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Religious Conversion: धर्मांतरण की छिटपुट घटनाएं या भविष्य का भयावह संकेत?

माइनॉरिटी कम्युनिटी द्वारा जिस तरह से मेजोरिटी कम्युनिटी के लोगों का धर्मांतरण करवाने की खबरें आ रही हैं वो किसी भयावह भविष्य का संकेत कर रही हैं। एक ऐसा भविष्य जिसमें उदार और सहिष्णु भारत ही नष्ट हो जाएगा।

Religious Conversion a sound of sinister sign of the future?

Religious Conversion: आमतौर पर किसी देश की माइनॉरिटी कम्युनिटी इस बात का आरोप लगाती है कि उस पर धर्म बदलने का दबाव है या फिर ऐसा कोई षड्यंत्र उसके साथ रचा जा रहा है। लेकिन भारत में इसका उलट हो रहा है। यहां की मेजोरिटी कम्युनिटी अपने मॉइनॉरिटी कम्युनिटी पर ऐसे आरोप लगाती है और उनके द्वारा किये जानेवाले ऐसे काम को बंद करने की मांग करती है। यहां माइनॉरिटी कम्युनिटी ही मेजोरिटी को कुतर कर अपना विस्तार कर रही है।

इस्लाम हो या चर्च मिशनरी धर्मांतरण के लिए बदनाम ये दोनों ही समूह अपने अपने तरीके से कुचक्र रचते हैं। अगर यूरोप को इस्लाम में कन्वर्ट करने का अभियान इस्लामिक समूहों द्वारा चलाया जा रहा है तो नेपाल या भारत में यही कुचक्र चर्च मिशनरी भी चला रहे हैं। उनके तरीके थोड़े अलग हैं लेकिन आखिरी उद्देश्य उनका भी लोगों को क्रिश्चियनिटी में कन्वर्ट करना ही होता है। मानों वैश्विक स्तर पर इस्लाम और क्रिश्चियनिटी में कोई वार चल रही है जिसमें दोनों के सामने यह लक्ष्य है कि कौन दुनिया का इकलौता मजहब बना रहेगा जिसे उसकी मान्यता के मुताबिक 'आखिरत' या 'डे आफ जजमेन्ट' के दिन जन्नत या हेवन मिलेगा।

इन दोनों ही समूहों के शिकार ऐसे लोग हो रहे हैं जो इन दोनों की ऐसी सोच से पूरी तरह से अनभिज्ञ हैं। भारत में हाल के दिनों में जिस तरह धर्मांतरण की घटनाएं सामने आयी हैं उन्हें देखकर भविष्य का भयावह स्वरूप दिखाई देता है। दामोह के गंगा जमुना पब्लिक स्कूल में छोटे छोटे स्कूली बच्चों को इस्लाम में कन्वर्ट किया जा रहा था। वहां की तीन शिक्षिकाओं को इस्लाम कबूल करवा दिया गया। मामले का भेद तब खुला जब हिन्दू और जैन लड़कियों की हिजाब में फोटो लगाकर बैनर पोस्टर चिपकाये गये। सोशल मीडिया पर हंगामा हुआ और जांच पड़ताल हुई तो पता चला कि गंगा जमुनी तहजीब की आड़ में धर्मांतरण का कुचक्र रचा जा रहा था।

इसी तरह एक गेमिंग एप्प के जरिए बच्चों के कन्वर्जन का मामला सामने आया है। मुंबई के पास मुंब्रा का रहने वाला शाहनवाज गेमिंग एप्प के जरिए बच्चों का धर्मांतरण करवा रहा था। इसके लिए उसने किशोर नौजवानों को अपना टार्गेट बनाया था। आश्चर्य की बात यह है कि वह स्वयं भी अपने आप को एक धर्मांतरित मुस्लिम बताता था जो इस्लाम कबूल करने से पहले ईसाई था। वह बच्चों और किशोरों से कहता था कि उसकी जिन्दगी में बहुत परेशानियां थी। जब से इस्लाम कबूल कर लिया है सब परेशानियां दूर हो गयी हैं।

इसके साथ ही गेमिंग एप्प में सफलता के लिए अल्लाह का नाम लेने, नमाज पढ़ने के लिए प्रेरित करता था। बद्दो नाम से गेमिंग ऐप्प पर मौजूद शाहनवाज दावा करता था कि ऐसा करने पर वो गेम में ज्यादा तेजी से जीतेंगे। मुंबई के उपनगर मुंब्रा में उसने बच्चों और किशोरों को बड़ी संख्या में धर्मांतरण करवाया था। अब वह मुंबई के बाहर उत्तर भारत के इलाकों में अपनी पैठ बना रहा था। धर्मांतरण का यह नया तरीका देश भर में चर्चा का विषय इसलिए बना है क्योंकि यहां सीधे किशोर नौजवानों को टार्गेट किया जा रहा था।

मामला तब खुला जब गाजियाबाद में एक नाबालिग बच्चे को उसकी बहन ने नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद जाते हुए देख लिया। अब जब पुलिस मामले की जांच कर रही है तो पता चला है कि इसमें गाजियाबाद का एक स्थानीय मौलवी भी शामिल था। अब तक जो जानकारी आयी है उसके मुताबिक गाजियाबाद में दो तथा फरीदाबाद और चंडीगढ में एक एक लड़के का धर्मांतरण करवाया गया है। खुद शाहनवाज जिस मुंब्रा का रहनेवाला है वहां उसने लगभग 400 किशोरों या नौजवानों को इस्लाम कबूल करवाया है।

बहरहाल, ये मामला सामने आने के बाद बाल आयोग ने सूचना प्रसारण मंत्रालय को पत्र लिखकर फोर्ट नाइट गेम की जांच करने के लिए कहा है। फोर्ट नाइट वही गेमिंग एप्प है जिसके जरिए बच्चों और किशोर नौजवान का धर्मांतरण करवाया जा रहा था। हालांकि पुलिस जांच शुरु होने के बाद अब बद्दो फरार है लेकिन सवाल सिर्फ उसकी फरारी या गिरफ्तारी का नहीं है। सवाल तो उस मानसिकता का है जो अपने धर्म के प्रचार के नाम पर हर प्रकार से धर्मांतरण का कुचक्र रच रहे हैं।

असल में ये घटनाएं वो हैं जो सतह पर दिखाई दे रही हैं। सतह के नीचे देशभर में कहां क्या कुचक्र रचा जा रहा है इसे जांचने का कोई तरीका किसी के पास नहीं है। 2021 के पहले तक कलीम सिद्दीकी को एक आदर्श मौलाना का दर्जा प्राप्त था जो गैर मुस्लिमों से बहुत मेलजोल रखता था। उनसे बहुत प्यार से बात करता था। लेकिन 2021 में जब उसके षड्यंत्रों का खुलासा हुआ तो पता चला कि ऐसा वह सिर्फ गैर मुस्लिमों को इस्लाम में दाखिल कराने के लिए करता था। एक वीडियो क्लिप में उसने स्वीकार भी किया था कि हिन्दू इतने अच्छे हैं कि इनसे प्यार से बात कर लो तो ये अपना धर्म छोड़ने के लिए बड़ी आसानी से तैयार हो जाते हैं।

कलीम सिद्दीकी की जांच हुई तो पता चला कि वह बहुत संगठित रुप से धर्मांतरण का धंधा कर रहा था। वह न सिर्फ गैर मुस्लिमों को इस्लाम कबूल करवाता था बल्कि जो इस्लाम कबूल कर लेते थे उनको भी इसी काम में लगा देता था।

भारत में माइनॉरिटी को अपने धर्म का पालन करने की ही नहीं बल्कि उसके प्रचार की भी आजादी है। जिस समय संविधान में यह प्रावधान किया गया उस समय संभवत: संविधान निर्माता यह समझने में चूक गये कि ईसाईयत या इस्लाम में धर्म प्रचार का अर्थ धर्म परिवर्तन ही होता है। आज अगर धोखाधड़ी और झूठ बोलकर धर्म परिवर्तन की ये छिटपुट घटनाएं सामने आ रही हैं तो उसके मूल में वो धर्म प्रचार के इसी संवैधानिक अधिकार का सहारा लेते हैं। अगर संविधान उन्हें अधिकार देता है कि वो अपने धर्म का प्रचार कर सकते हैं तो फिर इसे कौन रोक सकता है?

लेकिन सतह पर दिखनेवाली ये घटनाएं भयावह भविष्य का संकेत भी कर रही हैं। अब धर्मांतरण में शामिल ऐसे अल्पसंख्यक समुदाय के लोग अपने समुदाय के संरक्षण से बाहर निकलकर बहुसंख्यक समुदाय को कुतर कर कम करने में लग गये हैं। क्रिश्चियनिटी और इस्लाम दोनों ओर से भारत में भी संख्याबल की वही जंग शुरु हो गयी है जिसकी बदौलत आज एक दुनिया का सबसे बड़ा तो दूसरा दो नंबर का रिलीजन बन गया है। अब वो धर्मांतरण के अलग अलग तरीकों से दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश पर अपना अपना दावा कर रहे हैं। विश्व हिन्दू परिषद जैसी संस्थाओं का दावा है कि भारत में हर साल लगभग 12 लाख लोगों को या तो इस्लाम में दाखिल कर लिया जाता है या फिर उन्हें क्रिश्चियन बना दिया जाता है।

यूरोप या पाकिस्तान के विपरीत भारत में ये दोनों समुदाय एक दूसरे के धर्मांतरण पर बहुत कम जोर देते हैं। ये दोनों ही हिन्दू, सिख, जैन या वनवासी समुदाय के लोगों को अपना निशाना बनाते हैं। यह सीधे तौर पर इस बात का संकेत है कि वो किसी न किसी ऐसी दीर्घकालिक योजना पर काम कर रहे हैं जिससे भारत की जनसांख्यिकी को बदला जा सके।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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