मेदारी निभा रहीं महिलाएं तक अपनी सुधबुध खो रही हैं। ना केवल अनजान चेहरों से मित्रता कर असुरक्षा को न्योता दे रही हैं बल्कि रील्स बनाने के फेर में गलत कदम भी उठाने से भी नहीं चूक रहीं। दुखद यह है कि अंततः खुद महिलाएँ भी इस बिखराव का दंश झेलती हैं, पर समय रहते दी गई अपनों की समझाइश का कोई असर नहीं दिखता।
बिहार के ही बेगूसराय में बीते साल हुई एक घटना में तीन नाबालिग छात्राओं ने परिजनों की डांट से नाराज होकर घर छोड़ दिया था। अभिभावकों द्वारा अपहरण की शिकायत दर्ज़ करवाने के बाद सकुशल बरामद होने पर छात्राओं ने बताया कि परिजन उन्हें रील्स बनाने से मना करते थे। इस रोक-टोक से नाराज होकर तीनों एक साथ घर से भाग गईं।
साल 2022 में उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में एक युवती ने रील्स बनाने से रोकने पर अपने भाइयों पर हमला कर दिया था। युवती इस रोक-टोक से इतनी नाराज थी कि उसने अपने छोटे भाइयों को गला घोंटकर मारने की कोशिश की। शिकायत के बाद युवती को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। वहीं हाल ही में राजस्थान के एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी की रील बनाने की आदत से नाराज होकर उसकी हत्या कर दी।
वर्चुअल संसार में छा जाने के नाम पर महिलाओं की बदलती सोच का यह पक्ष वाकई समझ से परे है। आभासी प्रशंसा पाने की ललक में पारिवारिक संबंध तक दरक रहे है। रील बनाने का दबाव डालने के कारण मध्य प्रदेश में तो एक पति ने स्वयं को न केवल पत्नी से बचाने की गुहार लगाई बल्कि इस आधार पर कुटुंब न्यायालय में तलाक की अर्जी तक डाली थी। पति का कहना था कि पत्नी के रील्स वीडियो बनाने की सनक ने उसका जीवन नर्क बना दिया है।
राज्य में एक साल के भीतर पत्नियों द्वारा इंटरनेट मीडिया पर हद से ज्यादा सक्रिय होने की वजह से बिगड़ते सम्बन्धों से जुड़े करीब 70 प्रतिशत मामले कुटुंब न्यायालय तक पहुंचे थे। देश के सभी हिस्सों में ऐसे वाकये हो रहे हैं जहां रील्स के चक्कर में उलझी महिलाओं को लेकर परिजनों के शिकायती स्वर सुनने को मिल रहे हैं। रील्स बनाने के लिए गैर जरूरी चीजों की ख़रीदारी से खर्चे बढ़ रहे हैं। घर-परिवार की संभाल में कोताही हो रही है। खुद का जीवन जोखिम में डाला जा रहा है।
तकनीकी के जाल में उलझती मानसिकता के कारण हो रहे ऐसे मामले यकीनन भयभीत करने वाले हैं। समझना मुश्किल नहीं कि अभिभावकों की सधी और सही समझाइश पर घर छोड़ने वाली बेगूसराय की नाबालिग बच्चियाँ अगर किसी के झांसे आ जातीं तो संभवतः कभी घर ही ना लौट पातीं।
कैसी विडम्बना है कि एक ओर सोशल मीडिया की लत ने लोगों को एकाकी बना दिया है तो दूसरी ओर फेसबुक और इंस्टाग्राम पर रील्स अपलोड करने का पागलपन हर उम्र, हर वर्ग के लोगों में देखने को मिल रहा है। जिस देश में पहले ही महिलाओं के लिए असुरक्षा के हालात हैं, महिलाओं की निजता को ठेस पहुंचाने वाला परिवेश हर ओर देखने को मिलता है, वहाँ हर उम्र की स्त्रियों का इस नकली ग्लैमर और प्रसिद्धि के आभासी घेरे में आना बेहद चिंता की बात है।
इतना ही नहीं बढ़ती आभासी सक्रियता और वास्तविक जीवन से बढ़ती दूरी अनगिनत स्वास्थ्य समस्याएँ भी बढ़ा रही है। रीयल जिंदगी से दूर करती रील्स हो या इंस्टाग्राम, वॉट्सऐप और फेसबुक के अपडेट्स और लाइक- कमेंट देखने की व्यग्रता, मानसिक सेहत पर सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव पड़ रहा है। बावजूद इसके वर्चुअल छवि में गुम महिलाएं अपनी सूझ-बूझ खो रही हैं। पैसा कमाने की जुगत में रील्स को हिट बनाने और लाखों व्यूज़ पाने के लिए हर हद पार कर रही हैं।
बिहार में ही मिट्ठू मानसी का जोड़ा इन दिनों काफी चर्चित है जिसने प्रेम विवाह किया था। जब लव मैरिज की था तब उनका इरादा था कि रील बनाकर पैसे कमाएंगे और जिन्दगी चलायेंगे। वो ऐसा करने भी लगे लेकिन जब कमाई इतनी नहीं हुई कि घर चल सके तो अब दोनों के बीच तकरार शुरु हो गई है।
तकनीक के जाल में आधी आबादी का जमीनी सोच और व्यावहारिक समझ से दूर होना समग्र समाज के लिए पीड़ादायी है। जिन आधुनिक सुविधाओं को जागरूकता और सजगता के लिए इस्तेमाल कर महिलाएँ सशक्त बन सकती हैं वे सुविधाएं ही उन्हें असुरक्षा और अपराध की राह पर पर ले जा रही हैं।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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