Schemes for SMEs: आयकर के नये प्रावधान से लघु व सूक्ष्म उद्यम को मिलेगी ताकत
केन्द्र सरकार ने आयकर में कुछ ऐसे प्रावधान कर दिये हैं जिससे लघु उद्योगों को विशेष लाभ होगा। जरूरी यह है कि लघु उद्यमी इनके बारे में जानें और इनका लाभ लें।

Schemes for SMEs: कुछ साल पहले जब सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम की परिभाषा में 250 करोड़ की टर्नओवर वाली कंपनियों को भी लाया गया था, तब कम टर्नओवर वाले एमएसएमई उद्यमियों के मन में आशंका आ गई थी। उनकी चिंता थी कि क्या 250 करोड़ की टर्नओवर वाली कंपनियों को भी एमएसएमई मानना जायज है? इस टर्नओवर की कंपनियां कमोबेश छोटी तो नहीं कही जा सकती। उन्हें यह भी आशंका थी कि कहीं एमएसएमई के इस घराने में परिभाषा के जरिये मध्यम नाम की बड़ी मछली का प्रवेश इस अधिनियम के पूरे विजन को ना खा ले। कहीं सरकारी नियम के अनुपालन की बाध्यता में निजी और सरकारी व्यवस्था इनके द्वारा कमाई ना करने लगे।
चूंकि इतने बड़े टर्नओवर वालों के पास तो कानून अनुपालन के लिए एक टीम भी होती है अतः उनके साथ सरकार और बड़े घराने बिजनेस करने में ज्यादा सहज होंगे। एमएसएमई के पोषण के लिए 25 फीसदी सरकारी खरीद की बाध्यता का दुरूपयोग हो सकता था। लोग मध्यम वालों के साथ बिजनेस कर 25 फीसदी का कोटा पूरा कर लेते और लघु एवं सूक्ष्म मध्यम पीछे छूट जाते। इससे सबसे ज्यादा चिंतित स्माल और माइक्रो उद्यम थे।
स्माल इंडस्ट्रीज मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन जिसे सीमा भी कहते हैं, के मुख्य आर्थिक सलाहकार के तौर पर लेखक ने तत्कालीन केंद्रीय राज्य मंत्री एमएसएमई प्रताप सारंगी से वर्ष 2020 में आमने सामने वर्चुअल बातचीत के दौरान इस चिंता को रेखांकित किया था। एमएसएमई अधिनियम के तहत माइक्रो एंटरप्राइज के लिए विशेष व्यवस्था बनाने और एक अलग सेल का प्रस्ताव रखा गया था ताकि स्माल और माइक्रो उद्यम को इन बड़े मध्यम आकार वाले उद्योगों के बोझ से बचाया जा सके। साथ ही एमएसएमई के सामने आ रही नगदी समस्या की तरफ भी ध्यान आकर्षित कराया गया था क्योंकि इस सेगमेंट की सबसे बड़ी समस्या पूंजी की समस्या और बकाया वसूली ही है। उस समय उन्होंने 'सीमा' की तरफ से दिए गए इस प्रस्ताव पर सहमति भी जताई थी।
वर्ष 2020 में तत्कालीन केंद्रीय राज्य मंत्री एमएसएमई प्रताप सारंगी को दिए गए उस प्रस्ताव की गूंज हमें वर्ष 2023 के वित्तीय बजट में दिखाई दी जब भारत सरकार ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम के लघु और सूक्ष्म को मध्यम से अलग रखते हुए सिर्फ इन्हीं के लिए एक प्रस्ताव दिया। यह बताता है कि सरकार ने सूक्ष्म और लघु उद्यम की इस चिंता को साधा। इस बार के बजट में सूक्ष्म एवं लघु उद्यम को सिर्फ अलग से रेखांकित ही नहीं किया गया। सूक्ष्म एवं लघु उद्यम की जो सबसे बड़ी समस्या थी, नगदी तरलता की, उसका भी समाधान आयकर की धारा 43 बी में एक उपधारा और एक शर्त जोड़कर किया गया।
अब आयकर की संशोधित धारा 43बी के तहत किसी भी बिजनेस करदाता को सूक्ष्म एवं लघु उद्यम से ख़रीदे गए खर्चों पर खर्चा घटाने की छूट तभी मिलेगी जब वह वास्तव में उन्हें भुगतान करते हैं। अब बैलेंस शीट में यदि क्रेता व्यापारी ने सूक्ष्म एवं लघु उद्यम को बकाया दिखाया तो आयकर गणना में सीधे सीधे यह बकाया राशि करयोग्य आय की गणना में जोड़ दी जायेगी। इसका सीधा मतलब हुआ कि कानूनन इस बकाये पर भी टैक्स उस क्रेता व्यापारी को देना पड़ेगा जिसने सूक्ष्म एवं लघु उद्यम का बकाया रखा है। उस क्रेता व्यापारी को उस साल में ही छूट मिलेगी जिस साल में वाकई में वह इस बकाया का भुगतान करेगा।
पहले बहुत से बिजनेस वाले जो लोग सूक्ष्म एवं लघु उद्यम का बिल ही बुक नहीं करके कानून अनुपालन से बच जाने की जुगत लगाते थे उसके लिए भी कानून में संशोधन किया गया है। अब अगर क्रेता व्यापारी का कोई अनुबंध या परचेज ऑर्डर सप्लायर के साथ है तो अधिकतम 45 दिन के अंदर उसे उस सूक्ष्म एवं लघु उद्यम को भुगतान करना है और अगर ऐसा कोई भी अनुबंध नहीं है तो कानूनन 15 दिन के अंदर ही भुगतान करना है। यदि यह तिथि पार होती है तो इसके गणना और इसके डिस्क्लोजर के लिए ऑडिटर को भी जिम्मेदार बनाया गया है। यह भी ध्यान दिया गया है कि भले ही अनुबंध हो जाए लेकिन क्रेडिट पीरियड कानून की नजर में 45 दिन से अधिक का नहीं हो सकता है।
इस 15 दिन या 45 दिन की गणना के भ्रम को भी सरकार ने दूर किया है ताकि भुगतान के समय कोई विवाद बता कर पेमेंट रोक कर पेमेंट विलम्ब करने का बहाना ना बना ले। इसके लिए सरकार ने बोला है कि यदि माल या सेवा को लेकर कोई शिकायत है तो वह उसकी प्राप्ति के 15 दिन के अंदर ही उठाना होगा और वह शिकायत रिकॉर्ड में होना चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो 15 या 45 दिन की गणना माल या सेवा की प्राप्ति दिन से होगी और यदि शिकायत नियत अवधि में लिखित में कर दी गयी है तो उस दिन से 15 या 45 दिन की गणना शुरू होगी जिस दिन इस शिकायत का निवारण हुआ है।
कुल मिला कर कह सकते हैं कि आयकर का यह प्रावधान लघु एवं सूक्ष्म उद्यम के जीवन को बेहतर बनायेगा उनकी तरलता की समस्या को दूर करेगा। अब लघु एवं सूक्ष्म उद्यम को करना यह है कि जल्द से जल्द उन्हें उद्यम आधार ले लेना है और प्रत्येक बिल पर उस उद्यम आधार का उल्लेख करना है। साथ ही वह लघु या सूक्ष्म ईकाई हैं इसका भी उल्लेख कर देना है। बिल में दिए जाने वाले अन्य विवरणों के साथ यह बदलाव उनके बिजनेस के कैश फ्लो को दुरुस्त कर सकता है। एक बार बिल के विवरण में आपने इसका उल्लेख कर दिया तो कोई यह कह कर नहीं बच सकता कि हमें तो मालूम ही नहीं पड़ा कि आप लघु एवं सूक्ष्म उद्यम हो।
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भारत के आर्थिक परिदृश्य में सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम हमेशा से प्रासंगिक रहें हैं इसीलिए इन्हे भारतीय अर्थव्यवस्था का मेरुदंड कहा जाता है। यह देश के उत्पादन और सेवाओं के वितरण के लिए देश की रक्त धमनियों के समान हैं। अर्थ का प्रवाह समान रूप से होता रहे, आय वितरण का न्यायिक चरित्र बना रहे इसके लिए सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम का विकास एवं इनका ख्याल रखना आवश्यक है।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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