Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Republic Day 2023 : लोकतांत्रिक गणतंत्र की अनूठी मिसाल है भारत

भारतीय गणतंत्र ने अपने 73 वर्ष पूरे कर लिए हैं और आज 74वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। इन 73 सालों में भारत ने लोकतांत्रिक गणतंत्र के रूप में दुनिया के सामने एक आदर्श मिसाल प्रस्तुत की है।

Republic Day 2023 India is a unique example of a democratic republic

Republic Day 2023: आज से लगभग 2600 वर्ष पूर्व गणतंत्रात्मक व्यवस्था के आधार पर कई गणराज्य अपना राज-काज चलाते थे और इनमें कपिलवस्तु के शाक्य और वैशाली के लिच्छवी गणराज्य तो विशेष उल्लेखनीय हैं। तत्कालीन लिच्छवी गणराज्य में किसी आधुनिक गणतंत्र की तरह शासन के लिए 'सभा' और 'समिति' नामक दो सदन थे। वहां विचार-विमर्श कर आम सहमति से राज्य एवं प्रजा के हित के लिए निर्णय लिए जाते थे। न केवल ऐतिहासिक दृष्टिकोण से कुछ गणराज्यों का स्वरूप गणतंत्रात्मक था, बल्कि भारत के समाज का मूल चरित्र भी लोकतांत्रिक रहा है।

जीवन और जगत के प्रति भिन्न-भिन्न दृष्टिकोण के प्रति जैसी व्यापक स्वीकार्यता भारत में रही, वह अन्यत्र दुर्लभ है। आधुनिक समझे जाने वाले यूरोप एवं अमेरिका में भी बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ या मध्य में जाकर महिलाओं को मतदान भर का अधिकार मिला, वहीं भारत में तो गार्गी, मैत्रेयी, अपाला, घोषा, लोपामुद्रा, भामती, विद्योत्तमा जैसी तमाम विदुषी नारियां भारत की ऋषि-संस्कृति को आगे बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण योगदान दे रही थीं। स्वाभाविक है कि स्वतंत्रता-प्राप्ति के साथ ही इस देश में व्यवस्थागत स्तर पर कोई लैंगिंक भेद नहीं रखा गया। जाति, पंथ, क्षेत्र एवं लिंग से परे सभी को क़ानून एवं संविधान की दृष्टि में संविधान-सभा द्वारा एकमत से बराबर का दर्जा दिया गया।

ऐसा इसलिए संभव हुआ कि भारतीय संस्कृति की मूल प्रेरणा, मूल भावना 'सर्वे भवंतु सुखिनः' या 'वसुधैव कुटुंबकम' की है। हमारी समाज-रचना की सबसे छोटी ईकाई परिवार है। हमारे परिवारों से ही लोकतांत्रिक मूल्यों का संस्कार मिलना प्रारंभ हो जाता है। बचपन से ही सबकी सुनने और सुने हुए में से सार-सार को ग्रहण कर आगे बढ़ने की सीख मिलती है। थोपने की मानसिकता भारतीय समाज एवं परिवार की कभी नहीं रही। भिन्न-भिन्न मतों के प्रति सहज स्वीकार्यता सही मायने में भारत को गणतांत्रिक देश बनाती है।

26 जनवरी 1950 से प्रारंभ हुई हमारी आधुनिक गणतांत्रिक यात्रा भी बड़ी समृद्ध रही है। आपातकाल के एक उदाहरण को छोड़कर भारत के किसी शासक ने लोकतांत्रिक मूल्यों को ठेस पहुंचाने की कभी चेष्टा नहीं की। उस समय किसी सदन से पारित कराए बिना संविधान की प्रस्तावना में 'सोशलिस्ट' और 'सेकुलर' शब्द जोड़ दिये गये, जिसकी कोई आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि ये मूल्य तो भारतीय (सनातन) संस्कृति या परंपरा में स्वाभाविक रूप से विद्यमान हैं।

इसके अलावा स्वतंत्रता से लेकर आज तक हमारी व्यवस्था का स्वर सदैव लोकोन्मुखी रहा है। हर सरकार ने अपने-अपने स्तर पर दलितों- वंचितों- स्त्रियों की भागीदारी बढ़ाने की चेष्टा की है। जातीय एवं लैंगिंक स्तर पर भेदभाव की जितनी खबरें सुर्खियां बटोरती हैं, उससे बहुत बड़ी संख्या में ऐसी तस्वीरें हैं, जो सौहार्द्र एवं सहयोग की मिसालें पेश करती हैं। जातीय भेदभाव कम हुआ है। आधी आबादी के प्रति दृष्टिकोण दिन-प्रतिदिन और उदार होता गया है। जंजीरें पिघली हैं, अवसरों के नए-नए द्वार खुले हैं।

समाज के एक सिरे पर आया वांछित बदलाव बिना किसी भेदभाव के अंतिम सिरे तक पहुंचा है। लोग अपनी मर्जी और रुचि का जीवन जी रहे हैं। साधन-संसाधनों में अत्यधिक वृद्धि हुई है। बुनियादी ढांचे में आशातीत सुधार हुआ है। शिक्षा के प्रति ज़बरदस्त जागरुकता बढ़ी है। राजनीति से लेकर शासन-प्रशासन तक का उत्तरोत्तर लोकतांत्रीकरण हुआ है।

गांव-ग़रीब-किसान तक सरकारी योजनाएं पहुंची हैं। जटिल भू-सांस्कृतिक यथार्थ वाले देश में विकास की ऐसी चौमुखी बयार बहना कोई साधारण बात नहीं है। भाषा, जाति, प्रांत, मज़हब से परे सबको साथ लेकर चलने का ईमानदार प्रयास हुआ है। पानी, बिजली, सड़क, शिक्षा एवं चिकित्सा पर सुदूरवर्ती क्षेत्रों में भी संतोषजनक काम हुआ है।

यह बात हमें तब बेहतर समझ आती है, जब हम अपने देश के साथ ही स्वतंत्र हुए अन्य अनेक एशियाई एवं पड़ोसी मुल्कों की तस्वीर देखते हैं। विज्ञान, तकनीक, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, उपग्रह, चिकित्सा, सुरक्षा, सैन्य आदि क्षेत्रों में भारत की उल्लेखनीय प्रगति दुनिया का ध्यान आकर्षित कर रही है। देश में आई डिजिटल क्रांति की तस्वीरें गांव-गली-चौक-चौराहे पर आम तौर पर देखी जा सकती हैं। ब्रिटेन को पछाड़कर भारत का दुनिया की पांचवीं बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनना और चौथी बड़ी सैन्य-शक्ति होना - कोई साधारण उपलब्धि नहीं। आज भारत दुनिया के 20 शक्तिशाली देशों के समूह जी-20 की अध्यक्षता कर रहा है। संपूर्ण विश्व में भारत का मान-सम्मान दिनोंदिन बढ़ा है।

लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति हमारी आस्था बहुत गहरी रही है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि हमारे देश की किसी सरकार ने चुनाव में मिली पराजय के पश्चात सत्ता हस्तांतरण में कभी कोई आनाकानी नहीं की, किसी संस्था ने सीमाओं का अतिक्रमण कर अपने अधिकारों के उल्लंघन की कुचेष्टा नहीं की, सेना और न्यायपालिका जैसी शक्तिशाली संस्था भी अपनी परिधि एवं सीमाओं में रहकर ही कर्त्तव्य-पालन की भावना से कार्य करती रही है।

विधायिका और कार्यपालिका तो जनता के प्रति कम या अधिक जवाबदेह रही ही है। यहां की आम जनता, जिसे कई बार ग़ैर-जिम्मेदार कहकर प्रचारित किया जाता रहा है, उसने तो संकट की हर घड़ी में अपनी देशभक्ति एवं कर्त्तव्यपरायणता का ठोस परिचय दिया है। चाहे पाकिस्तान से युद्ध हो या चीन से, चाहे कोई प्राकृतिक आपदा हो या कोविड जैसी महामारी, भारत के नागरिकों ने अभूतपूर्व संयम, त्याग, अनुशासन का परिचय दिया है।

न केवल कोविड जैसी महामारी या प्राकृतिक आपदाओं के मोर्चे पर बल्कि अन्य अनेकानेक मोर्चे पर गण पर आधारित हमारा तंत्र दिन-प्रतिदिन परिपक्व एवं उत्तरदायी हुआ है और यह जन-प्रतिनिधि और जनता दोनों के स्तर पर हुआ है। यह यात्रा अभी जारी है। हम मीलों चले हैं और अभी मीलों आगे जाना है।

Recommended Video

    Republic Day Parade 2023: Kartavya Path पर खतरनाक ऊंट दस्ते पर सवार महिला जांबाज़ | वनइंडिया हिंदी

    सब प्रकार की जटिलताओं एवं अंतर्विरोधों को साधते हुए भारत ने दुनिया के सामने सर्वसमावेशी एवं लोकतांत्रिक गणतंत्र के रूप में एक अनूठी एवं अनुकरणीय मिसाल पेश की है। आज यूरोप-अमेरिका से लेकर, चीन जैसे बाहरी चमक-दमक एवं ऊपर से सर्वसुविधासंपन्न दिखने वाले देशों को भी भारतवर्ष से लोकतांत्रिक मूल्य एवं आचरण सीखने की महती आवश्यकता है।

    यह भी पढ़ें: Republic Day: नेशनल वॉर मेमोरियल पर पीएम ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि

    (इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

    More From
    Prev
    Next
    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+