NCP and Sharad Pawar: बेटी को कमान, भतीजा फिर भी आलाकमान

शरद पवार ने भतीजे अजीत पवार को कमजोर करने के लिए पार्टी में दो कार्यकारी अध्यक्ष बना दिये हैं जिसमें उनकी बेटी भी है। कमान भले ही बेटी के हाथ में हो लेकिन शरद पवार के बाद एनसीपी के आलाकमान अजीत पवार ही रहनेवाले हैं।

NCP and Sharad Pawar: जून 2022 में एकनाथ शिंदे अपनी ही पार्टी शिवसेना के 39 विधायकों के साथ विद्रोह कर उद्धव सरकार को गिराकर खुद मुख्यमंत्री बन गए थे। उस समय शरद पवार के भतीजे और राज्य के उपमुख्यमंत्री रहे अजीत पवार ने राष्ट्रवादी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच कहा था कि अगर उनके भाजपा के साथ जाने को शरद पवार साहब ने समर्थन दिया होता तो आज हमें सत्ता से बाहर नहीं होना पड़ता और पूरे पांच साल हम सत्ता में रहते। शरद पवार सरकार गिरने का अफसोस मना रहे थे तो उनके भतीजे अजीत पवार भाजपा के साथ न रह पाने का अफसोस मना रहे थे।

एकनाथ शिंदे के मुख्यमंत्री बनने के बाद से महाराष्ट्र की राजनीति में लगातार हर सप्ताह इस बात पर अटकलें लगाई जा रही थीं कि क्या राष्ट्रवादी कांग्रेस में भी कोई शिंदे उभरने वाला है? इशारा अजीत पवार की ओर था और शरद पवार भी भतीजे के बयानों और मीडिया की लगातार अटकलों से परेशान थे और इसका कोई स्थायी समाधान चाह रहे थे। एनसीपी और एमवीए नेतृत्व की तरफ से एक के बाद एक बयानों ने इन अफवाहों को हवा दी कि पवार के भतीजे और विधानसभा में नेता विपक्ष अजीत पवार के नेतृत्व में एनसीपी का एक खेमा बगावत कर सकता है और महाराष्ट्र की भाजपा सरकार से हाथ मिला सकता है।

Sharad Pawar big decision appointed working president Supriya Sule but high command is Ajit Pawar

लेकिन शरद पवार ऐसे सियासी सुजान है जो किसी भी मुश्किल वक्त से सकुशल बाहर निकल आने का माद्दा रखते है। 80 वर्ष की उम्र पार कर लेने के बाद भी अपने राजनीतिक तरकश में वो ऐसे कई तीर रखते हैं जो उचित समय पर विरोधियों पर चलाने के लिए होते हैं। ऐसा ही एक तीर शरद पवार ने 2 मई को राष्ट्रवादी कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर अपने भतीजे अजीत पवार पर लगाम लगाने के लिए चला था। शरद पवार के इस कदम को अजीत पवार के साथ सियासी शतरंज में उनकी चाल के तौर पर देखा गया। अपने इस्तीफे की घोषणा शरद पवार ने अपनी आत्मकथा के नए संस्करण के विमोचन के मौके पर उस वक्त की जब अजीत पवार भाजपा के साथ हाथ मिलाने की रणनीति को अंतिम रूप देने में व्यस्त थे।

शरद पवार ने अपने समर्थकों को हैरानी में डालते हुए कहा था कि वे 'राष्ट्रवादी कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे रहे हैं।' शरद पवार ने आगे कहा कि वे 'अपना राज्यसभा का कार्यकाल पूरा करेंगे लेकिन भविष्य में चुनाव नहीं लड़ेगे।' लगे हाथ शरद पवार ने नया अध्यक्ष चुनने के लिए एक कमेटी भी बना दी।

शरद पवार के इस्तीफे के बाद महाराष्ट्र की राजनीति को करीब से समझने वाले जानते थे कि शरद पवार का इस्तीफा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में नेतृत्व बदलने का मामला नहीं है, बल्कि शरद पवार और उनके भतीजे अजीत पवार के बीच गहरे हो चुके अंदरूनी सत्ता संघर्ष की उपज है। असल में शरद पवार ने इस्तीफे का दांव चलकर अजीत पवार को अलग-थलग करने का इमोशनल कार्ड खेला था। शरद पवार जानते थे कि उनके इस्तीफे के बाद पार्टी उनके पीछे गोलबंद हो जाएगी और अजीत पवार को बता दिया जाएगा कि असली बॉस कौन है। हुआ भी वही। पार्टी के तमाम नेताओं के मान मनौव्वल के बाद शरद पवार ने 5 मई को अध्यक्ष पद से अपने इस्तीफे को वापस लेकर बता दिया कि राष्ट्रवादी कांग्रेस की असली ताकत कौन है।

5 मई को अध्यक्ष पद से इस्तीफा वापस लेकर अजीत के पार्टी तोड़ने की संभावनाओं पर विराम ही नहीं लगाया बल्कि एक महीने बाद 10 जून को पार्टी के 25 वें स्थापना दिवस पर अपनी बेटी और सांसद सुप्रिया सुले और अपने भरोसेमंद प्रफुल्ल पटेल को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर अपने भतीजे को पार्टी के भीतर अपनी हैसियत से भी अवगत करा दिया।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के इतिहास में पहली बार कार्यकारी अध्यक्ष का पद बनाया गया है। कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद सुप्रिया अब पार्टी के भीतर शरद पवार के बाद दूसरे नंबर की हैसियत में आ गई है। अभी तक महाराष्ट्र से जुड़ा फैसला शरद पवार अपने भतीजे अजीत पवार और महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटील की सलाह से करते थे। शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले जब से राजनीति में सक्रिय हुई हैं तब से उन्हें दिल्ली की राजनीति की दीक्षा दी गई है। शरद पवार ने सुप्रिया को अपनी सीट बारामती से सांसद बनाया और दिल्ली की राजनीति में सक्रिय किया। दिल्ली में जब भी शरद पवार के घर विपक्ष के नेताओं की बैठक हुई, सुप्रिया सुले ने घर आने वाले नेताओं के चाय पानी की व्यवस्था देखने के साथ दिल्ली के दावंपेचों को समझने की कोशिश भी की। यह बात अलग है कि राजनीति में इतने साल गुजारने और शरद पवार की राजनीति को करीब से देखने के बाद भी सुप्रिया सुले दिल्ली की राजनीति में अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो सकी।

शरद पवार ने सुप्रिया सुले को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष और महाराष्ट्र का प्रभार देकर भी यह साफ कर दिया है कि बेटी भतीजे से बढ़कर है और वही उनकी राजनीतिक वारिस होगी। अजीत पवार के लिए फिलहाल संकेत साफ है कि पार्टी में अजीत पवार को हर फैसले के लिए अपनी छोटी बहन और राजनीतिक अनुभव में भी बहुत छोटी सुप्रिया सुले से अनुमति लेनी होगी। सुप्रिया सुले के महाराष्ट्र के भी प्रभारी होने के नाते आने वाले नगरीय निकाय चुनाव, लोकसभा चुनाव और उसके तुरंत बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में टिकट बंटवारे में सुप्रिया सुले की मुहर अंतिम होगी। अजीत पवार सिर्फ विधानसभा में विपक्ष के नेता बनकर रह गए हैं।

हालांकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में अजीत पवार के समर्थक एक नेता ने शरद पवार के इस निर्णय पर व्यंग करते हुए कहा कि 'महाराष्ट्र में अजीत पवार के बिना पत्ता हिलेगा नहीं और दिल्ली में करने के लिए कुछ है नहीं। ऐसे में कोई भी कार्यकारी अध्यक्ष बन जाए फैसला तो अजीत दादा को लेना है और पार्टी को उसे मानना है।'

अजीत पवार को दरकिनार करने की कोशिश करने वाले शरद पवार भी अजीत पवार की विधायकों में पकड़ से वाफिक है। शरद पवार भी इस बात को जानते हैं कि वह एक सीमा से अधिक अपने भतीजे को अलग थलग करने का जोखिम नहीं उठा सकते क्योंकि ज्यादातर विधायकों की वफादारी अजीत के साथ है। इसीलिए शरद पवार कह रहे हैं कि अजीत पवार के पास विपक्ष के नेता की बड़ी जिम्मेवारी है। ऐसे में उनको सुप्रिया सुले और प्रफुल्ल पटेल से कम आंकना ठीक नहीं है।

भले ही शरद पवार ने अपनी बेटी को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर यह संकेत दिए हों कि आने वाले समय में उनकी बेटी ही पार्टी की सर्वेसर्वा होगी, लेकिन पार्टी को टूट से बचाना है तो उन्हें आने वाले दिनों में अपने महत्वाकांक्षी भतीजे को भी भरोसे में लेना होगा। हालांकि अजीत पवार को भले ही सुप्रिया सुले को कार्यकारी अध्यक्ष बनाने का निर्णय रास न आ रहा हो लेकिन पार्टी से बगावत करना अजीत पवार के लिए भी इतना आसान नहीं होगा।

Recommended Video

    NCP नेता Supriya Sule ने Ajit Pawar को लेकर कही बड़ी बात | Maharashtra Politics | वनइंडिया हिंदी

    अजीत पवार के एक करीबी नेता का कहना है कि "अजीत पवार के भाजपा में शामिल होने की संभावना नहीं के बराबर है लेकिन वह भाजपा के साथ गठबंधन में उत्सुक हो सकते हैं।" लेकिन अजीत पवार इस बात को समझते हैं कि शरद पवार की मजबूत पकड़ वाले पश्चिम महाराष्ट्र और मराठवाड़ा मेें शरद पवार से पंगा लेकर जीतना आसान नहीं होगा। अजीत पवार का राजनीतिक क्षेत्र वही है जो शरद पवार का क्षेत्र है। दोनों नेताओं का मतदाता आधार भी साझा है। ऐसे में शरद पवार को भरोसे में लिए बगैर अजीत पवार का कोई भी कदम उनको राजनीतिक रूप से महत्वहीन कर सकता है।

    (इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+