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छक्के छुड़ाना या छक्के उड़ाना : बीजेपी को सिखा रही है शिवसेना

By प्रेम कुमार
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नई दिल्ली। बीजेपी से फिल्डिंग करा रही है शिवसेना। उसकी गेंदों पर छक्के उड़ा रही है शिवसेना। मोदी-शाह की जोड़ी परेशान है। बीजेपी के खिलाड़ी हैरान हैं। मगर, क्या मजाल कि शिवसेना कोई भी लूज़ गेंद व्यर्थ जाने दे। मौका मिला नहीं कि गेंद बाउन्ड्री के बाहर- कभी चार रन के लिए, कभी छह रन के लिए। वहीं जब गेंदबाजी मिली, तो बाउंसर दर बाउंसर। इन्हें झेल पाना भी बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए मुश्किल हो रहा है।

छक्के छुड़ाना या छक्के उड़ाना : BJP को सिखा रही है शिवसेना

संसद में मोदी ने फेंकी गेंद, बाहर शिवसेना ने उड़ाया 'सिक्सर'

संसद में बजट सत्र के समापन भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राफेल पर उंगली उठाने वालों की ख़बर ली थी कि अगले ही दिन 'द हिन्दू' अखबार में यह ख़बर आ गयी कि राफेल मामले में फ्रांस सरकार के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की समांतर चर्चा से रक्षा मंत्रालय की ओर से की जा रही बातचीत कमजोर पड़ गयी। बस मौका मिल गया। राहुल गांधी ने माहौल बनाया और फिर शिवसेना ने छक्के उड़ाए।

शिवसेना ने पूछा है कि पीएम बताएं कि राफेल सौदा वायु सेना को मजबूत करने के लिए हुआ या आर्थिक रूप से परेशान एक उद्योगपति की हालत ठीक करने के लिए हुआ? 'सामना' में लिखा गया है, "गुरुवार को संसद में देशभक्ति पर भाषण दिया और इस सौदे का बचाव किया।...अगले ही दिन काला 'चिट्ठा सामने' आ गया..." शिवसेना ने स्पष्ट तौर पर आरोप लगाया, "'मोदी राफेल सौदे से सीधे तौर पर जुड़े थे। रक्षा मंत्री, रक्षा सचिव जैसे प्रमुख लोगों को इससे दूर रखा गया।..."

मुद्रा योजना पर शिवसेना का 'बाउंसर'

शिवसेना ने 15 जनवरी 2019 को 'सामना' में मुद्रा योजना को लेकर मोदी सरकार पर बाउंसर फेंका। ''सामना'' ने लिखा है- "रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार मुद्रा योजना के तहत 2017-18 तक 2.46 लाख करोड़ रुपये के कर्ज वितरित किए गए हैं.....इसी की बकाया राशि 11 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। पहले से ही बकाए कर्ज के बोझ तले दबी हमारी अर्थव्यवस्था को ये 'छोटा' सा बोझा भी अब भारी पड़ने लगा है।"

2019 में मोदी के पहले इंटरव्यू पर भी शिवसेना ने खेला लॉफ्टेड शॉट

नरेंद्र मोदी ने 2019 के अपने पहले इंटरव्यू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतज़ार करने की बात कही थी। शिवसेना ने मोदी की इस ड्राइव को 45 डिग्री का एंगल देते हुए छह रनों लिफ्ट कर दिया। शिवसेना ने पार्टी के मुखपत्र ''सामना'' के संपादकीय में लिखा, "वह (मोदी) राम के नाम पर सत्ता में आए थे। हालांकि उनके मुताबिक, भगवान राम कानून से बड़े नहीं हैं। अब सवाल यह है कि अगर बहुमत वाली सरकार में मंदिर का निर्माण नहीं होगा तो कब बनेगा।"

शिवसेना ने पूछा कि गुजरात में सरदार वल्लभ भाई पटेल की भव्य प्रतिमा बनी, लेकिन राम मंदिर पर 'सरदार' वाला साहस क्यों नहीं दिखा पा रहे हैं नरेंद्र मोदी? शिवसेना ने राममंदिर आंदोलन के दौरान हुई मौत को नरसंहार बताते हुए भी बीजेपी और प्रधानमंत्री मोदी से तीखे सवाल किए, "किसने यह नरसंहार किया और क्यों? एक ओर सैकड़ों हिंदू कारसेवक मारे गए। साथ ही मुंबई बम धमाकों में दोनों पक्ष (हिंदू एवं मुस्लिम समुदाय) के सैकड़ों लोग मारे गए। अगर फैसला उच्चतम न्यायालय को ही करना था तो यह नरसंहार एवं खूनखराबा क्यों?"

मोदी के 'बाउंसर' मिशेल पर भी शिवसेना का करारा प्रहार

नये साल का आग़ाज़ होते ही शिवसेना ने अगस्ता वेस्टलैंड मामले में सोनिया गांधी और उनके बच्चे को फंसाने की कोशिश का सनसनीखेज आरोप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जड़ दिया। पांच राज्यों के चुनाव प्रचार के दौरान नरेंद्र मोदी के भाषण के हवाले से शिवसेना ने कहा कि पूछताछ के नतीजों का अनुमान पीएम ने पहले ही दे दिया था। शिवसेना ने 'सामना' में लिखा, "ये जो कोई मिशेल या फिशेल है, उसे दुबई से कब्जे में लेकर जब दिल्ली लाया गया तब 5 राज्यों का चुनाव प्रचार चरम पर था और भाजपा में खलबली मची हुई थी... प्रधानमंत्री मोदी ने एक-दो बड़ी जनसभाओं में मिशेल का उल्लेख कर कहा, देखो, अब क्या विस्फोट होता है, ब्रिटेन से दलाल आया है, अब मैं किसी को नहीं छोड़ूंगा। इन बातों का अर्थ अब समझ में आ रहा है।'

शिवसेना ने कहा, "यह संकेत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिया कि मिशेल, सोनिया गांधी और उनके बच्चे का नाम लेने वाला है। मिशेल की जांच शुरू होने से पहले ही मोदी ने गांधी की ओर उंगली दिखाकर जांच की दिशा स्पष्ट कर दी, यह थोड़ा हास्यास्पद लगता है।"

तीन राज्य छिन जाने के बाद बीजेपी पर शिवसेना का बाउंसर

तीन राज्य हाथ से छिन जाने के बाद बीजेपी पर शिवसेना ने बाउंसर फेंका। उद्धव ठाकरे ने कहा कि पराजय स्वीकार करने में अहंकार तो दिखा ही, मोदी-शाह की जोड़ी ने राहुल गांधी को जीत की बधाई तक नहीं दी। उद्धव ने राहुल गांधी को शिष्टाचारी बताते हुए मोदी-शाह की जोड़ी को अहंकारी करार दिया। क्रिकेट की भाषा में कहें तो यह गुडलेंथ स्पॉट पर बाउंसर रही। मुखपत्र 'सामना' में शिवसेना ने कहा "राहुल गांधी ने विनम्रता पूर्वक अपनी जीत स्वीकार की। उन्होंने बीजेपी शासित मुख्यमंत्रियों का भी शुक्रिया किया, लेकिन मोदी राष्ट्रनिर्माण में पंडित नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी के योगदान को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।....इस प्रकार का अहंकार सिर्फ महाभारत में देखा गया था।'

जब उद्धव ठाकरे ने कह डाला- 'चौकीदार चोर है'

जो भाषा राहुल बोलते हैं, उसकी ही नकल करते हुए उसी अंदाज में उद्धव ठाकरे नरेंद्र मोदी पर बाउंसर दागा। बल्कि, हाउज़ दैट की अपील करते हुए प्रधानमंत्री को चोर करार दिया। 25 दिसम्बर को इंडियन एक्सप्रेस में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे का बयान लीड ख़बर रही। विपक्ष तो राफेल को लेकर पीएम मोदी पर निशाना साध ही रहा था, मगर अब एनडीए में शामिल शिवसेना भी उसी राह पर दिखी।

जब शिवसेना ने टॉस किया - 'ठग्स ऑफ हिन्दुस्तान'

राफेल मामले में मोदी सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा कि उसने सीलबंद लिफाफे में जो कुछ बताया उसे समझने में सुप्रीम कोर्ट से चूक हुई है तो शिवसेना विपक्ष से दो कदम आगे बढ़ते हुए हमलावर दिखी। बीजेपी पर हमला बोलते उद्धव ने अपने लेख में लिखा, "...बंद लिफाफे की जानकारी 'अर्धसत्य' थी और अदालत ने कुछ तो गलत अर्थ लगा लिया है। ऐसा अब मोदी सरकार को कहना पड़ रहा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। इस पर सुप्रीम कोर्ट की हंसी उड़ी। मोदी सरकार बेनकाब हो गई और 'ठग्स ऑफ हिंदुस्तान' नामक फ्लॉप फिल्म दिल्ली में फिर से चमक उठी। देश को निश्चित तौर पर फंसाया किसने? सरकार ने या सुप्रीम कोर्ट ने? इसकी जांच होनी चाहिए।" 'सामना' के संपादकीय में लिखा गया- "अब ये सारा घोटाला मतलब 'टाइपिंग' या 'ड्रॉफ्टिंग मिस्टेक' होने की बात कहना मतलब वैचारिक दिवालियापन है। 'सरकार ने अदालत को फंसाया?' या 'कोर्ट ने देश को फंसाया?' इस तरह के सवाल उठे हैं।"

बुलन्दशहर की घटना पर बीजेपी पर बाउंसर

पांच राज्यों में चुनाव के दौरान बुलन्दशहर की घटना को शिवसेना ने प्रायोजित बताकर बीजेपी पर बाउंसर दागा। इस घटना की तुलना 2014 के चुनाव से पहले हुई मुजफ्फरनगर और कैराना की घटना से की। 'सामना' के संपादकीय पर गौर करें, "इसलिए 2014 के चुनाव से पहले जिस तरह 'मुजफ्फरनगर' और बीच के दिनों में 'कैराना' कराया गया, वैसा अब 'बुलंदशहर' में कराया जा रहा है क्या?"

शिवसेना ने इस मामले में अधिकतम बाउंसर फेंक डाले। व्यंग्य की स्विंग में उसमें मिला डाली। कहा कि गो मांस और गो हत्या जैसे मुद्दे गोवा, मिजोरम, नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा जैसे राज्यों में भी हैं क्योंकि वहां तो खुलेआम गोमांस खाया जाता है। मगर उन राज्यों में कभी उत्पात नहीं मचा या मॉब लिंचिंग जैसा मामला नहीं हुआ क्योंकि उन राज्यों में लोकसभा की इक्का-दुक्का सीटें हैं। संपादकीय में आगे और भी बाउंसर महसूस किए जा सकते हैं, "उत्तर प्रदेश की 80 सीटें 2019 में भी भाजपा के लिए 'गेम चेंजर' होने वाली हैं। उसी के लिए गो हत्या का 'संशय पिशाच' लोगों की गर्दन पर बैठाकर धार्मिक उन्माद का और वोटों के ध्रुवीकरण का वही रक्तरंजित 'पैटर्न' फिर से चलाने की कोशिश शुरू की है क्या?"

'राममंदिर' मुद्दे पर भी बीजेपी से फील्डिंग करा रही है शिवसेना

शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे ने 20 दिसम्बर 2018 को कहा कि राम मंदिर के नाम पर सत्ता में आयी बीजेपी इसी नाम पर सत्ता से बाहर होगी। 3 राज्यों में करारी पराजय के बाद भी बीजेपी कुम्भकर्णी निद्रा से नहीं जाग रही है। शिवसेना ने तंज कसते हुए बीजेपी से पूछा कि भगवान राम के अच्छे दिन कब आएंगे? 'सामना' के संपादकीय का एक हिस्सा पढ़िए, "भगवान राम के अच्छे दिन कब आएंगे, जो 25 बरस से खुले तंबू में रह रहे हैं जबकि सत्ता पर बैठे लोग अपनी कुर्सियां गरम कर रहे हैं।" शिवसेना ने यह कहते हुए व्यंग्यबाण भी चलाए कि विवादित स्थल पर राम मंदिर का निर्माण बीजेपी के लिए जुमला बन गया है। 'सामना' के संपादकीय में इस बारे में लिखा गया, "हालांकि ऐसा लगता है कि यह मुद्दा भी पार्टी के लिए एक और 'जुमला' बन गया है।"

23 नवंबर 2018 को 'सामना' के संपादकीय की चर्चा सुर्खियां बनीं। इस संपादकीय में राम मंदिर के निर्माण की तारीख तय करने की मांग शिवसेना ने बीजेपी सरकार से की। वहीं शिवसेना ने बीजेपी को आगाह भी किया। संपादकीय में कहा गया है कि "आप राम मंदिर के निर्माण की तारीख क्यों तय नहीं कर रहे हैं? अगर मंदिर निर्माण का मु्द्दा आपके हाथ से निकल गया तो 2019 में आपकी रोजी-रोटी के अलावा कई लोगों की जुबान बंद हो जाएगी।" 2019 का ये चुनावी मैदान क्रिकेट के रंग में रोमांचक हो उठा है। शिवसेना के खेल ने बीजेपी पर ऐसा दबाव बनाया है कि कांग्रेस का खेल भी अब निखर आया है। सवाल ये है कि क्या कांग्रेस को फायदा पहुंचान के लिए आक्रामक खेल दिखा रही है शिवसेना या फिर बीजेपी का खेल बिगाड़ने के लिए है उसका यह आक्रामक खेल?

(ये लेखक के निजी विचार हैं)

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English summary
Shiv Sena is teaching the BJP Narendra Modi Amit Shah Uddhav Thackeray Lok Sabha Elctions
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